भारत का वादा, नहीं होगा एटमी परीक्षण : अमेरिका
भाषा
वाशिंगटन,
शुक्रवार,
सितंबर 5,
2008
अमेरिका ने इस बात से इनकार किया है कि उसने इस आशय के महत्वपूर्ण दस्तावेज को छिपाकर रखा जिसमें कहा गया था कि अगर भारत परमाणु परीक्षण करता है तो वह उसकी परमाणु आपूर्ति को बंद कर देगा।
अमेरिका ने कहा कि भारत के दायित्व एकदम स्पष्ट हैं क्योंकि उसने परमाणु परीक्षण से जुड़े स्थगन पर अपनी सहमति जताई है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता राबर्ट वुड ने कहा, 'निश्चित तौर पर 123 समझौते के तहत भारत के दायित्व एकदम साफ हैं और भारतीय परीक्षण के बारे में स्थगन पर सहमत हो गए हैं। हमें उम्मीद है कि वे अपने उस वायदे का पालन करेंगे।'
सदन के विदेशी मामलों की समिति के अध्यक्ष होवार्ड बरमन द्वारा जारी 26 पृष्ठ के दस्तावेज में बुश प्रशासन की इस शर्त का जिक्र किया गया है कि भारत को परमाणु आपूर्ति के उसके आश्वासन का यह अर्थ नहीं है कि परमाणु परीक्षण करने की दशा में वह उस पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाएगा।
भारत सरकार से दस्तावेज छिपाकर रखने के सवाल को दरकिनार करते हुए वुड ने कहा, 'भारत इस बात को जानता है कि परमाणु परीक्षण को लेकर हमारा नजरिया क्या है। हमने उन्हें यह बात स्पष्ट कर दी है। और वे भी उस बात को समझते हैं। किसी भी चीज को छिपाने की कोई कोशिश नहीं की गई।'
उन्होंने कहा, 'लोगों का ऐसा मानना है लेकिन निश्चित तौर पर अमेरिकी सरकार की यह स्थिति नहीं है। वह कुछ भी छिपाकर रखने की कोशिश नहीं कर रहे थे। इस समझौते के बारे में कांगेस के अनेक सदस्यों के साथ हमने विचार विमर्श किया था। हम ऐसा करना जारी रखेंगे।'
अमेरिकी अधिकारी ने कहा, 'हमने इस समझौते के महत्व पर न केवल भारत और अमेरिका में बल्कि दुनिया भर में परमाणु अप्रसार के हमारे प्रयासों पर लगातार जोर दिया है।'
इस खुलासे ने भारत में राजनीतिक गतिविधियां सक्रिय कर दी थी और भाजपा तथा वाम दलों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का इस्तीफा मांगा जबकि संप्रग सरकार ने इस आरोप को खारिज कर दिया कि इस समझौते के बाद परमाणु परीक्षण करने का भारत का संप्रभु अधिकार खत्म हो जाएगा।