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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, किसके कहने पर क्या-क्या हुए बदलाव?

 
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Supreme court ask CBI on report over Coal scam: What changes were made

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नई दिल्ली: ोयला घोटाला पर सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट पर उच्चतम न्यायालय ने कहा कि सरकार के साथ सूचना साझा किए जाने ने पूरी प्रक्रिया को गड़बड़ा दिया है।

सीबीआई ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि कोयला मंत्रालय इस घोटाले में सभी जरूरी सूचनाएं मुहैया नहीं करा रहा है। न्यायालय ने सीबीआई निदेशक को आदेश दिया कि वह इस बात का हलफनामा दें कि स्थिति रिपोर्ट में क्या बदलाव हुए थे और यह किसके कहने पर किए गए थे।

उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई से पूछा कि क्या कानून मंत्री और पीएमओ तथा कोयला मंत्रालय के अधिकारी कोयला घोटाले में एजेंसी की जांच रिपोर्ट मांगने के लिए अधिकृत हैं।

उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई से पूछा कि सरकार के साथ जांच रिपोर्ट को साझा करने में अदालत को अंधेरे में क्यों रखा गया। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि हमारा पहला काम सीबीआई को राजनीतिक दखल से मुक्त कराना होगा।
    
न्यायालय ने कहा कि सीबीआई की स्वतंत्र स्थिति बहाल होनी चाहिए। न्यायालय ने कहा कि सीबीआई द्वारा पर्दा डालना सामान्य बात नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई से कहा कि आपको अपने राजनीतिक मालिकों से निर्देश लेने की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने 6 मई तक नया हलफनामा देना का आदेश दिया है। अब इस मामले में 8 मई को फिर सुनवाई होगी।

इस मामले में आज सरकार की ओर से अटॉर्जी जनरल जिरह नहीं कर रहे हैं। अब इस मामले में सॉलिसिटर जनरल सरकार का पक्ष रख रहे हैं। इस बदलाव के पीछे यह कारण बताए जा रहे हैं कि एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने चिट्ठी लिखकर अटॉर्नी जनरल पर मामले में दखल देने का आरोप लगाया है।

कोर्ट कोयला घोटाले में सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट का संज्ञान ले रही है। इसके अलावा कोर्ट सीबीआई डायरेक्टर के उस हलफनामे की जांच कर रही है, जिसमें उन्होंने माना है कि 8 मार्च को सौंपी गई रिपोर्ट कानून मंत्री के कहने पर उनसे साझा की गई। इसके अलावा पीएमओ के संयुक्त सचिव और कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिव के साथ भी रिपोर्ट साझा की गई।

विपक्ष सरकार पर आरोप लगा रहा है कि उसने कोयला घोटाले की रिपोर्ट में बदलाव कराया है। अगर सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि मूल रिपोर्ट में बदलाव या छेड़छाड़ की गई है तो सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

कोयला आवंटन पर हलफनामे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले बैठकों का लंबा दौर चला है। बताया जा रहा है कि दो दिन पहले यानी 28 अप्रैल को प्रधानमंत्री ने एटॉर्नी जनरल से मुलाकात की है।

सूत्रों के मुताबिक इस मुलाकात में एफिडेविट पर चर्चा हुई। सरकार यह बात रखना चाहती है कि कानून मंत्रालय और पीएमओ के अफ़सरों ने कुछ भी गलत नहीं किया। ख़ास कर कानून मंत्री को लेकर सरकार सख्त रुख बनाए रखना चाहती है। सरकार यह भी साफ करेगी कि सीबीआई और मंत्री के बीच अदालत की टिप्पणी के बाद कोई मुलाक़ात नहीं हुई।

कोयला घोटाले का घटनाक्रम-
31 मई 2012    
सीवीसी ने कोयला घोटाले की सीबीआई जांच के लिए कहा

24 जनवरी 2013
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से जांच पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी

8 मार्च 2013
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश की

12 मार्च 2013
सीबीआई निदेशक 26 अप्रैल तक हलफ़नामा दें सुप्रीम कोर्ट
हलफ़नामा दें कि क्या स्टेटस रिपोर्ट क्या सरकार को दिखाई गई है या नहीं : कोर्ट

12 मार्च 2013
सीबीआई के वकील एडि. सॉलिसिटर जनरल हरेन रावल ने कोर्ट में कहा ’सरकार ने सीबीआई की रिपोर्ट नहीं देखी है’
हरेन रावल से नाखुश सीबीआई ने निजी वकील यू ललित को नियुक्त किया

26 अप्रैल 2013
सीबीआई निदेशक ने माना जांच रिपोर्ट सरकार ने देखी

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
8 मार्च को सीबीआई ने कोयला ब्लॉक आवंटन पर स्टेटस रिपोर्ट सौंपी
12 मार्च हलफ़नामा दे सीबीआई निदेशक : कोर्ट
- हलफ़नामा दें कि स्टेटस रिपोर्ट सिर्फ आपने जांची सरकार ने नहीं
− अगर कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ तो आवंटन रद्द हो सकता है
− सरकार बताए कि कोयला ब्लॉक आवंटन के लिए कुछ चुनिंदा कंपनियों को ही क्यों चुना
−26 अप्रैल 2013 सीबीआई निदेशक ने माना जांच रिपोर्ट सरकार ने देखी

सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में यह कहा कि कोयला घोटाले पर मार्च में जमा की गई स्टेटस रिपोर्ट उन्हें दिखाई गई। लेकिन, ये ज़िक्र नहीं है कि क्या उसमें कोई बदलाव किए। लेकिन राहत ये कहकर दी है कि ताज़ा स्टेटस रिपोर्ट किसी को नहीं दिखाई गई।

सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई निदेशक ने कहा कि 8 मार्च को सौंपी गई रिपोर्ट कानून मंत्री के कहने पर उनसे साझा की गई। पीएमओ के संयुक्त सचिव के साथ भी रिपोर्ट साझा की गई। कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिव के साथ भी रिपोर्ट साझा की।


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