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आरबीआई ने दरें बढ़ाई, आवास और वाहन ऋण महंगा

 
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RBI hikes repo rate by 0.25 basis points, markets surprised

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आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन

मुंबई: ारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अप्रत्याशित कदम उठाते हुए शुक्रवार को अपनी मुख्य नीतिगत दरों में 0.25 फीसदी की वृद्धि कर दी। बैंक के इस कदम से आवास, वाहन तथा अन्य प्रकार के ऋण महंगे हो जाएंगे। बैंक के कदम से शेयर बाजारों और रुपये में गिरावट देखी गई।

आरबीआई के नए गवर्नर रघुराम राजन ने पहली बार वित्त वर्ष 2013-14 की मध्य तिमाही मौद्रिक नीति समीक्षा में अपने पूर्ववर्ती डी. सुब्बाराव द्वारा लिए गए फैसलों को आंशिक रूप से वापस लिया। राजन ने चार सितंबर 2013 को आरबीआई गवर्नर का पद संभाला था।

राजन ने रेपो दर को 0.25 फीसदी बढ़ा कर 7.5 फीसदी कर दिया। रेपो दर वह दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से कर्ज लेते हैं। इसके साथ ही रिवर्स रेपो दर को भी 6.25 फीसदी से बढ़ाकर 6.5 फीसदी कर दिया गया। रिवर्स रेपो दर वह ब्याज दर है, जो आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों को अल्पावधिक जमा पर देता है।

रेपो दर और रिवर्स रेपो दर के आधार पर वाणिज्यिक बैंक उपभोक्ताओं के लिए दर तय करते हैं। इनके बढ़ने से आवास, वाहन तथा अन्य प्रकार के ऋण पर लगने वाली ब्याज दरें बढ़ जाएंगी और विकास दर पर बुरा असर पड़ेगा, जो पहले से ही कम है।

आरबीआई के फैसले का शेयर बाजारों पर नकारात्मक असर हुआ और बंबई स्टॉक एक्सचेंज के संवेदी सूचकांक सेंसेक्स में 382.93 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। रुपया भी फिसलकर डॉलर के मुकाबले 62.61 तक पहुंच गया।

नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) को चार फीसदी के स्तर पर बरकरार रखा गया है। सीआरआर धन का वह अनुपात है, जो वाणिज्यिक बैंकों को रिजर्व बैंक के पास रखना होता है।

आरबीआई ने सीमांत स्थाई सुविधा (एमएसएफ) दर को तत्काल प्रभाव से 75 आधार अंक घटाकर 10.25 फीसदी से 9.5 फीसदी कर दिया।

रिजर्व बैंक ने डॉलर के मुकाबले रुपये में जारी अवमूल्यन को रोकने और रुपये को मजबूती देने के लिए मध्य जुलाई में एमएसएफ को बढ़ाकर 10.25 फीसदी कर दिया था।

आरबीआई के बयान के मुताबिक सीआरआर का न्यूनतम दैनिक मेंटेनेंस भी जरूरत के 99 फीसदी से घटाकर 95 फीसदी कर दिया गया है, जो 21 सितंबर से लागू होगा।

गवर्नर राजन ने मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि रिजर्व बैंक ने विकास और महंगाई के विकल्पों बीच संतुलन साधने की कोशिश की है। उन्होंने कहा, "रिजर्व बैंक की प्राथमिकता हमेशा से ही महंगाई और विकास दोनों रही है।"

आरबीआई के फैसले से सहमति जताते हुए योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा, "मेरे खयाल से यह एक संतुलित बयान है। उन्होंने ऐसा काम किया है, जिससे एक ओर तरलता भी बढ़ेगी और यह भी संकेत जाएगा कि बैंक महंगाई को लेकर चिंतित है।"

भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष प्रतीप चौधरी ने कहा कि इससे उधार और जमा दरें बढ़ेंगी। स्टेट बैंक ने एक दिन पहले ही सावधि जमा योजना पर मिलने वाली ब्याज दरों में वृद्धि की थी।

कुछ ही दिनों पहले जारी सरकारी आंकड़ों में महंगाई में वृद्धि दर्ज की गई थी। अगस्त महीने के लिए जारी आंकड़े में थोक मूल्यों पर आधारित समग्र महंगाई दर 6.1 फीसदी और खाद्य महंगाई दर 18 फीसदी से अधिक रही थी।

बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व की राहत संबंधी घोषणा के बारे में उन्होंने कहा कि कुछ समय के लिए बाहर से मिली राहत का उपयोग हमें अपनी प्रणाली को बुलेट प्रूफ बनाने में करना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमें नहीं भूलना चाहिए कि राहत वापसी का टाला जाना सिर्फ टाला जाना है। इस अवधि का उपयोग हमें राष्ट्रीय आय-व्यय और विकास एजेंडे को बुलेट प्रूफ बनाने में करना चाहिए, ताकि आम आदमी और निवेशक दोनों को भरोसा मिले।"

उल्लेखनीय है कि बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने प्रति माह 85 अरब डॉलर बांड खरीदारी कार्यक्रम को जारी रखने का फैसला किया। राहत कार्यक्रम के बंद होने की आशंका से पिछले कुछ महीने से बाजार में काफी बिकवाली दर्ज की जा रही थी।

आरबीआई के कदम पर फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) की अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने कहा, "रेपो दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि हमारे लिए अप्रत्याशित है।" उन्होंने कहा कि उद्योग जगत को उम्मीद थी कि दर में या तो कटौती होगी या इसे जस का तस छोड़ दिया जाएगा, लेकिन वृद्धि से निवेश पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

भारतीय उद्योग परिसंघ के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, "रेपो दर में वृद्धि को टाला जा सकता था, क्योंकि उद्योग पहले से ही महंगी पूंजी और इसकी कम उपलब्धता से जूझ रहा है।"

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