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वोडाफोन ने भारत को अंतरराष्ट्रीय पंचाट में घसीटने की चेतावनी दी

 
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Vodafone issues notice to India
नई दिल्ली: ूरसंचार कंपनी वोडाफोन ने पिछली तारीख से आयकर कानून में संशोधन के मामले में भारत को नीदरलैंड के बीच द्विपक्षीय निवेश संधि (बिट) के तहत अंतरराष्ट्रीय पंचाट में घसीटने का नोटिस दिया है।

नीदरलैंड में पंजीकृत सहायक वोडाफोन की सहायक इकाई वोडाफोन इंटरनेशनल होल्डिंग्स बीवी (वीआईएचबीवी) ने भारत सरकार को वित्त विधेयक2012 में आयकर कानून में पिछली तारीख से प्रभावी संशोधन के प्रस्ताव पर मंगलवार को कानूनी नोटिस भेजा। कंपनी ने दावा किया है कि यह प्रस्ताव भारत में वोडाफोन और अन्य अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के निवेश को मिले कानूनी संरक्षण का उल्लंघन है।

लंदन स्टाक एक्सचेंज को भेजी सूचना के अनुसार वोडाफोन ने भारत सरकार से कहा है कि वह इस प्रस्ताव को रोके या फिर इसके प्रावधानों में समुचित बदालव करे। वोडाफोन ने कहा है कि वह सरकार के साथ इस मसले का उचित समाधान चाहती है।

कंपनी ने कहा, ‘‘यदि भारत सरकार ऐसा करने की इच्छुक नहीं है, तो वोडाफोन अपने शेयरधारकों के हितों के संरक्षण के लिए उचित कदम उठाएगी। इसमें बिट के तहत सरकार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय पंचाट में मामला दायर करना भी शामिल है।’’ सरकार ने बजट में आयकर कानून में पिछली तारीख से संशोधन का प्रस्ताव किया है। इससे वोडाफोन द्वारा हचिसन की खरीद सौदे को भी कर के दायरे में लाया जा सकेगा। हालांकि, उच्चतम न्यायालय 11,000 करोड़ रुपये कर मामले में ब्रिटेन की दूरसंचार कंपनी के पक्ष में फैसला दे चुका है।

सरकार का इरादा आयकर कानून में पिछली तारीख से संशोधन का है जिससे उसके पास वित्त विधेयक 2012 के अंतर्गत 1962 तक के पुराने मामले खोलने का अधिकार आ जाएगा। वोडाफोन के बयान में कहा गया है कि यह विवाद पिछली तारीख से कर कानून में संशोधन का है। यदि इसे लागू किया जाता है, तो इसका भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों पर व्यापक और गंभीर असर होगा। साथ ही इसका वोडाफोन पर सीधा और नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

उसने कहा है कि प्रस्तावित कानून से उच्चतम न्यायालय को जनवरी, 2012 का आदेश भी समाप्त हो जाएगा। उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि वोडाफोन द्वारा 2007 में हचिसन खरीद सौदे में उसपर किसी तरह की कर देनदारी नहीं बनती।

वोडाफोन ने कहा कि बिट के तहत भारत सरकार को अन्य बातों के अलावा निवेशकों के साथ उचित और समानता का व्यवहार करना होगा।

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