वैश्विक आर्थिक मंदी से प्रभावित घरेलू अर्थव्यवस्था में फिलहाल सुधार के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। सरकार के प्रोत्साहन पैकेजों के बावजूद विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर कम हुए हैं। दूरसंचार और उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र में अवश्य रोजगार कुछ बढ़ा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (एसोचैम) के ताजा अध्ययन के मुताबिक शिक्षा, होटल कारोबार, सूचना प्रौद्योगिकी, रीयल एस्टेट, बैंकिंग, मीडिया, कपड़ा, ऑटो, निर्माण और इंजीनियरिंग क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर काफी घट गए हैं। अध्ययन के अनुसार पिछले तीन महीनों में विभिन्न क्षेत्रों में नियुक्तियों में कुल मिलाकर 49 प्रतिशत तक गिरावट आई है। सितंबर से दिसंबर 2008 के मुकाबले जनवरी से मार्च 2009 के तीन महीनों में नियुक्तियों का एसोचैम सूचकांक घटकर आधा रह गया। इस सूचकांक में 26 विभिन्न उद्योगों के सूचकांक को शामिल किया गया है। इसमें प्रत्येक तिमाही में रोजगार सृजन के आधार पर उद्योगों को अंक दिए गए हैं। इसमें सितंबर से दिसंबर 2008 की तिमाही को आधार वर्ष बनाया गया है। इस अवधि में विभिन्न उद्योगों का नियुक्ति सूचकांक एक हजार अंक था जो कि मार्च 2009 के अंत में घटकर 509.72 अंक रह गया। एसोचैम के अध्यक्ष सज्जन जिंदल ने कहा कि वैश्विक आर्थिक मंदी का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था के ज्यादातर क्षेत्रों पर देखा जाने लगा है। देश के लिए आज रोजगार सृजन गंभीर मुद्दा बन गया है। आर्थिक वृद्धि का आंकड़ा नीचे आने के साथ ही अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार वृद्धि को भी बड़ा झटका लगा है।