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 IST 10,  2010  01:56 फरवरी Last Updated :
विस्तृत ब्लॉग
 
राजनीति मे न्यूनतम शिक्षा का मापदंड होना ज़रूरी है
मेरी साँसों में यही दहशत समायी रहती है, मज़हब से कौमें बँटीं, तो वतन का क्या होगा? यूँ ही खिंचती रही दीवार ग़र दरम्यान दिल के तो सोचो हश्र क्या कल घर के आँगन का होगा... जिस जगह की बुनियाद बशर की लाश पे ठहरे, वो कुछ भी हो लेकिन ख़ुदा का घर नहीं होगा। मज़हब के नाम पर कौ़में बनाने वालों सुन लो तुम, काम कोई दूसरा इससे ज़हाँ में बदतर नहीं होगा। मज़हब के नाम पर दंगे, सियासत के हुक्म पे फितन, यूँ ही चलते रहे तो सोचो, ज़रा अमन का क्या होगा? अहले -वतन शोलों के हाथों दामन न अपना दो, दामन रेशमी है देख लो, फिर दामन का क्या होगा...
कवि दीपक शर्मा,deepakshandiliya@gmail.com
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फोकस
लंदन में उस वक्त बस में यात्रा कर रहे यात्रियों में घबराहट फैल गई जब बस के मुस्लिम चालक ने अचानक बस रोक दी और नमाज अता करने लगा।