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खेल बनकर रह गई 'टेबल नंबर 21'

 
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Film Review of table no 21

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मुंबई: भिनेता राजीव खंडेलवाल, परेश रावल और अभिनेत्री टीना देसाई की फिल्म ’टेबल नंबर 21’ का प्रोमो देखकर लगा था कि फिल्म की कहानी सिर्फ किसी एक गेम के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका नाम ’टेबल नंबर 21’ हो सकता है, लेकिन फिल्म सिर्फ एक गेम के बारे में नहीं, बल्कि इसके अंत में एक संदेश भी दिया गया है।

यह सच है कि फिल्म में मनोरंजन भी होता है और संदेश भी दिए जाते हैं, लेकिन कहानी में इनका सही मिश्रण जरूरी है, जो 'टेबल नंबर 21’ में नहीं दिखता।

राजीव खंडेलवाल और टीना को परेश एक ऐसा गेम खेलने के लिए बोलते हैं, जहां 21 करोड़ जीतने की उम्मीद तो है, लेकिन गेम में झूठ बोलना मना है। हर सवाल के साथ है एक टास्क और खेल को बीच में छोड़ा भी नहीं जा सकता, जिसकी वजह से राजीव और टीना को फिल्म में कई मुसीबतें झेलनी पड़ती हैं।

फिल्म के लिए शायद राजीव को इसलिए चुना गया, क्योंकि वह छोटे पर्दे पर कइयों को 'सच का सामना' करवा चुके हैं। वैसे, फिल्म इस रियलिटी शो से प्रेरित भी लगती है। फिल्म में अच्छा संदेश देने की कोशिश तो की गई है, लेकिन अफसोस कि फिल्म बस एक खेल बनकर ही रह जाती है।

कहानी लुभा नहीं पाई। कहानी के उतार-चढ़ाव के साथ सफर करना मुश्किल है। एक्टर्स का काम भी अपना जादू नहीं चला पाया। हां, फिल्म में संदेश देने की कोशिश अच्छी है, जो आपको पूरी फिल्म देखने के बाद ही पता चलेगा, हालांकि मैं आपको फिल्म देखने या न देखने की सलाह नहीं दूंगा। इस फिल्म की रेटिंग है डेढ़ स्टार।

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