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क्या सुरक्षा बलों के हालात बदलेगा तेजबहादुर का वीडियो...

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क्या सुरक्षा बलों के हालात बदलेगा तेजबहादुर का वीडियो...
तेजबहादुर एक बीएसएफ जवान! जो आवाज उठा रहे हैं! और वो मांग रहे हैं! जिस पर उनका हक है. हम सबको वीडियो दिख रहा है दर्द दिख रहा है पर कर कुछ नहीं पा रहे. अपनी जान जाने का डर है उन्हें पर फिर भी हम खुलकर उनका साथ नहीं दे पा रहे हैं. वो नमक हल्दी की दाल उनके बहुत से साथी भी खाते होंगे, जली हुई रोटी का स्वाद कभी न भुलाते होंगे पर आवाज उठाने की हिम्मत केवल तेजबहादुर ही कर पाए. न जाने कितने डर कैसी समस्याएं जो उनके सामने आने वाली हैं उन सबको भूल यह वीडियो जारी किया होगा.

कितना दुख होता है यह जानकर कि जब जब कोई अपनी आवाज उठाता है तो उसे गलत साबित करने की जो होड़ लगती है वह बेहत ही अद्भुत होती है. सुनने में आ रहा है कि उनका कोर्ट मार्शल होने वाला था, जैसे तैसे बीएसएफ ने नौकरी बचा ली. जांच की तो कैंप में ऐसी कोई बात ही नहीं दिखी,सब आवाजें सुर में सुर मिलाती दिखीं. तो यह वीडियो कैसे आया? अचानक तेजबहादुर के पास ऐसा खाना कैसे पहुंचने लगा. अब कोई सामने न आएगा, वह सब साथी जो पानी जैसी दाल का मजाक बना बनाकर तेजबहादुर के अंदर कुछ करने की चाह दिलाते थे आज एक कोने में चुप खड़े आला अफसरों की हां में हां मिला हर कमी को सामने ला रहे होंगे. मैंने कहीं पढ़ा कि उनका तबादला कर प्लंबर का काम करवाया जा रहा है.

क्या हर व्यक्ति जो आवाज उठाता है उसे इस तरह के सोशल कोर्ट मार्शल की जरूरत है. आवाज उठाने का मकसद हमेशा किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं होता बल्कि सिस्टम की कमियों को दिखाने का भी होता है. इस वीडियो को बनाने से पहले न जाने कितनी कोशिशें की होंगीं उन्होंने, कितने दोस्तों से साथ देने को कहा होगा और आला अधिकारियों से बात करने की हिम्मत बांधी होगी, पर कुछ तो है न सिस्टम में जो उन्हें अपनी आवाज ऐसे उठानी पड़ी.

अपना एक अनुभव भी यहां शेयर करना चाहती हूं. एक शो की शूटिंग के दौरान जब एक कैंप में हमें जवानों का लंगर चखने का मौका मिला तो मुझे कुछ अटपटा लगा, और मेरा ध्यान यह कहकर बंटा दिया गया कि आप शहर से हैं और यह रहन-सहन समझ न पाएंगी. आज तेजबहादुर के वीडियो ने मेरे उस अनुभव को तरोताज़ा कर दिया और मुझे यह लगा शायद मुझे भी आला अफसर को हरकत में लाना चाहिए था. हम सब अपनी ही दुनिया में रहने वाले कहां दूसरों के दर्द को इतनी आसानी से कंधा देते हैं.

हाल ही मैं मेरिल स्ट्रीप की स्पीच भी सुर्खियो में छाई रही. एक ही बात बार-बार दिमाग में आ रही है उसमें से जो तेजबहादुर की कहानी का साथ देती है अगर कोई सत्ता या विशेष पद पर बैठा अपने पद का दुरुपयोग करेगा तो हम सबका नुकसान होगा.

शायद अगर बीएसएफ भी तेजबहादुर पर आरोप न लगा अपने सिस्टम को सुधार ले तो क्या कुछ हो जाए.


(मनप्रीत NDTV इंडिया में चैनल प्रोड्यूसर हैं)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति NDTV उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार NDTV के नहीं हैं, तथा NDTV उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.

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