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SME
 IST 21,  2009  00:39 नवंबर Last Updated :
विस्तृत ब्लॉग
 
विद्युतीकरण के नाम पर दलालों की दमक
राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना ने बिहार के गांवों को एक नई चमक दी है। जहां एक ओर फिलहाल कुछ मिनट ही सही हरेक दिन तसल्ली के तौर पर ग्रामीणों को बिजली के दर्शन हो जाया करते हैं, वहीं दूसरी ओर तकरीबन सभी गांवों में बिजली की चमक ने एक नए किस्म के दलालों की आंखों में दमक भर दी है।
उदीयमान बीबार में औरंगाबाद जिले में एक गांव है-चनकप। इस गांव में करीब 300 सौ घर हैं। अधिकांश घर खपरैल हैं। साथ ही, अधिकांश लोग भी गरीबी रेखा के नीचे हैं। आजादी के बाद पहली बार संभवतः गांव वालों को बिजली के दर्शन हुए हैं। वैसे, बिजली के तार सालभर पहले से ही गांव के गली-कूचों की शोभा बढ़ा रहे हैं। तारों में पहली बार बिजली दौड़ने की खबर सुन गांव के बच्चे से बूढ़े तक और पुरूष से महिला तक ट्रांसफर्मार स्टेशन की दौड़े। और लग गया लोगों का मजमां...लोग-बाग एक बारगी झूम उठे और आपस में गटर-गूं करने लग गए। लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई कि अब तो रात की अंधियारी रोशनी जाती रहेगी और दिन का सूनापन टीवी से दूर हो जाएगा। लोगों के बीच कनेक्शन लेने की प्रकिया की चर्चा भी जोर पकड़ी। किसी ने कहा कि बीपीएल के लोगों को मुफ्त और एपीएल को सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद ही कनेक्शन की योजना सरकार ने तय की है।
दो दिन बाद गांव में एक ठेकेदार (नाम-मुखिया) आया, लोग उसके पीछे भागे। मुखिया ने फरमान जारी किया किया कि बीपीएल को पांच-पांच सौ रुपये देने के बाद ही मीटर तथा कनेक्शन के चुकाने होंगे। लोगों ने एक स्वर में कहा कि बीपीएल वालों को सरकार ने मुफ्त में कनेक्शन देने का प्लान बनाया है, तो फिर पैसे किस बात के! फिर जबाबी तौर पर मुखिया के साथ ही गांव के एक दबंग दलाल ने चिल्ला-चिल्ला कर नसीहत दी कि मुफ्त में तो इस देश में जहर भी नसीब नहीं होती है। अगर आप पैसे नहीं जमा कराएंगे, तो हम इक्जयूकिटीव इंजीनियर को लिखकर भेज देंगे कि यहां लोग-बाग कनेक्शन लेने से इनकार कर गए तो आप बेमौत मारे जाएंगे! इसके बाद तो आप सभी बीपीएल वाले भी एपीएल सूची में एक्जम्पट हो जाएंगे। सौदा सदा-सदा के लिए महंगी हो जाएगी। हम तो आपकी भलाई की ही बात कर रहे हैं..... और अच्छा तो यह होता कि आप बीपीएल में ही बने रहिए। खैर, पैसा जमा हुआ और घरों में कनेक्शन लग गए। लेकिन उन्हें क्या पता था कि 'प्रथमे ग्रासे मच्छिका पाते'... एक बार कनेक्शन के साथ ही सदा-सदा के लिए नए किस्म के दलाल भी उनसे कनेक्ट हो जाएंगे! अगले दिन करीब दो घंटे बिजली रही और बिजली गुल हो गई....जंफर उड़ने की खबर लोगों की मिली। जंफर जुड़वाने के नाम पर कुछ लोगों ने सौ-सौ रुपये की तसीली की। जंफर जुड़ा, बिजली आई। लेकिन हरेक दो-चार दिन पर जंफर उड़ा दिया जाना आम हो गया। दलालों ने मुर्गा-दारू की जुगत सदा-सदा के लिए भिड़ा ली और उनकी जुगत जंफर के सहारे परवान चढ़ने लगी। फिर क्या......बिजली की चमक फिलहाल गांव वालों की चहेरे की चमक को फीकी कर दिया है। लोग वाह-वाह की जगह बाप-बाप करते दिख रहे हैं और हर तरफ लोग इस बात की ही दुहाई देते दिख रहे हैं......वाह रे, विकास। यमुनानगर, दिल्ली
राकेश कुमार,rakeshkpandey539@gmail.com
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फोकस
एक सीजे अपनी कुर्सी पर लगे राष्ट्रीय प्रतीक के नीचे ‘सत्यमेव जयते’ नहीं लिखा होने की वजह से अदालत कक्ष से बाहर चले गए।