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SME
 IST 23,  2009  00:56 नवंबर Last Updated :
टिप्पणियां
शायद ऐसे मां-बाप को उन्हीं बेटियों के हाथों सड़क पर फांसी पर लटकवा देना न्याय होगा, लेकिन फिर सोचती हूं, कि क्या ऐसा होना बेटियों के लिए सही उदाहरण हो ... पढ़ें
सोनिया कपूर,usonkapoor@gmail.com, बरेली
आदरणीय करन... जहां तक मुझे अपना पढ़ा याद है, गुरु गोविन्द सिंह ने वर्ष 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की थी, और वर्ष 1708 में (अपनी मृत्यु से कुछ पहले) ... पढ़ें
संपादक, एनडीटीवीख़बर.कॉम,editor.ndtvkhabar.com@gmail.com, नई दिल्ली
आपने लाइनें लिखी हैं - "देहि शिवा वर मोहे इहै", लेकिन इसके अर्थ में गलती कर दी है। गुरु साहब का फरमान है - "सब सिखन को हुकम है, गुरु मानयो ग्रन्थ", और ... पढ़ें
करन,kv_sandhu@in.com, देल्ही
Vivekji aapne jo aaj sawal uthaya hai ki kya sirf ye ek baltkar hai to yakinan ye sirf balatakar nahi hai ye us baap-beti ke pavitra rishte ka khun hai, ... पढ़ें
mukund lokhande,mukund.lokhande@gmail.com, mumbai
क्या इसी कल की कल्पना की थी हमने? अगर यही है हमारा आने वाला कल, तो नहीं चाहिए हमें ऐसा कल, जहां बच्चे अपने मां-बाप से ही असुरक्षित महसूस करे... जहां ... पढ़ें
कुल्दीप सिन्घ,akash0112@gmail.com, बन्गलोरे
क्‍या 21वीं सदी में जी रहे हैं हम ?
संगीता पुरी,gatyatmakjyotish@gmail.com, बोकारो, झारखंड
घिन आती है ऐसे लोगों के बारे में पढ़कर ...मेरा मूड ख़राब हो जाता है
अनिल कान्त,anilkant.mca@gmail.com, फरीदाबाद (हरियाणा)
बेहतर होगा कि उन्हें छोड़ दें, क्योंकि जनता उन्हें उचित सजा दे देगी।
मुक्न्द,mukund@live.com, ूने
विवेक जी, आपने सवाल बिल्कुल सही उठाए हैं, लेकिन उन्हें सज़ा तजवीज़ करने के मामले में आप अपने ही एक पाठक से मात खा गए। सिरसा के सन्तोष जी के उपाय से मैं ... पढ़ें
विक्रम गुप्ता,vikramgupta1971@gmail.com, नई दिल्ली
मां, बाप और तान्त्रिक - तीनों को बीच चौराहे पर तब तक पत्थर मारने चाहिए, जब तक वे मर न जाएं।
विनोद जैन,arieescc@gmail.com, मुम्बई
हम से भी आगे बढ़ गया इन्सान आज का, शैतान सोचता है ये, शर्मिन्दगी के साथ...
सर्वत जमाल,sarwat.jamal@yahoo.com, लखनऊ / बस्ती
इन लोगों को जितनी अधिक हो सके उतनी अधिक और बड़ी सजा देनी चाहिए, जिन्हें अपने रिश्तों का ज्ञान नहीं है। उन्हें जीने की क्या जरूरत है।
aditiya,aditiyajaiswal31@gmail.com, कानपुर
Mujhe baap se jyada maa par gussha a raha hai.
vikram singh,vickysingh1@yahoo.com, new delhi
इन लोगों को ऐसी सजा सुनानी चाहिए कि बाकी लोग ऐसा करने से पहले हजार बार सोचे।
सद्फ,asdfasa@sdfsf.com, पुने
इसके लिए सजा नहीं कुत्ते की मौत से भी बुरी मौत देनी चाहिए। इसको कानून की सजा नहीं मिलनी नहीं चाहिए, वह भी अंधा है। इसको आम लोगों के बीच में सभी के हाथ ... पढ़ें
आम आदमी,aamadami@poblic.com, भारत
उन लोगों को सब के सामने मार देना चाहिए, ताकि आगे ऐसा कभी न हो।
सोवी राम,sobiram@whisperingpalms.com, गोअ
इसकी सजा कुछ भी मिले उस मां-बाप को... लेकिन उन लड़कियों क़ा क्या होगा। कहीं उन्हें कोई सम्मान मिलेगा। इस समाज में वो अपना जीवन कैसे व्यतीत करेंगे, उनके ... पढ़ें
स्वाती,swati_choudhary@aol.in, बॅग़लोर
आपके इस लेख से मैं बिल्कुल सहमत हूं। इस बुद्धि के लोगों को तो इन्सान कहलाने का ही हक नहीं है। अब एसे कर्मों के बाद इन्हें बुरी से बुरी सजा मिलनी चाहिए, ... पढ़ें
अमि्ता,amita@bhelpsnr.co.in, नोइडा
मेरा सिर ग्लानि ओर शर्म से झुक गया है। क्या इसके लिए भी कोई सजा है। ये तो महापाप है।
प्ररेश ,paresh@google.com, बन्गलोरे
इस खबर को पढ़कर सिर शर्म से झुक गया। कहां से कहां आ गए हम। भारतेंदु हरीशचंद्र ने कहा था, क्या थे, क्या हो गए। क्या होंगे आओ अभी मिलकर विचार करें हम ... पढ़ें
आनन्द जोशि ,abj555@gmail.com, डेल्हि
इस ख़बर ने हर व्यक्ति को हिलाकर रख दिया है। बच्चे के पहले शिक्षक उसके मां-बाप ही होते हैं। बच्चा अपनी हर छोटी-बड़ी चीज़ के लिए मां-बाप का सहारा चाहता ... पढ़ें
अभिलाषा,abhilasha.abhi.sharma@gmail.com, नोएडा
विवेक जी, यकीनन बहुत खौफनाक सच है यह समाज का। किधर जा रहा है इन्सान? पैसे की भूख ने सारे रिश्तों को खत्म कर दिया है। इस भौतिकतावादी हवा ने यों तो रिश्तों ... पढ़ें
अनिल सक्सेना,anil.saxena57@gmail.com, बरेली
Bilkul sahi likha hai aapne, Vivek. Yah sirf rape nahi hai, or iske liye sirf saat saal ki jail sufficient ho hi nahin sakti. The parents must be hanged. पढ़ें
Stuti Abhayankar,stutiabhayankar@gmail.com, Mumbai
इसके लिए सात साल की सजा तो कम ही है, लेकिन कर भी क्या सकते हैं. कानून को बदलना पॉसिबल हो तो वही करना चाहिए, क्योंकि ऐसे पेरेंट्स को जिन्दा नहीं छोड़ना ... पढ़ें
करतार सिंह सोहल,sohalsinghkartar@gmail.com, नाभा
हरगिज़ नहीं, यह सिर्फ बलात्कार नहीं है. ऐसे माँ-बाप को किसी भीड़ वाली सड़क पर खम्भे से बांधकर उन पर शिकारी कुत्ते छोड़ देने चाहिए, क्योंकि ऐसे लोगो को फांसी ... पढ़ें
संतोष सिंह,santosh2703@rocketmail.com, सिरसा, हरियाणा
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