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 IST 23,  2009  13:39 नवंबर Last Updated :
फीचर्ड ब्लॉग
जसवंत ने साज़िश की है : जिन्ना
रवीश कुमार
नई दिल्ली, बुधवार, अगस्त 26, 2009
टिप्पणियां:
पढ़ें (12)
(ब्लॉगरों, जिन्ना जी बहुत परेशान हैं। उनका एसएमएस आया था। फेसबुक पर भी लिखा है कि जसवंत बेकार आदमी हैं और मुझे पाकिस्तान से निकलवाने की कोशिश कर रहे हैं। मुझसे भी कहा कि मैं ब्लॉग पर लिखकर जिन्ना साहब की पोज़िशन क्लियर कर दूं, सो, लिख रहा हूं)

हमने क्यों नहीं सोचा कि इस विवाद पर जिन्ना साहब क्या सोचेंगे? जसवंत सिंह की ही सोचते रहे। बिल्कुल राइट कहा है जिन्ना जी ने मुझे। बोले, आज अगर ज़िंदा होता तो जसवंत सिंह के खिलाफ मुस्लिम लीग से भी प्रस्ताव पास करा देता कि बीजेपी से निकाले गए इस नेता को कभी भी हमारी पार्टी में नहीं लिया जाएगा। जाने दें इसे अमर सिंह वाली नश्वर पार्टी में।

ब्लॉगरों, जसवंत सिंह ने जिन्ना को फंसा दिया है। जिस मुल्क को बनाने के एवज़ में वह राष्ट्रपिता कहलाते हैं, जसवंत उसी मुल्क को नेहरू और गांधी की ग़लती का नतीजा बता रहे हैं। हे राम। जसवंत की किताब और इससे पैदा विवाद से लगता है कि पाकिस्तान बाई मिस्टेक बन गया। जिन्ना हिन्दुस्तान बनवा रहे थे, लेकिन बन गया पाकिस्तान। स्पेलिंग मिस्टेक से। इससे तो जिन्ना की अहमियत कम होती है। पाकिस्तान के लोग क्या सोचेंगे कि जिस आदमी को हम पाकिस्तान का बापू समझते रहे, वह तो चाहता ही नहीं था कि हम एक मुल्क के रूप में पैदा हों। भला हो गांधी-नेहरू की कमज़ोरी और गलती का, जिससे इस्लामी विश्व का एक मुल्क बन गया।

जिन्ना ज़िंदा होते तो आज पाकिस्तान में जसवंत की किताब को बिकने न देते। मोदी को फोन करते कि तुम भी अपने यहां बैन करो, हम भी अपने यहां बैन करते हैं। चिल्लाने लगते। जसवंत, सुनो, पाकिस्तान मेरा आइडिया था भाई। ओरीजिनल। बिना मोलभाव किए, बिना नेहरू-गांधी के साथ दांव चले क्या कोई पाकिस्तान दे देता। अब तुम ऐसे लिख दिए हो, जैसे मैं पाकिस्तान नहीं चाहता था। अरे, यह सब मत बोलो। पाकिस्तान में लोग मुझे क़ायदे-आज़म की पोस्ट से रीमूव कर देंगे।

जिन्ना भावुक हो जाते। कहते - हे जसवंत। आज़ादी के आंदोलन के कुरुक्षेत्र में मैं कर्ण की तरह खड़ा रहा। किसी के न अपनाए जाने की ग्रंथि ने मुझे अपने भाइयों के खिलाफ़ ख़ड़ा कर दिया। ठीक लिखा है मेरे बारे में शशि थरूर ने। कितना भी दानी हो जाऊं, कर्ण का पात्र इतिहास का महान किरदार नहीं है। दान देकर कौन अमर हुआ है इतिहास में। वह भी आजकल के टाइम में, जब सब चैरिटी करते हैं। मेरी बैरीस्टरी, मेरी दलीलें, मेरी इंग्लिश लाइफस्टाइल और मेरी हिम्मत। मैंने इस्लाम को एक मुल्क दिया है, अकेले अपने दम पर। कर्ण से कम नहीं था मैं। लेकिन तुम तो मेरे साथ वही कर रहे हो, जो कर्ण के साथ हुआ। इतिहास में कभी रॉन्ग साइड पर नहीं होना चाहिए। पाकिस्तान बनवाने का यह मेरा अफसोस है, लेकिन ज़िन्दा होता तो दोस्त, आज़ाद भारत में रोज़ पाकिस्तान बन रहा होता। हर चुनाव में मुस्लिम लीग का एजेंडा लेकर लोग दौड़ने लगते। मैंने इंडिया को एक दूसरी आज़ादी दी है। उस हिसाब से मुझे वहां भी रेसपेक्ट मिलना चाहिए।

जस्सू, अगर मैं अर्जुन के साथ होता तो आज करन-अर्जुन टाइप की फिल्में मेरी मिसाल देकर बनतीं। इस युधिष्ठिर के चक्कर में मैं बर्बाद हो गया। जसवंत, तुम मुझे अकेला छोड़ दो। मुझसे पाकिस्तान बनाने का क्रेडिट मत छीनो। गांधी-नेहरू को तुम ग़लत साबित करके क्या करोगे? अगर तुमने हिन्दुस्तान पाकिस्तान को मिलाने की कोशिश की तो राष्ट्रपिता की कुर्सी चली जाएगी। अगर तुमने पाकिस्तान के लिए गांधी को ज़िम्मेदार बताया तो और प्रॉब्लम हो जाएगा। हमारे यहां लोग तुम्हारे बापू को अपना बापू कहने लगेंगे। कहेंगे कि पाकिस्तान तो गांधी के चलते बना तो तुमको क्यों जिन्ना हम सैल्यूट करें। जस्सू, तुम्हारी पार्टी चुनाव में हारी है तो इस खुंदक में मुझे इतिहास में क्यों हराना चाहते हो। उसे हराओ, जिसने तुम्हें हराया है। सोनिया, राहुल से पंगा लो। मुझे छोड़ दो, जसवंत।

जिन्ना की इस अपील पर जसवंत जी दिन में ही ड्रिंक कर लेते हैं। वाजपेयी से मिलने जाते हैं। बाहर आकर प्रेस से कहते हैं कि वाजपेयी को भी किताब पसंद नहीं आई। जिन्ना जी ने अटल जी से शिकायत कर दी है। अटल जी ने कहा है कि लाहौर बस यात्रा तभी सफल होगी, जब भारत यह लाइन लेगा कि पाकिस्तान एक मुल्क है। उसे गांधी-नेहरू ने नहीं, जिन्ना ने बनवाया है। यह जिन्ना का ड्रीम प्रोजेक्ट था। वाजपेयी जी ने कहा है कि यह मत कहो कि गलती से बन गया। तुम उस मुल्क की बुनियाद पर सवाल खड़े कर भविष्य के रिश्ते नहीं तय कर सकते। जसवंत, इस किताब का खंडन कर दो। प्रेस वालों से कह देना कि मेरी किताब को कहा गया बयान समझकर खंडन मान लिया जाए। पाकिस्तान गलती से नहीं बना। जिन्ना साहब ने बनाया। उनको कुछ बनाना था, इसलिए पाकिस्तान बना दिया। हमको उनसे निभाना है, इसलिए पाकिस्तान को मान लिया है।

इस विवाद से कन्फ्यूज़न क्रिएट हो रहा है। मरकरी की तरह जलने लगती है यह भाजपा। देर से। जिन्ना लेटर लिखते हैं। पाकिस्तान के बनने के कॉन्सेप्ट का विरोध कर जसवंत संघ के अखंड भारत के सपने को पूरा करना चाहते हैं। यह तो गांधी और नेहरू से भी खतरनाक हैं। यह जस्सू अब अगर अमर सिंह की पार्टी में गया तो गज़ब कर देगा। कह देगा कि अगर जिन्ना इंडिया में होते तो यूपी में सरकार मायावती की नहीं, मुस्लिम लीग की होती। फिर पाकिस्तान वाले मुझे क्या कहेंगे। एक मुल्क का पिता या फिर यूपी का सीएम। बहुत टेंशन हो रहा है। अमर सिंह मेरी हालत कांग्रेस वाली कर देंगे। समर्थन की चिट्ठी भी देंगे और पानी पी-पी के गाली भी।

इसलिए जसवंत, तुमने ठीक नहीं किया। पाकिस्तान मेरा आइडिया था। मैंने बनाया। गांधी को आइडिया पसंद नहीं था। मैं अपनी टीम लेकर निकल लिया। जवाहर और पटेल के पास विकल्प क्या थे। उन्होंने तो सिर्फ मेंटेन किया है। जो मिला, उसी की तुरपाई करते रहे। मैंने क्रिएट किया है भाई। इतिहास में मैं उनसे ज़्यादा टॉवरिंग हूं। दोनों विरोध क्यों करते? कभी सोचा तुमने, जस्सू? क्या वे मेरे गुलाम थे, जो मेरी हर बात मानते। मेरी हां में हां मिलाते? क्या मैं उनका गुलाम था? नहीं। वे पाकिस्तान का विरोध कर कांग्रेस को मुस्लिम लीग में मिला देते क्या? तुम्हें क्या लगता है कि कांग्रेस जवाहर और पटेल की जेबी संस्था थी? अगर होती तो क्या पटेल को जवाहर अपने मंत्रिमंडल में लेते? मैं पीएम के लिए फाइट कर रहा था? यह लेवल था मेरा? कितने पीएम हो गए इंडिया-पाकिस्तान में। डू यू रिमेंबर ऑल ऑफ देम। बट यू रिमेंबर मी एंड गांधी। इसीलिए मैंने राष्ट्रपिता वाला रास्ता ले लिया। इंडिया के दो राष्ट्रपिता होते क्या? गांधी और जिन्ना? पाकिस्तान के हैं और इंडिया के भी।

सवाल तो सोचो, जसवंत। जसवंत, तुम्हारा कॉन्सेप्ट प्रैक्टिकल नहीं है। पाकिस्तान मैंने बनाया है। पाकिस्तान नहीं बनाता तो क्या भारत में लोग मुझे गांधी की जगह सिर पर बिठाते। कतई नहीं। जवाहर और गांधी की लीगेसी आज तक चल रही है। मेरी कहां है? गूगल पर सर्वे करा लो। गांधी पॉपुलर हैं या मैं? अब यह मत कर देना, जसवंत। अब तुम मुझे छोड़ दो। ठीक किया बीजेपी ने, तुमको निकाल दिया। तुमने बीजेपी के साथ मेरा भी नाम खराब किया है। मैं चाहता हूं कि पाकिस्तान बनाने का क्रेडिट मुझे मिले न कि जवाहर-गांधी को।
 
विशेष नोट : यह आलेख लेखक के निजी विचार हैं, और एनडीटीवीख़बर.कॉम और एनडीटीवीसमूह का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है...
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बहुत ही मजेदार, दरअसल यही बीजेपी की हकीकत रह गई है। सभी सत्ता के लालच का शिकार हो गए हैं और जनाधार वाले नेताओं का कोई नाम नहीं लेता सब के सब एसी के नेता ... पढ़ें
Avinash, avi.rt01@gmail.com, Mumbai
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रवि shukla, ravishukla1310@gmail.com, allahabad
BJP ke ghamasan ko apne kitna jaykedar aur lazzatdar bana diya..yeh kam bhi BJP ki mushkilonki tarah asan nahin..badhai
sanjayramakant, sanjayramakant@gmail.com, Maharashtra
 
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