• Sign Up
  • |
  • Sign-In Sign Out
  • |
  • Make us your home
  • |
  • RSS
1 42 Video %>
1 52 News %>
1 57 Photo %>
1 64 Interactives %>
1 69 Leisure %>
1 74 Filmhai %>
1 80 Auto Guide %>
1 141 Dharm and Sahitya %>
1 81 Astro %>
1 179 Jobs %>
SME
 IST 21,  2009  00:39 नवंबर Last Updated :
शुक्रवार, नवंबर 20, 2009
चंद्रकांता संतति- 303वीं किस्त
टिप्पणियां:
पढ़ें ( 0)
बाबाजी ने उन लोगों की तरफ देखकर कहा, नानक को मैं ठिकाने पहुंचा आया हूं। बड़ा भारी ऐयार निकला, हम लोग उसका कुछ न बिगाड़ सके। खैर, उसे गंगा किनारे उसी जगह पहुंचा दो जहां वह बजरे से उतरा था, उसके लिए कुछ खाने की चीज भी वहां रख देना। इतना कहकर बाबाजी वहां से लौटे और महारानी के पास पहुंचे। इस समय महारानी का दरबार उस ढंग का न था और न कुछ भीड़-भाड़ ही थी।

सिंहासन और कुर्सियों का नाम-निशान न था, केवल फर्श बिछा हुआ था जिस पर महारानी रामभोली और वह औरत जिसके घोड़े पर सवार हो रामभोली नानक से जुदा हुई थी, बैठी आपस में कुछ बातें कर रही थी। बाबाजी ने पहुंचते ही कहा, मैं नहीं समझता था कि नानक इतना बड़ा धूर्त और चालाक निकलेगा। धनपति ने कहा था कि वह बहुत सीधा है, सहज ही में काम निकल जाएगा, व्यर्थ इतना आडम्बर करना पड़ा।
टिप्पणियां:
पढ़ें ( 0)
रामचरितमानस पर अधिकतर हिन्दुओं की अनन्य आस्था है और इसे हिन्दुओं का पवित्र ग्रंथ माना जाता है...
टिप्पणियां: पढ़ें (2) | लिखें
श्रीमद्भगवद् गीता को लोकप्रिय बनाने वाले विद्वानों में पंडित दीनानाथ भार्गव 'दिनेश' का अहम स्थान है...
टिप्पणियां: पढ़ें (0) | लिखें
हिन्दू धर्म व भारतीय संस्कृति का मूलाधार हैं, विभिन्न व्रत-त्योहार व धार्मिक व सांस्कृतिक उत्सव...
टिप्पणियां: पढ़ें (1) | लिखें

लौट आया चांद
असुरक्षित ट्रेड फेयर
नेटवर्क बदलो
ज्योतिष
खोजें
 
फोकस
एक सीजे अपनी कुर्सी पर लगे राष्ट्रीय प्रतीक के नीचे ‘सत्यमेव जयते’ नहीं लिखा होने की वजह से अदालत कक्ष से बाहर चले गए।