महाराष्ट्र में नई सरकार बनाने की गुत्थी और उलझी
वार्ता
मुम्बई,
मंगलवार,
नवंबर 3,
2009
महाराष्ट्र के राज्यपाल एससी जमीर ने राज्य में नई सरकार के गठन के लिए अपनी तरफ से पहल करके राजभवन में मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और उपमुख्यमंत्री छगन भुजबल दोनों को ही अलग-अलग बुलाकर उनकी राय मालूम की।
हालांकि, राज्य में सत्तारूढ़ लोकतांत्रिक मोर्चा के विधानसभा चुनाव में गत 22 अक्टूबर को जीत दर्ज करने के बाद नई सरकार के गठन का रास्ता अभी तक साफ नहीं हुआ है। इस मोर्चा में शामिल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के बीच मंत्री पद और उनके विभागों के बंटवारे को लेकर चल रही रस्साकसी के बीच नई सरकार के गठन में गतिरोध बना हुआ है।
राकांपा के प्रदेश अध्यक्ष आरआर पाटिल ने कहा कि उनकी पार्टी ने कांग्रेस को नई सरकार बनाने के लिए बाहर से समर्थन देने का निर्णय किया है। उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री एवं राकांपा विधायक दल के नेता भुजबल ने पार्टी के इस निर्णय से राज्यपाल को मौखिक रूप से बता दिया है।
लेकिन, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे ने राकांपा की इस पेशकश को खारिज करते हुए कहा कि यह व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि राकांपा को सरकार के गठन की प्रक्रिया से बाहर रहने के बारे में बोलने से पहले 'जमीनी वास्तविकताओं' का पता लगा लेना चाहिए।
दूसरी ओर, नई सरकार के गठन में हो रहे असामान्य विलम्ब के मद्देनजर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की अपनी मांग पर जोर देने के लिए विपक्षी शिवसेना-भारतीय जनता पार्टी का प्रतिनिधिमंडल बुधवार को राजभवन जाकर राज्यपाल से मिलेगा।