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 IST 23,  2009  00:56 नवंबर Last Updated :
भारत से
समलैंगिकता कोई अपराध नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट
एजेंसियां
नई दिल्ली, बृहस्पतिवार, जुलाई 2, 2009
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दिल्ली हाईकोर्ट ने धारा-377 से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अहम फैसला सुनाया है कि समलैंगिकता कोई अपराध नहीं है।

अदालत ने कहा कि पुरुष का पुरुष से और स्त्री का स्त्री से आपसी सहमति से बनाया गया यौन संबंध अपराध नहीं है और धारा-377 मौलिक अधिकारों का हनन है।

न्यायालय ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के एक वक्तव्य का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि संविधान समलैंगिकों को भी अन्य नागरिकों की भांति समान अधिकार देता है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अजीत प्रकाश शाह और न्यायमूर्ति एस मुरलीधर की खंडपीठ ने गुरुवार को कहा कि अगर आईपीसी की धारा 377 में संशोधन नहीं हुआ तो यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन होगा, जो सभी नागरिकों को समान अवसर देने और कानून के समक्ष सभी के समान होने की बात कहता है।

न्यायालय ने जवाहर लाल नेहरू के वक्तव्य का हवाला देते हुए कहा, "समानता और अनिर्णय संविधान के सिद्धांत हैं।"

इस फैसले के बाद पुलिस अब सहमति से बने समलैंगिक संबंधों के आरोप में किसी भी वयस्क को गिरफ्तार नहीं कर सकेगी। इस मामले में याचिका दायर करने वाली नाज फाउंडेशन की वकील तृप्ति ने कहा, "अब यह स्पष्ट हो गया है कि वयस्कों के बीच सहमति से बना यौन संबंध अपराध नहीं होगा।"

उल्लेखनीय है कि धारा 377 के तहत  देश में समलैंगिकता और अप्राकृतिक यौन संबंध को अपराध माना जाता है। यह कानून भारत में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बनाया गया था।


कोर्ट ने यह भी साफ किया असहमति से बनाए जाने वाले यौन संबंधों और अप्राकृतिक यौन के मामले में धारा-377 जारी रहेगी।
अदालत ने कहा कि सबको अपनी तरह से जीने का अधिकार है और सहमति से बनाया गया यौन संबंध अपराध नहीं है। फिल्म अभिनेत्री सेलिना जेटली ने कोर्ट के इस फैसले को अहम बताया है। फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर और कलाकार बॉबी डार्लिंग ने भी इसका स्वागत किया है।

इधर, कानून मंत्री वीरप्पा मोइली का कहना है कि वह हाईकोर्ट के फैसले की कॉपी देखने के बाद ही कोई प्रतिक्रिया देंगे।
गौ
रतलब है कि केंद्र सरकार दुविधा में है कि धारा-377 को खत्म किया जाए या नहीं।

हाल ही में सरकार ने इस बात के संकेत दिए थे कि इस कानून में बदलाव किए जा सकते हैं। इससे समलैंगिक अधिकार के लिए लड़ने वालों की थोड़ी उम्मीद बंधी है।
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टिप्पणियां
कांग्रेस आई, कांग्रेस आई; समलैंगिकता लाई, समलैंगिकता लाई; कांग्रेस का हाथ, समलैंगिको के साथ; आडवाणी अंकल खामोश क्यू हैं?
arvind, merbiotech@gmail.com, Delhi
Delhi high court ke is faisle se me sehmat hun. hum sabhi ko apni khusi se jine ka adhikaar hai.
tripan kumar, tripan1985@gmail.com, delhi
मैं हाई कोर्ट के फैसले विरुद्ध हूं।
अनुभा , abhishekbhardwaj5@yahoo.com, delhi
 
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