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SME
 IST 22,  2009  01:05 नवंबर Last Updated :
फीचर्ड ब्लॉग
धर्मेंद्र कुमार
पत्रकारिता में लगभग आठ वर्ष का अनुभव रखने वाले धर्मेंद्र कुमार ने अपने करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की थी, और उसके बाद अमर उजाला से होते हुए उनकी यात्रा नवभारतटाइम्स.कॉम तक पहुंची और अब वह एनडीटीवीखबर.कॉम से जुड़े हैं। विभिन्न विषयों पर लिखने का शौक रखने वाले धर्मेंद्र कुमार को सामाजिक मुद्दे ज़्यादा प्रभावित करते हैं।
अब देखना है कि अगले 'हिन्दी दिवस' तक हम सब अपनी भाषा को कितना समृद्ध कर पाएंगे, उसका प्रसार कर पाएंगे...
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आप कह सकते हैं कि शायद हम उस युग में हैं जिसमें किसी भी समय, कहीं भी, किसी के साथ सेक्स किया जा सकता है।
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युवाओं में वोट के लिए उत्साह है, लेकिन उनकी व्यस्तताएं भी हैं। वोट न डालने जाने के उनके तर्क भी कभी-कभी अकाट्य होते हैं।
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घटिया खेल राजनीति को इस बार जबर्दस्त धक्का लगा। मैदान से बाहर खेलने वाले 'खिलाड़ियों' को ज्यादा मौका नहीं मिला।
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नेताओं को याद रखना होगा कि जनता की आदत है सही फैसला करने की, जिसे वे 'अप्रत्याशित' बताते हैं...
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कुछ छिपे हुए खिलाड़ी भी मैदान में हैं जो अपने भाग्य से 'छींका' टूटने की उम्मीद कर रहे हैं।
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कल तक वरुण गांधी अपना अस्तित्व ढूंढ़ रहे थे। आज वह कह रहे हैं कि 'डिमांड' बढ़ गई है...
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नेताओं की नजर में जिस धर्म के लोग जितने कम पढ़े-लिखे और गरीब होंगे वो धर्म के नाम पर उतना ही एकमुश्त वोट देंगे।
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कम से कम किसी फिल्म को ऑस्कर मिलने या न मिलने से यह नहीं माना जा सकता है कि फिल्म सर्वश्रेष्ठ है।
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बिग बी के ब्लॉग पर इस बहस को फिर एक शुरुआत दी गई कि आखिर कब तक भारत की 'गरीबी' को दिखाकर बेचा जाता रहेगा।
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प्रभाष जोशी। पांच अक्षर, दो शब्द, एक शख़्सियत। हिंदी के पत्रकार, लेकिन शब्दकोष में दुविधा नाम का कोई शब्द नहीं। जिसके साथ थे, तो खुलकर और जिसके विरोधी ...
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