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कोल-गेट : कानून मंत्री से लेकर पीएमओ तक ने सुझाए थे तीन बड़े बदलाव

 
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Coal-Gate: CBI says, Law Minister deleted paragraph on allocation

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नई दिल्ली: ेंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल अपने शपथ पत्र में स्वीकार किया कि कोयला ब्लॉक आवंटन पर सौंपी गई उसकी रिपोर्ट के मसौदे में कानून मंत्री के कहने पर बदलाव किया गया था। इसे लेकर विपक्ष और भड़क उठा और सरकार से इस्तीफे की मांग की जबकि कांग्रेस नीत संप्रग ने कहा कि हमें मत सिखाएं।

सीबीआई की स्वीकारोक्ति को लेकर संसद के दोनों सदनों में विपक्ष ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) पर हमला बोला और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कानून मंत्री अश्विनी कुमार के साथ-साथ रेल मंत्री पवन कुमार बंसल से इस्तीफे की मांग की। बंसल का भांजा 90 लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार हुए हैं।

नौ पृष्ठों के शपथ पत्र में सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा ने कहा है, "किसी भी संदिग्ध के खिलाफ किसी भी सबूत को नहीं हटाया गया।" और स्थिति रिपोर्ट के मुख्य आशय में कोई बदलाव नहीं किया गया।

सिन्हा ने कहा कि सीबीआई के शुरुआती निष्कर्ष कि कोयला ब्लॉकों के लिए आवेदनों की जांच करने वाली अनुवीक्षण समिति ने इसके मूल्यांकन के लिए कोई विस्तृत चिट्ठा या विवरणिका नहीं बनाई, को अश्विनी कुमार के कहने पर रिपोर्ट के मसौदे से हटा दिया गया।

सर्वोच्च न्यायालय के 30 अप्रैल के आदेश के आलोक में दाखिल शपथ पत्र में सिन्हा ने कहा है, "हमारी बेहतर जानकारी के लिए अनुवीक्षण समिति द्वारा विस्तृत चिट्ठा या विवरणिका तैयार करने के बारे में अन्य शुरुआती निष्कर्षों को माननीय केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री ने हटवाया था।"

इसमें यह भी कहा गया है कि कानून मंत्री ने आवंटन की वैधानिकता के संबंध में अनुसंधान के अभिप्राय के बारे में एक वाक्य को भी हटाया था।

शपथ पत्र में आगे कहा गया है कि कोयला मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के कहने पर मसौदे से 'निश्चित महत्वों/बिंदुओं को आवंटन की दिशा में एक पद्धति के नहीं होने के बारे में एजेंसी के प्रारंभिक निष्कर्ष' को हटाया गया। स्थिति रिपोर्ट वर्ष 2006-09 के दौरान किए गए आवंटन से संबंधित प्रारंभिक जांच 2(पीई2) पर आधारित थी।

शपथ पत्र में कहा गया है कि अंतिम स्थिति रिपोर्ट में कोयला ब्लॉक के आवंटन के लिए स्वीकृत दिशानिर्देश की अनुपलब्धता के बारे में प्रारंभिक जांच से संबंधित बदलाव किया गया।

अश्विनी कुमार और पीएमओ एवं कोयला मंत्रालय के अधिकारियों के कहने पर किए गए चार बदलावों का उल्लेख करते हुए शपथ पत्र में कहा गया है, "स्थिति रिपोर्ट के मुख्य आशय में मुलाकात के बाद कोई परिवर्तन नहीं किया गया। किसी भी संदिग्ध या आरोपी के विरुद्ध किसी सबूत को नहीं हटाया गया और न ही किसी को छोड़ा गया है।"

इधर, भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा, "इस सरकार ने देश पर शासन करने का अधिकार खो दिया है। सभी के सभी इस्तीफा दें और चुनाव का सामना करें।" उन्होंने आरोप लगाया, "बहस का मुद्दा सिर्फ एक ही रह गया है कि सरकार के अधीन किस मंत्रालय में घोटाला नहीं हुआ है। यहां तक कि प्रधानमंत्री के अधीन मंत्रालय में भी भ्रष्टाचार हुआ।"

संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा को सरकार को उपदेश नहीं देने की सलाह दी। उन्होंने सवाल किया, "क्या नितिन गडकरी ने भाजपा अध्यक्ष के रूप में इस्तीफा दिया? भाजपा हमें ऐसे मामलों में उपदेश नहीं दे। हमारी सरकार जानती है कि क्या करना चाहिए और यदि कोई अभियोग सामने आता है तो हम निश्चित रूप से कार्रवाई करेंगे।"

भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कानून मंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जिम्मेदारी लें।

कांग्रेस की प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने संवाददाताओं से कहा, "हमें 8 मई तक प्रतीक्षा करनी चाहिए और तब तक कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।"

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