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 IST 22,  2009  01:05 नवंबर Last Updated :
खेल
जीत की दहलीज पर पहुंचकर हारा भारत
भाषा
हैदराबाद, बृहस्पतिवार, नवंबर 5, 2009
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सत्रह हजारी सूरमा सचिन तेंदुलकर की 175 रन की मैराथन पारी के दम पर पांचवें एक दिवसीय क्रिकेट मैच में गुरुवार को टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया के 350 रन के एवरेस्ट को लांघने के करीब तो पहुंची लेकिन आखिरी ओवरों में दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से विकेट गिरने के कारण उसे तीन रन से पराजय का सामना करना पड़ा।

जीत के लिए 351 रन के विशाल लक्ष्य का डटकर सामना करते हुए 45वां वनडे शतक बनाने वाले तेंदुलकर और सुरेश रैना (59) ने पांचवें विकेट के लिए 114 गेंद में 137 रन बनाकर भारत को मंजिल के करीब पहुंचाया। लेकिन 48वें ओवर में 332 के स्कोर पर सचिन का आउट होने से मैच का नक्शा बदल गया। भारतीय टीम 49.4 ओवर में 347 रन पर सिमट गई।

आखिरी ओवर में भारत को आठ रन चाहिए थे लेकिन नाटकीय घटनाक्रम में प्रवीण कुमार चौथी गेंद पर दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से रन आउट हुए तो खचाखच भरे स्टेडियम में बैठे हजारों दर्शकों और टीवी पर नजरें गड़ाए उन करोड़ों क्रिकेटप्रेमियों को सांप सूंघ गया जो इतिहास रच रहे सचिन की इस पारी के गवाह रहे थे।

इस जीत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया सात मैचों की श्रृंखला में 3-2 से आगे हो गया है। जीत भले ही ऑस्ट्रेलिया की झोली में गई हो लेकिन क्रिकेटप्रेमियों का दिल निस्संदेह तेंदुलकर ने जीता जो सात के स्कोर पर पहुंचते ही वनडे क्रिकेट के इतिहास में 17000 रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज बन गए। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय सरजमीं पर 6000 रन भी पूरे कर लिए।

अपने पुराने फार्म में नजर आए इस चैम्पियन बल्लेबाज ने सिर्फ 141 गेंद में 175 रन की पारी खेली जिसमें 19 चौके और चार छक्के शामिल थे। उनका पूरा साथ दिया रैना ने जिसने 59 गेंद में तीन चौकों और तीन छक्कों की मदद से 59 रन बनाए।

वीरेंद्र सहवाग (30 गेंद में 38 रन) और तेंदुलकर से अच्छी शुरूआत मिलने के बाद भारत ने मध्यक्रम में जल्दी विकेट गंवा दिए। फिट होकर लौटे गौतम गंभीर (आठ), युवराज सिंह (नौ) और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (छह) कोई कमाल नहीं कर सके। दूसरे छोर से हालांकि तेंदुलकर ने रनगति बनाए रखी और मैच पर से मेजबान की गिरफ्त ढीली नहीं होने दी।

चार विकेट 162 के स्कोर पर गिरने के बाद वह और रैना भारत को 43वें ओवर में 299 के स्कोर तक ले गए। इस समय 45 गेंद में 52 रन की जरूरत थी लेकिन वाटसन ने इस ओवर में दोहरे झटके देकर ऑस्ट्रेलिया को मैच में लौटाया।

पहले रैना ने विकेट के पीछे ग्राहम मनोउ को कैच थमाया और फिर पिछले कुछ मैचों से शानदार बल्लेबाजी कर रहे हरभजन (00) इसी अंदाज में पवेलियन लौटे।

तेंदुलकर के टिके होने से भारत की उम्मीदें अभी भी कायम थी। लेकिन 48वें ओवर की पहली ही गेंद पर मैकाय की गेंद पर पैडल स्कूप शाट खेलने के प्रयास में उन्होंने शार्ट फाइन लेग पर खड़े हौरिट्ज को आसान कैच थमा दिया।

इससे पहले शॉन मार्श और शेन वाटसन के बीच पहले विकेट की 145 रन की साझेदारी और भारत के लचर क्षेत्ररक्षण की बदौलत ऑस्ट्रेलिया चार विकेट पर 350 रन का विशाल स्कोर बनाया। सपाट पिच पर टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग का फैसला एकदम दुरूस्त रहा और दोनों सलामी बल्लेबाजों ने भारत की दिशाहीन गेंदबाजी और लचर क्षेत्ररक्षण का जमकर फायदा उठाते हुए चारों ओर रन बनाए। वाटसन खास तौर पर काफी आक्रामक नजर आए जिन्होंने आशीष नेहरा और प्रवीण कुमार की गेंदों की जमकर धुनाई की।

मार्श ने 93 रन की अपनी पारी में 54 रन सिर्फ चौके छक्के के दम पर बनाए। उन्होंने 89 गेंदों का सामना करके अपनी पारी में नौ चौके और तीन छक्के जड़े। वहीं मार्श ने सूत्रधार की भूमिका निभाते हुए 112 गेंद में आठ चौकों और दो छक्कों की मदद से 112 रन बनाए। कप्तान रिकी पोंटिंग ने 45 गेंद में 45 और कैमरून व्हाइट ने 33 गेंद में 57 रन बनाए। व्हाइट ने अपनी विस्फोटक पारी में पांच छक्के और दो चौके लगाये जबकि हस्सी 22 गेंद में 31 रन बनाकर नाबाद रहे। भारतीयों ने चार कैच टपकाकर ऑस्ट्रेलिया की बड़ा स्कोर बनाने की राह खुद आसान कर दी। भारत के सर्वश्रेष्ठ क्षेत्ररक्षकों में शुमार युवराज सिंह ने वाटसन का रिटर्न कैच उस समय छोड़ा जब उन्होंने सिर्फ तीन रन बनाए थे। वाटसन ने इस जीवनदान का पूरा फायदा उठाते हुए आक्रामक पारी खेली।

ऑस्ट्रेलिया के 50 रन दसवें ओवर में और 100 रन 16वें ओवर में बने। हरभजन सिंह ने बीच के ओवरों में रनगति पर कुछ अंकुश लगाया। उन्होंने वाटसन को आउट करके पहले विकेट की साझेदारी को भी तोड़ा। रविंदर जडेजा ने उनका कैच लपका। भारतीय गेंदबाज पूरी तरह लयहीन नजर आए। श्रृंखला में पहला मैच खेल रहे मुनाफ पटेल और रविंदर जड़ेजा खास तौर पर काफी महंगे साबित हुए। गेंदबाजों के खराब प्रदर्शन के साथ क्षेत्ररक्षक भी काफी ढीले दिखे। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने हरभजन की गेंद पर मार्श का कैच टपकाया जब उन्होंने सिर्फ 29 रन बनाए थे। ऑस्ट्रेलिया का स्कोर उस समय 16वें ओवर में 100 रन था। इसके बाद युवराज की गेंद पर शार्ट एक्स्ट्रा कवर में वीरेंद्र सहवाग ने उनका कैच छोड़ा जब वह 52 रन पर खेल रहे थे। युवराज ने वाटसन को 90 के स्कोर पर भी जीवनदान दिया। इसका हालांकि वाटसन फायदा नहीं उठा सके और तीन रन का इजाफा करके पवेलियन लौट गए। हरभजन और युवराज ने 19वें से 29वें ओवर के बीच में कोई चौका नहीं लगने दिया लेकिन व्हाइट और पोंटिंग ने बाद में सारी कसर निकाल दी। हस्सी ने भी उनका बखूबी साथ दिया।
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सचिन तेंदुलकर ने साबित कर दिया कि क्यों उनको भगवान् कहा जाता है। हमको उन पर गर्व है।
सुभाष बुरा , subhash_burra@yahoo.com,, Kurukshetra
 
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