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SME
 IST 22,  2009  01:05 नवंबर Last Updated :
फीचर्ड ब्लॉग
राजीव मिश्रा
पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 11 वर्षों से कार्यरत राजीव मिश्रा ने देश के प्रमुख अखबारों में विभिन्न पदों पर काम किया है। इलाहाबाद में 'एनआईपी' अख़बार से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले राजीव ने 'दैनिक भास्कर' में जबलपुर और फिर नागपुर में सक्रिय योगदान दिया। सामाजिक मुद्दों पर लिखने के अलावा राजनीति, अर्थ-व्यवस्था पर भी लिखने का शौक है। 'दैनिक भास्कर', नागपुर में काम करने के बाद महाराष्ट्र के सबसे बड़े अखबार समूह लोकमत के हिन्दी संस्करण 'लोकमत समाचार' में औरंगाबाद और कोल्हापुर में संपादकीय कार्यों का निष्पादन किया। संप्रति एनडीटीवीख़बरडॉटकॉम में संपादकीय जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।
आज के अधिकारी-नेता जनहित के काम नहीं करते, जिससे उन्हें शांति मिले, जो हंसते-हंसते देश के लिए बलि चढ़ गए...
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जहां नौनिहालों का भविष्य सुधारने की बात की जाती है वहीं बुजुर्गों को भी सर्वोपरि रखने की बात की जानी चाहिए...
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अब उस घाव के दर्द को जानने और समझने की ज़रूरत है, जो 1984 से उस समुदाय के सीने में नासूर बनता जा रहा है...
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युवाओं के जोश-ओ-जुनून के आगे हमेशा सभी चुनौतियां फीकी पड़ी हैं।
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गलतियां किससे नहीं होती, गलती हुई है, तो सुधार भी होगा। मीडिया ने अपने ऊपर स्वयं बंदिशें लगाई हैं...
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किसी ने कहा है कि हथियारों की होड़ हथियार रखने से ही खत्म होगी। तो क्या लोकतंत्र में हिंसा आज की हकीकत है...
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दिल्ली के लोगों ने बता दिया है कि सरकारें भावनाओं के आवेग में नहीं,सोच समझ कर चुनीं जाती हैं...
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डॉ. मालवीय को उनकी विलक्षण प्रतिभा के लिए दो दर्जन से भी अधिक साहित्य सम्मान पुरस्कारों से विभूषित किया जा चुका है।
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राज ठाकरे की बातों को ही ध्यान से देखा जाए तो वह खुद को 'आतंकवादी' साबित करने का कोई मौका खोना नहीं चाहते...
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आज अमेरिकी जनता ने ऐतिहासिक निर्णय देकर बता दिया कि वह दुनिया की सर्वोच्च ताकत क्यों है...
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ब्लॉग्स
पिछली कुछ सरकारों के काम काज को देखें तो एक बात मैं नहीं समझ पाता कि क्यों आख़िर कांग्रेस क़ी सरकार आते ही महंगाई इतनी बढ़ जाती है कि आम आदमी क्या ख़ास ...
प्रभाष जोशी। पांच अक्षर, दो शब्द, एक शख़्सियत। हिंदी के पत्रकार, लेकिन शब्दकोष में दुविधा नाम का कोई शब्द नहीं। जिसके साथ थे, तो खुलकर और जिसके विरोधी ...
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ओबामा के काम का समर्थन करने वालों की संख्या दर में पहली बार 50 प्रतिशत से नीचे तक गिरावट आ गई है।