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 IST 10,  2010  01:56 फरवरी Last Updated :
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बाढ़ डायरी : कौन है कसूरवार ...
रवीश कुमार
नई दिल्ली, शनिवार, सितंबर 6, 2008
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सारी ज़िम्मेदारी नेपाल सरकार पर मढ़ी जा रही है। नेपाल ने मदद नहीं की। तटबंध की मरम्मत रोकने के लिए मज़दूरों को भड़काया। नेपाल की गलतियों के सहारे बिहार सरकार अपना बचाव कर रही है। लेकिन बिहार सरकार ने भी अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा नहीं किया है।

भीम बराज। यहीं से कोसी नदी का पानी भारत के हिस्से में छोड़ा जाता है। इसके ज़्यादातर गेट काम नहीं करते। लोहे के गेट को खोलने और बंद करने के लिए कंट्रोल पैनल कई साल से काम नहीं कर रहा। भारत नेपाल संधि के मुताबिक इसके रखरखाव की ज़िम्मेदारी बिहार सरकार की है। बिहार सरकार के जलसंसाधन मंत्रालय का बड़ा हिस्सा कोसी प्रोजेक्ट का ही है। फिर भी उपेक्षा की जाती रही।

हम भारत नेपाल सीमा से 16 किमी अंदर भारत की तरफ थे। भुटानिया में। यह बिहार के हिस्से का तटबंध है। बिल्कुल खराब हालत में। तटबंध के ऊपर की सड़क अच्छी हालत में होनी चाहिए, ताकि आपात स्थिति में बोल्डर से भरे ट्रक तेजी से लाये जा सकें। इनकी हालत बेहद खराब है। सायकिल भी चलाना मुश्किल। ज़ाहिर है बिहार ने भी अपना काम ठीक से नहीं किया है। हर जगह तटबंधों की हालत खराब है। उनकी मरम्मत नहीं की जाती। मरम्मत के नाम पर पैसा बनाया जाता है। यहां तक कि कोसी नदी का तलछट ऊपर उठ गया है। कोसी अपने साथ भारी मात्रा में बालू लेकर आती है। इसके जमा होने से पूर्वी और पश्चिमी बांध के बीच 15 किलोमीटर की ज़मीन पर बालू के पहाड़ बन गए हैं। दोनों बांध के बीच नदी के बहने का कोई रास्ता नहीं है। ज़ाहिर है वह अपने किनारे की तरफ मुड़ेगी और तटबंधों पर ज़ोर मारेगी। इन तटबंधों की खराब हालत ने कोसी की मुराद पूरी कर दी।

इन तटबंधों को देखने भर से अंदाज़ा हो जाता है कि बिहार सरकार झूठ बोल रही है। उसने इस काम को प्राथमिकता से नहीं किया। यह सवाल बार-बार परेशान करता रहा। चंद अफसर, चंद मंत्री की वजह से लाखों लोगों के घर उजड़ गए। नीतीश कुमार बार-बार कह रहे हैं कि उनका ज़ोर राहत और बचाव पर है, कारण पर नहीं। वह राहत और बचाव के नाम पर कारण से बच रहे हैं। उनका दिल जानता होगा कि कारण क्या है। लेकिन इस वक्त बात करने से घबरा रहे हैं। यह सुनामी से भयंकर त्रासदी है। सुनामी तो प्राकृतिक आपदा थी, इसलिए सारा ज़ोर राहत पर था। बिहार में बाढ़ भ्रष्टाचार के कारण आई है। इसलिए मीडिया को राहत की खबरें कम दोषियों को ढूंढने की कोशिश करनी चाहिए।

चावल और चीनी के समय से पहुंचने पर भी राहत नहीं होता है। जो कसूरवार है, वह पकड़ा जाए तो ज़्यादा राहत मिलेगी। मदद के नाम पर उन लोगों को बचाने की कोशिश बंद होनी चाहिए। आप चार साल बाद इस पर खबर नहीं कर सकते। चार साल बाद इस पर बहस करने से क्या फायदा होगा। इस पर अभी और इसी वक्त बहस होनी चाहिए कि बिहार में बाढ़ कैसे आई।
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टिप्पणियां
रवीश जी, आपने सही व्यथा लिखी है बिहार सरकार की। आज आपने कोसी पर लिखा है। यही हालत तो गंडक नदी में है, जिसमें हर साल बाढ़ आती है।
deepak mishra, deepakttek@gmail.com, delhi
आप को भी तब ख्याल आया जब लोग डूबने ओर बहने लगे। गजब कि बात यह है कि त्रासदी का सभी लोग अपने-अपने तरह से फायदा उठाना चाह्ते है। आप की रेटिंग बढ़्ती है। ... पढ़ें
shyamal kishor jha, shyamal79@gmail.com, तुमकुर कारनाटक
भले ही हम दुनिया को अपनी टेक्नालॉजी देकर इतराये...लेकिन हकीकत यही है...अभी भी..नालियों की सफाई सीखनी बाकी है...बिहार की बाड़ एक दिन का प्रतिफल नहीं है...यह ... पढ़ें
वन्दना जैन, vijaiguptamau@gmail.com, भोपाल
 
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