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गेहूं-चावल के दाम बढ़े, मुद्रास्फीति फिर भी हुई कम

 
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Inflation declines to 7.45% in October
नई दिल्ली: ावल, गेहूं, दालों और आलू के दाम बढ़ने के बावजूद अक्टूबर माह में मुद्रास्फीति थोड़ा नरम पड़कर 7.45 प्रतिशत पर आ गई।

सितंबर में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति की दर 7.81 प्रतिशत और अक्तूबर, 11 में यह 9.87 प्रतिशत पर थी। इस बार अक्तूबर में खाद्य मुद्रास्फीति हालांकि घटकर 6.62 प्रतिशत रही, जो इससे पिछले महीने यह 7.86 फीसदी के स्तर पर थी। थोक मूल्य सूचकांक में खाद्य वस्तुओं की हिस्सेदारी 14.3 प्रतिशत की है और जून के बाद इसमें लगातार नरमी दिखी है।

वैसे, अक्तूबर माह में गेहूं की कीमतें सालभर पहले की तुलना में 19.78 प्रतिशत ऊंची थीं। सितंबर में गेहूं एक साल पहले की तुलना में 18.63 प्रतिशत महंगा था। अक्तूबर के दौरान मोटे अनाज मासिक आधार पर 14.35 फीसदी महंगे रहे जबकि सितंबर में इनके दाम 14.18 प्रतिशत बढ़े थे।

सालाना आधार पर आलू के दाम 49.13 प्रतिशत, दालों के 20 प्रतिशत और चावल के 11.40 प्रतिशत बढ़े।

हालांकि, समीक्षाधीन महीने में सब्जियों की कीमतों में सालाना आधार पर 7.45 प्रतिशत की गिरावट आई, वहीं प्याज इस दौरान 8.99 प्रतिशत सस्ता हुआ। इसी के साथ बाजरा कीमतों में 6 प्रतिशत और समुद्री मछली में 5 फीसदी की गिरावट आई।

ईंधन और बिजली वर्ग में महंगाई की दर 11.88 प्रतिशत से घटकर 11.71 प्रतिशत पर आ गई हालांकि, माह के दौरान डीजल 14.60 प्रतिशत महंगा हुआ।

विनिर्मित वस्तुओं की श्रेणी में रेशमी कपड़े, हाथ से बने कपड़ों, लोहा एवं इस्पात, कागज और कागज उत्पाद, रबड़, प्लास्टिक उत्पादों के दामों में बढ़ोतरी पिछले साल के इसी माह की तुलना में कम रही। अक्तूबर माह में विनिर्मित उत्पादों की महंगाई की दर 5.95 प्रतिशत रही, जो सितंबर में 6.26 फीसदी थी।

अगस्त माह के महंगाई की दर के आंकड़ों को संशोधित कर 7.55 से 8.01 प्रतिशत किया गया है। अक्तूबर में खुदरा मुद्रास्फीति दो अंक के करीब यानी 9.75 प्रतिशत पर पहुंच चुकी है।

इसकी वजह खाद्य वस्तुओं मसलन चीनी, दालों, सब्जियों और कपड़ों के दामों में बढ़ोतरी है। सितंबर माह में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 9.73 प्रतिशत पर था।

महंगाई में लगातार बढ़ोतरी के चलते ही भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले महीने अपनी अर्धवार्षिक मौद्रिक नीति की समीक्षा में नीतिगत दरों में कटौती नहीं की थी। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) 0.25 प्रतिशत घटाया था, जिससे बैंकों के पास ऋण देने और अन्य जरूरतों के लिए 17,500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी उपलब्ध होगी।

इस समय सीआरआर की दर 4.25 फीसदी है। बैंकों को अपनी जमा का एक हिस्सा केंद्रीय बैंक के पास रखना होता है, जिसे सीआरआर कहा जाता है। वहीं रिजर्व बैंक जिस दर पर वाणिज्यिक बैंकों को फौरी उधार देता है उसे रेपो दर कहते हैं। रेपो दर इस समय आठ फीसदी है।

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