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अरविंद केजरीवाल आज शाम खत्म करेंगे अपना अनशन

 
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Arvind Kejriwal to will end hunger strike today evening

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नई दिल्ली: म आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल शनिवार शाम पांच बजे अपना उपवास खत्म करेंगे। केजरीवाल ने यह आरोप लगाते हुए अनशन शुरू किया था कि दिल्ली में लोगों से बिजली और पानी के बिल के नाम पर मनमाना पैसा लिया जा रहा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार और बिजली कंपनियों में मिली भगत है। आज उनके अनशन का 14वां दिन है। उन्होंने कहा है कि आंदोलन के पहले चरण में करीब 10.52 लाख लोगों ने बिजली बिल नहीं देने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि अगर इसमें से 40 फीसदी लोग भी बिजली बिल नहीं देने की हिम्मत दिखाएंगे, तो यह बड़ी बात होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि शनिवार से आंदोलन का दूसरा चरण शुरू होगा, जिसमें लोगों के काटे गए बिजली के कनेक्शन जोड़े जाएंगे। केजरीवाल ने आखिर में कहा कि वह चाहते थे कि अन्ना हजारे उनका उपवास तुड़वाएं, लेकिन वह व्यस्त हैं, इसलिए नहीं आ पा रहे हैं।

'आम आदमी पार्टी' के दो नेता मनीष सिसौदिया और कुमार विश्वास ने गुरुवार को हरियाणा में हजारे से मुलाकात की थी और केजरीवाल का अनशन तुड़वाने के लिए उन्हें दिल्ली आने का न्योता दिया था। हजारे ने दिल्ली आने में अक्षमता दिखाई, लेकिन केजरीवाल को पत्र लिखकर उनसे अनशन खत्म करने की अपील की।

23 मार्च से शुरू अनशन को खत्म करने की घोषणा करते हुए केजरीवाल ने अपने समर्थकों से कहा कि 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' के दूसरे चरण की शुरुआत में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता प्रत्येक वार्ड का दौरा करेंगे और बिल का भुगतान नहीं करने पर जिन लोगों के बिजली और पानी के कनेक्शन काट दिए गए थे, उन्हें फिर से जोड़ेंगे। केजरीवाल ने कहा, उसके बाद कल शाम कार्यकर्ता यहां इकट्ठा होंगे और मैं अनशन तोड़ूंगा। मैं केवल अनशन खत्म करूंगा, लेकिन आंदोलन, प्रदर्शन जारी रहेगा।

उन्होंने कहा, मैं अन्ना हजारे से एक ग्लास फल का रस लेकर अनशन तोड़ना चाहता था, लेकिन दौरे के कारण कल वह यहां नहीं आ सकते। भले ही कल वह यहां नहीं होंगे, लेकिन मुझे उनका आशीर्वाद प्राप्त है। हजारे ने दिल्ली के सुंदर नगरी में 29 मार्च को केजरीवाल से मुलाकात की थी और उनसे अनशन खत्म करने की अपील की थी। बाद में केजरीवाल को सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय और मेधा पाटकर का समर्थन भी मिला, जिनका उनके साथ लोकपाल विधेयक और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के राजनीतिक स्वरूप को लेकर मतभेद था।

(कुछ अंश भाषा से भी)

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