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 IST 6,  2009  00:12 जनवरी Last Updated :
फोकस
नौकरी में कटौती अब हकीकत?
एनडीटीवी इंडिया संवाददाता
नई दिल्ली, बृहस्पतिवार, नवंबर 20, 2008
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बाजार में निराशा और उद्योगों में मंदी के इस दौर में नौकरियां जाने का डर अब असलियत में बदल रहा है। हालांकि सरकार बड़ी भारतीय कंपनियों को लगातार सलाह दे रही है कि वे नौकरियां लेने के बजाय कॉस्ट कटिंग का दूसरा रास्ता अपनाए, लेकिन जानकारों का मानना है कि भारत में नौकरियां में कटौती अब हकीकत हो रही है।

कंपनियां अपने कर्मचारियों को पिंक स्लिप देने से बच रही हैं, इसलिए उन्होंने कॉस्ट कटिंग का दूसरा रास्ता अपनाना शुरू कर दिया है। छोटे निर्यातकों से लेकर बड़े-बड़े औद्योगिक घरानों तक के लिए कर्मचारियों की छंटनी से बच पाना दिन ब दिन मुश्किल होता जा रहा है, जबकि कई छोटी औद्योगिक इकाइयों ने इस पर अमल शुरू कर दिया है। कई कंपनियां कॉस्ट कटिंग या दूसरा बीच का रास्ता अपना रही हैं, जिससे किसी की नौकरी न जाए।

आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी इंफोसिस ने अपने कर्मचारियों को पढ़ाई के लिए अवकाश लेने को प्रोत्साहित करने का फैसला किया है। इस अवकाश के दौरान वह अपनी आधा तनख्वाह निकाल सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ इंफोसिस के मुखिया का कहना है कि वह इस साल हजारों कर्मचारियों की भर्ती करने वाले हैं।

इंफोसिस के सह-अध्यक्ष नंदन निलकेनी कहते हैं, जहां तक इंफोसिस की बात है, हमने जितने लोगों को नौकरी की पेशकश की, उनको लेंगे। ये संयोग की बात है कि अध्ययन के लिए अवकाश की बात इस समय आई। हमने इस बारे में उस समय भी सोचा था, जब मार्केट उछाल पर था।

लेकिन जानकारों के मुताबिक नौकरियों में कटौती भारत में हकीकत बन जाएगी। हर सेक्टर में पांच से दस फीसदी नौकरियों में कटौती की जाएगी। बहुत से लोगों के मुताबिक कॉस्ट कटिंग तो शुरुआत है। अगर इससे समस्या का हल नहीं निकलता है, तो कई कंपनियां नौकरियों में कमी करने पर मजबूर होंगी और नौकरी की कमी की वजह से अलग-अलग सेक्टर के हजारों कर्मचारियों का भविष्य अधर में पड़ जाएगा।
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