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ट्रेड यूनियनों की दो दिन की हड़ताल आज से, बैंकिंग सेवाएं होंगी प्रभावित

 
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Trade unions to hold 2-day strike from today; transport, banking services to take major hit

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नई दिल्ली: पनी मांगों के समर्थन में 11 ट्रेड यूनियनों की बुधवार से दो दिन की राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल से कुछ राज्यों में बैंकिंग और परिवहन सेवाओं के लड़खड़ाने की आशंका है। बीमा क्षेत्र भी हड़ताल से प्रभावित हो सकता है।

सरकार ने मंगलवार को फिर से ट्रेड यूनियनों से हड़ताल वापस लेने की अपील की। उद्योग मंडल एसोचैम ने हड़ताल से 15,000 करोड़ से 20,000 करोड़ रुपये के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का नुकसान हो सकता है।

सरकार ने रिजर्व बैंक सहित सरकारी क्षेत्र के सभी बैंक कर्मचारियों से अपील की है कि वे हड़ताल में शामिल न हों। सरकार का कहना है कि बैंक कर्मियों की नौकरी की सुरक्षा और सुविधाओं को देखते हुए उनके इस हड़ताल में शामिल होने की कोई वजह नहीं बनती है।

केंद्र सरकार की आर्थिक तथा श्रम नीतियों के खिलाफ आहूत इस हड़ताल से केरल और त्रिपुरा जैसे राज्यों में आम जनजीवन प्रभावित हो सकता है, क्योंकि परिवहन और बैंकिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों के कर्मचारियों ने हड़ताल में शामिल होने की घोषणा की है।

एसोचैम के अध्यक्ष राजकुमार धूत ने कोलकाता में बयान में कहा कि हड़ताल से पश्चिम बंगाल, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, दिल्ली, हरियाणा, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों पर असर पड़ने की आशंका है।

वाम यूनियनों के अलावा इस हड़ताल में कांग्रेस समर्थित इंटक तथा भाजपा समर्थित बीएमएस ने भी शामिल होने की घोषणा की है।

यूनियनों ने अपनी दस मांगें पेश की हैं। इनमें महंगाई पर नियंत्रण के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत, श्रम कानूनों को कड़ाई से लागू करना, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा जाल, सार्वजनिक उपक्रमों का विनिवेश बंद करना और न्यूनतम मजदूरी 10,000 रुपये मासिक करना शामिल हैं।

केरल में कांग्रेस की अगुवाई वाली यूडीएफ सरकार ने कोई काम नहीं कोई वेतन नहीं की घोषणा की है। वाम समर्थित सेवा और शिक्षक यूनियनें भी हड़ताल में शामिल हो रही हैं।

पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार ने भी सभी कर्मचारियों का सकरुलर जारी कर कार्यालय में उपस्थित होने को कहा है, अन्यथा उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।

माकपा-सीटू की श्रम इकाई ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस धमकी को गैर-कानूनी करार दिया है। उसने कहा है कि यदि राज्य सरकार ने जबरन सरकारी कर्मचारियों को हड़ताल में शामिल होने से रोका तो राज्य के मुख्य सचिव संजय मित्रा के खिलाफ मामला दायर किया जाएगा।

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