नौजवानों को मिले सैन्य प्रशिक्षण : रुखसाना
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
चंडीगढ़,
शुक्रवार,
नवंबर 6,
2009
कश्मीर घाटी के एक गांव के अपने मकान में घुसे आतंकवादियों का बहादुरी से अकेले सामना करने वाली रुखसाना का कहना है कि सरकार को नौजवानों के लिए सैन्य प्रशिक्षण अनिवार्य कर देना चाहिए।
रुखसाना ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा, "बड़े या छोटे के फर्क के बिना प्रत्येक नौजवान को अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण से गुजरना चाहिए। यह एक तरीका है जिसे अपनाकर हमारे देश से आतंकवाद को दूर किया जा सकता है।" अपने 27 सितम्बर के अनुभव को याद करते हुए रुखसाना ने कहा, "मैंने अपने भाई के साथ आतंकवादी को मार डाला था। वे संख्या में तीन थे और उन्होंने हमारे घर में घुसने के बाद मेरे माता-पिता को पीटना शुरू कर दिया था। मुझे तुरंत एहसास हुआ कि वे उन्हें मार डालना चाहते हैं।"
रुखसाना ने कहा, "मुझे लगा मेरे माता-पिता के बिना मेरे जीवन का कोई मतलब नहीं है। इसलिए मैंने अपने भाई के साथ तुरंत एक कुल्हाड़ी उठा ली और उनमें से एक पर हमला कर दिया। हमने उसके सिर पर हमला किया और वह फर्श पर गिर गया। फिर हमने राइफल उठा ली और गोलियां बरसाना शुरू कर दिया और किसी तरह अपने माता-पिता को बचाया।" रुखसाना ने एक आतंकवादी को मार दिया था जबकि दो अन्य को घायल कर दिया था। रुखसाना और उनका भाई एजाज अहमद 'अखिल भारतीय आतंकवाद विरोधी मोर्चा' के अध्यक्ष एमएस बिट्टा के साथ चण्डीगढ़ आए हैं। यहां उन्होंने कॉलेज छात्रों के साथ चर्चा की। रुखसान कहती हैं कि वह और उनका भाई भारतीय सेना या सीआरपीएफ या बीएसएफ से जुड़कर राष्ट्र सेवा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यदि जम्मू-कश्मीर में नियुक्ति हो तो वे पुलिस में भी काम करने को तैयार हैं।