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दिल्ली गैंगरेप पीड़िता पर टिप्पणी कर विवादों में फंसे आसाराम

 
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Asaram Bapu stuns with his remarks on medical student's rape

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नई दिल्ली: ध्यात्मिक गुरु आसाराम बापू दिल्ली गैंगरेप पीड़िता के बारे में टिप्पणी करने के कारण सोमवार को कांग्रेस और भाजपा के निशाने पर आ गए। आसाराम ने कथित रूप से टिप्पणी की कि पीड़िता को आरोपियों को 'भाई' कहकर संबोधित करना चाहिए था और त्रासदी को टालने के लिए सरस्वती मंत्र का उच्चारण करना चाहिए था।

आसाराम ने कहा, "पीड़िता भी दुष्कर्म के आरोपियों के जितना ही दोषी है। उसे आरोपियों के सामने गिड़गिड़ाना चाहिए था।" उन्होंने आगे कहा कि केवल एक हाथ से ताली नहीं बज सकती।

राजस्थान के टोंक कस्बे में अपने भक्तों के बीच प्रवचन देते हुए आसाराम ने कहा, "नशे में धुत पांच या छह लोग ही अकेले दोषी नहीं हैं। लड़की भी जवाबदेह है।"

एक निजी टीवी चैनल ने आसाराम बापू के हवाले से कहा है, "पीड़िता को चाहिए था कि आरोपियों को रोकने के लिए वह उन्हें भाई कह कर संबोधित करती और उनके सामने गिड़गिड़ाती। इससे उसका सम्मान और जीवन बच सकता था। क्या एक हाथ से ताली बज सकती है? मैं ऐसा नहीं मानता।" उन्होंने आगे कहा है, "क्या उसने (पीड़िता ने) सरस्वती मंत्र का उच्चारण किया, पुरुष मित्र के साथ सिनेमा देखने के बाद उसे किसी बस में सवार नहीं होना चाहिए था।"

आसाराम बापू ने कहा कि वे दुष्कर्म रोकने के लिए कड़े कानून बनाए जाने के विरुद्ध हैं। उन्होंने कहा, "कानून का दुरुपयोग हो सकता है। देश में दहेज उत्पीड़न कानून के दुरुपयोग के सैंकड़ों उदाहरण मौजूद हैं। यदि दुष्कर्म निरोधी कानून का दुरुपयोग हुआ तो पुरुष इसके शिकार होंगे।" उन्होंने कहा कि दिल्ली दुष्कर्म पीड़िता के परिवार को उन्होंने पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा है कि आपने अपनी बेटी को खोया है। आप मुझे अपना बेटा समझिए।

आसाराम की इस टिप्पणी की कांग्रेस और भाजपा, दोनों ने तीव्र भर्त्सना की। कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा, "ऐसे बयान की जितनी संभव हो सके निंदा की जानी चाहिए।"

कांग्रेस के ही राशिद अल्वी ने कहा, "राजनीतिक नेता हों या धर्मगुरु दोनों को मुंह खोलने से पहले गंभीरता से विचार कर लेना चाहिए।"

भाजपा नेता रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि टिप्पणी अत्यंत खेदजनक और दुखद है। हम उम्मीद करते हैं कि आसाराम बापूजी आत्मविश्लेषण करेंगे और बयान वापस लेंगे।

प्रसाद ने कहा, "मैं आश्वस्त हूं कि आसाराम हिंदू चिंतन से भलीभांति वाकिफ हैं, जिसके तहत महिलाओं को आदर सम्मान का स्थान हासिल है। इसी तरह हमारे संविधान में भी महिलाओं को बगैर किसी भेदभाव के बराबरी की हैसियत दी गई है। इस मामले में उनके लिए टिप्पणी करना जरूरी नहीं था, जिसने पूरे देश की चेतना को हिला कर रख दिया है। माफ कीजिए इसे कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता।"

ज्ञात हो कि 23 साल की युवती के साथ चलती बस में 16 दिसंबर की रात छह लोगों ने क्रूरतापूर्वक दुष्कर्म किया था और विरोध करने पर उसे व उसके पुरुष मित्र को घोर शारीरिक यातनाएं दी थी। दोनों को घायल हालत में सड़क किनारे फेंक दिया। पीड़िता को इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहां 29 दिसंबर को उसकी मौत हो गई।

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