आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय की पूछताछ मधु कोड़ा नहीं झेल पाए और पेट दर्द का बहाना बनाकर रांची के अपोलो अस्पताल में भर्ती हो गए। शायद चार हजार करोड़ रुपये पच नहीं रहे हैं, जो रकम मुख्यमंत्री रहते हुए उन पर गबन करने का आरोप है। वह पूरे दो साल भी मुख्यमंत्री नहीं रहे।
लालू यादव और सोनिया गांधी का साथ था और बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने की मजबूरी थी। किसी ने ध्यान नहीं दिया कि अकेले मधु कोड़ा झारखंड के खजाने का पांचवा हिस्सा गबन कर रहे हैं।
इस भ्रष्टाचार की गंगा में औरों ने भी हाथ धोए हैं। पैसा जो आम लोगों के लिए था, वह गया है नेताओं की जेब में। मधु कोड़ा जब सितंबर, 2006 में मुख्यमंत्री बने थे, तो वह एक निर्दलीय विधायक थे और उन्हें पांच अन्य निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल था।
बीजेपी को बाहर रखने के लिए कांग्रेस और आरजेडी ने कोड़ा का साथ दिया और दो साल सत्ता पर काबिज रहने दिया। अब मधु कोडा Prevention of Money Laundering Act के तहत आने वाले पहले मुख्यमंत्री हैं और कभी भी गिरफ्तार हो सकते हैं।
तीन दिनों तक मधु कोड़ा की संपत्ति से जुड़े 70 स्थानों पर आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय के छापे पड़ते रहे। मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, जमशेदपुर, चाईबासा, पटना, रांची लखनऊ, गाजियाबाद… सभी जगहों की खाक छानते रहे आयकर अफसर।
पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ केस लगातार मजबूत होता चला गया। पहले दो करोड़ रुपये के गहने मिले, फिर तीन करोड़ रुपये कैश मिला। सब बेनामी… 70 बैंक खाते फ्रीज किए गए, लेकिन कोड़ा की अकूत दौलत की तह नहीं मिल पा रही थी।
फिर जमशेदपुर में एक चार्टर्ड एकाउटेंट के घर छापा पड़ा। वहां से निकले दस्तावेड, जिससे कोड़ा के भ्रष्टाचार की गुत्थी खुली। विदेशों में 2200 करोड़ रुपये लगाने की दास्तान। लाइबेरिया में कोयले की खदान में 17 लाख डॉलर का निवेश, थाइलैंड में होटल, दुबई में स्टील प्लांट, मलेशिया और इंडोनेशिया में करोड़ों रुपये का निवेश...कोड़ा ने भारत में भी करोड़ों रुपये की संपत्ति खरीद रखी है।
मुंबई में होटल और तीन कंपनियों में पैसा लगा है, कोलकाता में जमीन-जायदाद है। दिल्ली, पटना, लखनऊ… लगता है कोई भी शहर छूटा नहीं है। आखिर झारखंड के बजट का पांचवां हिस्सा, जो उनके पेट में गया था… पूरे चार हजार करोड़ रुपये।
एक मुख्यमंत्री कितना भ्रष्टाचार कर सकता है, मधु कोड़ा उसकी जीती जागती मिसाल है। हजारों करोड़ का घपला किया, लेकिन बेनामी। साथ देने वाले विनोद सिन्हा, संजय चौधरी की तलाश हो रही है। कई और नाम सामने आते जा रहे हैं। हर रोज दस्तावेज मिल रहे हैं। पता नहीं कब आय की तह पता चलेगी।
सितंबर, 2006 में जब मधु कोड़ा ने झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी तो उनकी संपत्ति थी 12 लाख की। 35 साल के कोड़ा ने रिकॉर्ड बनाया था, सबसे कम उम्र के सीएम बनने का। लेकिन खिड़की में ग्रिल लगाने वाले खदान के मजदूर ने दो साल सत्ता में रह कर सब कुछ बदल डाला।
कोड़ा कहा करता था कि पैसे के बिना तो वह एक मिनट भी इस कुर्सी पर नहीं बना रह सकता। बस यहीं से शुरू हुई भ्रष्टाचार की गंगा और साथ देने के लिए तैयार हुई गुर्गों की फौज।
पहला साथी बना, चाईबासा का विनोद सिन्हा, पेशे से पंचर मैकेनिक। फिर साथ आया जमशेदपुर का संजय चौधरी, एक ट्रक का मालिक, जिसका पिता खैनी बेचा करता था। सिन्हा और इन दोनों ने मुंबई का इस्तेमाल किया भ्रष्टाचार का पैसा विदेश भेजने के लिए। वैसे मुंबई में भी कम पैसा नहीं लगा।
खबर है कि बालाजी बुलियन नाम की कंपनी में 1500 करोड़ का निवेश किया गया था। ये कंपनी मानती है कि उनके यहां रेड पड़ी, लेकिन कोड़ा से संबंध नकारती है।
खबर है कि विनोद सिन्हा और संजय चौधरी इस समय दुबई में हैं। दुबई में कोड़ा के पैसे का निवेश करने में इन दोनों का साथ दिया अब्दुल भाई नाम के एक शख्स ने। ये तीनों सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर हैं और लगता नहीं कि ज्यादा दिन तक ये कानून को चकमा दे पाएंगे।