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पीएम ने किया सुरक्षा का वादा, पीड़िता की हालत बिगड़ी

 
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नई दिल्ली: ाष्ट्रीय राजधानी में कई दिनों से चल रहे आंदोलन को देख प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आखिरकार सोमवार को अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता युवती की जिंदगी के लिए प्रार्थना करने की देश से अपील की और महिलाओं के खिलाफ 'राक्षसी अपराध' रोकने का वादा किया।

सोमवार को पीड़ित युवती की हालत बिगड़ गई। सफदर जंग अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार, उसके शरीर में रक्त का अंत:स्राव होने लगा है। उसे फिर वेंटिलेटर पर रखा गया है। उसके अन्य महत्वपूर्ण अंग हालांकि काम कर रहे हैं।

एक दिन पूर्व इंडिया गेट पर प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों का खून बहने के दूसरे दिन राजधानी में शांति लौटी। पीड़ित युवती को न्याय दिलाने के लिए सैकड़ों छात्राएं हालांकि जंतर मंतर पर प्रदर्शन करती रहीं।

इंडिया गेट पर प्रदर्शनकारियों ने जिस पुलिस कांस्टेबल की बुरी तरह पिटाई कर दी थी उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

सुरक्षा बलों ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन और इंडिया गेट की ओर जाने वाली सड़कों को बैरिकेडों से जाम कर दिया जिस कारण अन्य सड़कों पर दिनभर यातायात जाम की समस्या बनी रही। दिल्ली मेट्रो ने प्रदर्शनकारियों को अति सुरक्षा वाले क्षेत्र में प्रवेश करने से रोकने के लिए नौ प्रमुख स्टेशनों को बंद रखा जिससे दैनिक यात्रियों को भारी असुविधा हुई।     

इस बीच, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक से कुछ ही देर पहले टेलीविजन पर संक्षिप्त सम्बोधन दिया जिसमें उन्होंने लोगों से शांति कायम रखने की अपनी अपील दोहराई और देशवासियों को आश्वस्त किया कि सरकार 23 साल की युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पुलिस के रवैये की जांच अविलम्ब कराएगी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों में कई लोगों के घायल होने पर दुख जताया और कहा कि कहा कि देश में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

जनाक्रोश के प्रदर्शन को 'उचित और न्यासंगत गुस्सा और पीड़ा' करार देते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्होंने तीन बेटियों के पिता होने के नाते सामूहिक दुष्कर्म के दर्द को शिद्दत से महसूस किया है। उन्होंने कहा कि अपराध पर गुस्सा करना 'न्यायसंगत' है लेकिन हिंसा से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा।    

प्रधानमंत्री का बयान आने से ठीक पहले पीड़ित युवती के पिता ने समाचार चैनलों पर शांति की अपील की और लोगों से कहा कि वे उनकी बेटी के लिए प्रार्थना करें जो एक अस्पताल में गंभीर हालत में है। पहचान छिपाने के लिए टेलीविजन पर उनका चेहरा हालांकि धुंधला कर दिया गया था।

मनमोहन सिह ने कहा, "मैंने खुद तीन बेटियों का पिता होने के नाते इस घटना को शिद्दत से महसूस किया है, जैसा कि आप में से प्रत्येक व्यक्ति ने महसूस किया है। मेरी पत्नी, मेरा परिवार और मैं, सभी क्रूरतापूर्ण अपराध से पीड़ित युवती के लिए की जा रही चिंता में शामिल हैं। हम उसकी हालत पर लगातार नजर रखे हुए हैं। आइए, हम सभी इस महत्वपूर्ण समय में उसके लिए और उसके मित्र के लिए प्रार्थना करें।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "हम न केवल इस भयानक अपराध के बाबत अविलम्ब जांच करेंगे, बल्कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से सम्बंधित सभी पहलुओं पर विचार करेंगे और जो लोग ऐसे राक्षसी अपराधों को अंजाम दिया है उन्हें दंडित करेंगे। हमारी सरकार आपको इस दिशा में उठाए जा रहे सभी कदमों और प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी देगी।"

इससे पहले, रविवार की रात प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से ट्विटर पर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई थी।

केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा, "मैं दुष्कर्मियों पर कार्रवाई करूंगा। किसी को छोड़ूंगा नहीं।"   

दिल्ली में लगातार हो रहे आंदोलन को देखते हुए छुट्टियां मनाने अमेरिका गए दिल्ली के उपराज्यपाल तेजेंद्र खन्ना अपने प्रवास में कटौती कर राष्ट्रीय राजधानी लौट आए। सोमवार को वह आंदोलनकारी महिला संगठनों से मिले।

विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) रंजन मुखर्जी ने कहा, "खन्ना स्वेच्छा से पिछली रात शहर में लौट आए। उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से बुलाया नहीं गया है। यहां पहुंचते ही वह महिला संगठनों से मिले और महिलाओं की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाने का भरोसा दिया।"

सुरक्षा व्यवस्था में चूक के लिए हो रही आलोचना के बीच सोमवार को दिल्ली पुलिस के दो सहायक आयुक्तों को पर्दा लगी खिड़कियों वाली बसों का परिचालन नहीं रुकवाने के लिए फटकार लगाई गई और उन्हें निलम्बित कर दिया गया।

उपराज्यपाल खन्ना ने बताया कि दिल्ली यातायात पुलिस के मोहन सिंह डबास और पुलिस कंट्रोल रूम के राम सिंह को निलम्बित कर दिया गया। तीन पुलिसकर्मी पहले ही निलम्बित किए जा चुके हैं।   

उधर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों का  प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कर उनसे संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग करेगा, ताकि दुष्कर्म की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून बनाया जा सके।

भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने संवादाताओं से कहा, "हम उनसे अनुरोध करेंगे कि वह सरकार को संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए कहें।"

उल्लेखनीय है कि दुष्कर्म की बढ़ती घटनाओं के कारण दिल्ली को 'दुष्कर्म की राजधानी' कहा जाने लगा है। पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में इस वर्ष 600 से अधिक दुष्कर्म के मामले सामने आए हैं। राष्ट्रीय राजधानी पर लगे इस दाग को धोना अब केंद्र और दिल्ली सरकार के लिए चुनौती बन गई है।

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