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SME
 IST 22,  2009  14:22 नवंबर Last Updated :
फीचर्ड ब्लॉग
प्रियदर्शन
पेशे से पत्रकार हैं, शौक से लेखक। प्रियदर्शन ने कई किताबों का अनुवाद भी किया है, और उनका एक कहानी संग्रह भी प्रकाशित हो चुका है। संप्रति एनडीटीवी इंडिया की टीम का हिस्सा हैं।
माना कि फिल्में सितारों के दम पर चलती हैं, लेकिन सितारे भी याद रखें, वे भी फिल्मों के दम पर ही चलते हैं...
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चिदंबरम माओवादियों के ख़िलाफ़ साझा मुहिम की तैयारी में जुटे हैं। आखिरी चेतावनी उछाल रहे हैं माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़ें...
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विज्ञान को जादू की तरह देखने की फितरत ने ऐसा माहौल बना दिया है, जैसे अब चांद पर बस्तियां बसेंगी और सैलानी जाएंगे...
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सवाल है हिन्दी क्यों बचे... क्या इसलिए कि उससे हमारा मोह है... क्या इसलिए कि वह इस देश की राष्ट्रभाषा है...
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सूडान में लड़कियों की पोशाक पर पाबंदी के कानून के खिलाफ उनकी जंग का दबाव हुक्मरान पर भी दिख रहा है...
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स्वाइन फ्लू बड़ी बीमारी नहीं है। इसका इलाज जाना−पहचाना है। फिर भी इसके आगे दुनिया के हाथ−पांव फूले हुए हैं।
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मानवीय सभ्यता के शिशुकाल में धर्म ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन धर्म की उम्र अब चुक गई है...
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आखिर ऐसा क्यों है कि एक दिन की बारिश न ये शहर झेल पाता है, न हमारा मिज़ाज...
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पाकिस्तान का लोकतंत्र मजबूत होगा तो भारत का लोकतंत्र भी कहीं ज्यादा अमन-चैन के साथ जी सकेगा...
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यह तय है कि बापू को अमेरिकी करार उस तरह नहीं लुभाता, जिस तरह आज के रहनुमाओं को लुभा रहा है...
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पिछली कुछ सरकारों के काम काज को देखें तो एक बात मैं नहीं समझ पाता कि क्यों आख़िर कांग्रेस क़ी सरकार आते ही महंगाई इतनी बढ़ जाती है कि आम आदमी क्या ख़ास ...
प्रभाष जोशी। पांच अक्षर, दो शब्द, एक शख़्सियत। हिंदी के पत्रकार, लेकिन शब्दकोष में दुविधा नाम का कोई शब्द नहीं। जिसके साथ थे, तो खुलकर और जिसके विरोधी ...
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