आप यहां हैं : होम » देश से »

शिक्षक भर्ती घोटाला : चौटाला और उनके बेटे को 10-10 साल की सजा

 
email
email
Om Prakash Chautala, son Ajay Chautala sentenced to 10 years in jail

PLAYClick to Expand & Play

नई दिल्ली: रियाणा में 12 साल पूर्व हुए शिक्षक भर्ती घोटाला मामले पर दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को पड़ोसी राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री व इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के अध्यक्ष ओमप्रकाश चौटाला व उनके बेटे अजय चौटाला को 10 साल जेल की सजा सुनाई।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार ने चौटाला, उनके बेटे व सात अन्य को 10 साल जबकि एक दोषी को पांच साल तथा अन्य 45 को चार-चार साल कैद की सजा सुनाई।

जूनियर बेसिक ट्रेनिंग (जेबीटी) शिक्षक भर्ती घोटाले के आरोपी 62 लोगों में से छह की मौत हो चुकी है और आरोप तय किए जाने के दौरान एक को बर्खास्त किया जा चुका है।  

चौटाला व अजय के अलावा प्राथमिक शिक्षा के तत्कालीन निदेशक संजीव कुमार, चौटाला के साथ विशेष सेवा पर तैनात पूर्व अधिकारी विद्याधर व चौटाला के राजनीतिक सलाहकार शेर सिंह बड़शामी को भी 10 साल जेल की सजा सुनाई गई।

तत्कालीन जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी मदन लाल कालरा, एक राजकीय बालिका विद्यालय की तत्कालीन प्राचार्य दुर्गा दत्त प्रधान, एक राजकीय विद्यालय की  तत्कालीन प्राचार्य बानी सैनी तथा तत्कालीन सहायक प्राथमिक शिक्षा निदेशक दया सैनी को भी 10 साल जेल की सजा सुनाई गई।   

सजा सुनाए जाने के कुछ ही समय बाद चौटाला समर्थकों ने अदालत परिसर में पथराव किया।

न्यायाधीश ने इस दलील को मानने से इनकार कर दिया कि आरोपी के खराब स्वास्थ्य को देखते हुए सजा सुनाते समय उदारता बरती जाए। उन्होंने कहा, "दुष्टतापूर्ण अपराध और राजनेता व नौकरशाह के बीच सांठगांठ से बहुत सारे अभ्यर्थियों के संवैधानिक अधिकार के हनन वाले इस मामले पर विचार करने के बाद मुझे दोषियों को सजा सुनाने में उदारता बरतने का कोई कारण नजर नहीं आता। दोषियों ने शातिराना अंदाज में पूरी साजिश रची या ऐसा कृत्य करने वालों को सहयोग दिया।"

अदालत ने इस मामले को उजागर करने वाले तत्कालीन अधिकारी संजीव कुमार के प्रति नरमी बरतने से भी इनकार कर दिया। कुमार बाद में स्वयं इस घोटाले में संलिप्त पाए गए। अपराध की समानता के आधार पर अन्य दोषियों की तरह उन्हें भी 10 साल कैद की सजा सुनाई गई। अदालत ने हालांकि यह रेखांकित किया कि सुनवाई के दौरान इन दोषियों ने जो कहा, सच कहा।

चौटाला व उनके बेटे अजय दोनों ही हरियाणा से विधायक हैं। दोनों को राज्य में 3,000 से ज्यादा जेबीटी शिक्षकों की अवैध भर्ती के मामले में 16 जनवरी को हिरासत में लिया गया था। अदालत ने प्रथम दृष्टया चौटाला तथा अन्य 53 के खिलाफ सबूत पाया था।

सीबीआई ने छह जून, 2008 को चौटाला तथा अन्य के खिलाफ औपचारिक तौर पर आरोप तय किया था। यह मामला वर्ष 1999 और 2000 के बीच का है, जब चौटाला हरियाणा के मुख्यमंत्री थे।

उस दौरान राज्य में 3,000 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की जानी थी। आरोप है कि चौटाला ने वरिष्ठ अधिकारी संजीव कुमार पर चयनित अभ्यर्थियों की सूची बदलने और झूठे तथ्यों के आधार पर उसमें कुछ चहेते अभ्यर्थियों के नाम जोड़ने के लिए दबाव बनाया था।

बाद में संजीव कुमार सर्वोच्च न्यायालय गए और उन्होंने मूल रूप से चयनित अभ्यर्थियों की सूची अदालत के समक्ष पेश की। अधिकारी ने यह भी कहा कि शिक्षकों की भर्ती में पैसे लेकर नाम बदले गए।

सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई को इस मामले, खासकर रिश्वत लेने के मामले की जांच करने का निर्देश दिया था। जांच एजेंसी ने आरोप पत्र दाखिल कर कहा था कि शिक्षकों की भर्ती में फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया गया।

रोहिणी अदालत ने चौटाला को दोषी करार दिया। उनका हालांकि दावा है कि उन्हें राजनीतिक षडयंत्र के तहत फंसाया गया है।      

चौटाला, उनके बेटे व अन्य को भारतीय दंड संहिता व भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दोषी पाया गया। अदालत ने उनके खिलाफ आईपीसी व पीसीए की 120-बी (आपराधिक षडयंत्र), 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी) और 471 (वास्तविक की जगह जाली दस्तावेज का इस्तेमाल) धाराओं के तहत आरोप तय किए थे।

उल्लेखनीय है कि चौटाला पूर्व उप प्रधानमंत्री देवी लाल के बेटे हैं और हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता है। वह 1999 से 2005 तक मुख्यमंत्री रहे। उनके बड़े बेटे अभय सिंह चौटाला भी विधायक हैं। अभय ने कहा है कि निचली अदालत के इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...



Advertisement

 

Advertisement