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केंद्र ने दोहराई आतंकविरोधी प्रतिबद्धता, भाजपा ने उठाया सवाल

 
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Hyderabad Blast: BJP questions Central decision making capacity
नई दिल्ली: ेंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि वह आतंकवाद से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन सरकार के जवाब से असंतुष्ट मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने खुफिया सूचना रहने के बावजूद हैदराबाद में आतंकवादी हमला होने पर केंद्र सरकार की भर्त्सना की। हमले में मरने वालों की संख्या शुक्रवार को 16 हो गई जबकि 117 घायलों का इलाज चल रहा है।

केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने शुक्रवार को लोकसभा में दिए गए अपने लिखित बयान में कहा, "सरकार ऐसे कायराना आतंकवादी हमलों से मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध है और विस्फोट के साजिशकर्ताओं और सूत्रधारों को पकड़ने व उन्हें कानून के मुताबिक सजा दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाएगी।" ठीक यही बयान उन्होंने राज्यसभा में भी दिया।

संसद के दोनों सदनों में भाजपा की तीखी आलोचना का सामना करते हुए शिंदे ने आतंकवाद विरोधी राष्ट्रीय केंद्र (एनसीटीसी) के रूप में सर्वोच्च संस्था बनाने के प्रस्ताव की वकालत की। इस प्रस्ताव पर कुछ राज्यों ने उनके अधिकार क्षेत्र में दखल कहकर विरोध जताया था जिसके बाद से यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में है।

राज्यसभा में शिंदे ने कहा, "विस्फोट ने एनसीटीसी की दरकार को साबित किया है। जब हम इसे लाना चाहते हैं, हर कोई कहता है यह राज्यों के खिलाफ है। हम एनसीटीसी लाने के लिए तैयार हैं, हम इस पर चर्चा कर सकते हैं।" उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड आतंकवाद के खतरों से निपटने में पहले से ही मदद कर रहा है।

शिंदे ने देश में आतंकवाद से निपटने में सभी पार्टियों से मदद करने की गुजारिश की।

भाजपा ने केंद्रीय गृहमंत्री से सक्रियता दिखाने के लिए कहते हुए कहा कि इस खतरे से निपटने में सरकार और विपक्ष की एकजुटता जरूरी है।

विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने लोकसभा में शिंदे के बयान में इस उल्लेख पर कि हमले की खुफिया सूचना थी और इसके बारे में आंध्र प्रदेश को सचेत किया गया था, पर कहा, "आतंकवाद से लड़ाई में आप प्रतिबद्धता दिखाएं। क्या केंद्र सरकार की भूमिका सिर्फ राज्यों को सचेत करने तक है या फिर आतंकवादी गतिविधि रोकने की भी है?" उन्होंने कहा, "यदि आतंकवादी हमले की खुफिया सूचना उपलब्ध थी तो सरकार की जवाबदेही और बढ़ जाती है.. केंद्र और राज्य सरकारें कर क्या रही थीं।"

भाजपा नेता ने कहा कि केंद्र सरकार ने बेंगलुरू और मुंबई को भी आतंकवादी हमले के प्रति सचेत किया था। उन्होंने यह जानना चाहा कि इन दोनों शहरों को सुरक्षित बनाने के लिए क्या कदम उठाए गए। उन्होंने यह जानना चाहा कि हैदराबाद विस्फोट अफजल गुरु की फांसी से जुड़ा तो नहीं है और सवाल किया कि सरकार ने संसद पर हमले के दोषी को फंदे पर लटकाने में नौ वर्ष का समय क्यों लगाया।

विपक्ष की नेता ने यह भी जानना चाहा कि क्या ये विस्फोट हैदराबाद में मजलिस-ए-एत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) नेताओं के हाल के भड़काऊ भाषण से संबद्ध तो नहीं हैं?

राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा, "बजट सत्र के पहले दिन का दुर्भाग्य यह है कि इसे यह याद दिलाने के लिए चुना गया कि भारत आतंकी रडार पर सबसे शीर्ष पर है।" उन्होंने कहा, "सरकार यह सुनिश्चित करे कि हैदराबाद विस्फोट भारत में इस प्रकार की अंतिम घटना है।"

विपक्ष के चौतरफा हमलों से घिरे शिंदे ने संसद को बताया कि उन्होंने आज सवेरे हैदराबाद का दौरा किया और आंध्र प्रदेश के राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन एवं मुख्यमंत्री एन. किरण कुमार रेड्डी के अलावा पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर स्थिति की समीक्षा की।

वे अस्पतालों में भर्ती घायलों का हालचाल लेने भी गए थे। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह सविच आर. के. सिंह और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के महानिदेशक एस.सी. सिन्हा ने हैदराबाद का दौरा किया और राज्यपाल, मुख्यमंत्री और राज्य के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर समीक्षा की। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश पुलिस के साथ मिलकर एनआईए इस हमले की जांच करेगी। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि दोनों धमाकों में आईईडी का इस्तेमाल किया गया था जो साइकिल पर रखे गए थे।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। आंध्र प्रदेश सरकार ने मृतकों के परिजनों को छह लाख रुपये तथा घायलों को 50,000 रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक देने की घोषणा की है।

शिंदे ने कहा, "स्थिति अब नियंत्रण में है।"

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