लालू ने किया था राहत सामग्री में घोटाला : नीतीश
भाषा
पटना,
बुधवार,
सितंबर 3,
2008
रेल मंत्री लालू प्रसाद द्वारा बिहार के बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री उपलब्ध कराने में विफल रहने में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना किए जाने को लेकर उन पर जवाबी हमला करते हुए नीतीश ने मंगलवार को कहा कि राजद शासन काल के दौरान वर्ष 2004 में बाढ़ राहत बांटने में घोटाला हुआ था।
भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी सहित अन्य राजग नेताओं के साथ मंगलवार को बाढ़ पीड़ित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद नीतीश ने कहा कि कुछ लोगों की आदत होती है कि वे 48 घंटे में 48 बार मीडिया के सामने आएं। उन्होंने मीडिया वालों से कहा कि आप उनके बारे में प्रतिक्रिया चाह रहें हैं जिनकी सरकार ने अपने 15 साल के कार्यकाल में कभी भी बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत सामग्री का वितरण नहीं किया।
नीतीश ने कहा कि एक बार राजद शासनकाल में वर्ष 2004 में राहत सामग्री का वितरण भी किया गया तो उसमें भी उन्होंने घोटाला कर डाला। उन्होंने कहा कि वे प्रदेश की जनता की समस्या को लेकर चिंतित हैं और वे हाथ जोड़ कर मीडिया वालों से अनुरोध करते हैं कि संकट की इस घड़ी में वे उस व्यक्ति या उस पार्टी के लोगों की बयानबाजी पर उनसे प्रतिक्रिया न मांगें और उसके लिए उन्हें परेशान न करें क्योंकि इसमें व्यर्थ समय की बरबादी होती है।
नीतीश ने कहा कि लोग यह जानते हैं कि तटबंध बिहार में नहीं नेपाल में टूटा है। उन्होंने कहा कि लोग हमारी भूलचूक की ओर इशारा कर सकते हैं लेकिन संकट में घिरे लोगों के लिए राज्य सरकार द्वारा जो राहत और बचाव का काम किया जा रहा है उसकी भी प्रशंसा की जानी चाहिए क्योंकि किसी को भी देश के अबतक के सबसे बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे इस बचाव और राहत कार्य को तुच्छ बताकर उसमें लगे लोगों को हतोस्साहित नहीं करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बाढ़ की इस विभीषिका को उन्होंने चुनौती के तौर पर स्वीकारा है और जिनके भी मकान ध्वस्त हो गए हैं उन्हें पहले से बेहतर मकान बनाकर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष आई बाढ़ में करीब ढाई लाख लोग प्रभावित हुए थे और मात्र चार हेलीकाप्टरों ने उनके बीच राहत सामग्री का वितरण किया गया था लेकिन इस वर्ष आई बाढ़ कोई सामान्य बाढ़ नहीं है।
नीतीश ने कहा कि इस बार परिस्थिति दूसरी है। कोसी नदी ने अपनी धारा ही बदल ली है और लोग दूरस्थ स्थानों में फंसे हुये हैं जिन्हें निकालना एक टेढ़ी खीर है। उन्होंने कहा कि सारी कठिनाइयों के बावजूद सेना के जवान और राज्य की पुलिस तथा केन्द्र और अन्य कई राज्यों के सहयोग से राहत और बचाव कार्य जारी है।