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औरंगजेब : अच्छी कहानी, बेहतरीन अभिनय डायरेक्टर अतुल ने '70 के दशक की फिल्मों का फार्मूला नए ढंग से पेश किया है, जिसके चलते 'औरंगज़ेब' कहीं आपको 'त्रिशुल' लगती है तो कहीं 'डॉन', पर स्क्रीन प्ले आपको बांधे रखता है।
दर्शकों को 'जॉम्बीज' से मिलाती है 'गो गोवा गोन' फिल्म में कुणाल के वन लाइनर्स हंसाते हैं। आनंद तिवारी, जो बनी के किरदार में हैं, उनका भी जबरदस्त अभिनय है। वीरदास का काम ठीक है, वहीं पूजा और सैफ के पास ज्यादा कुछ करने को नहीं दिखता।
गिप्पी : कहानी बच्चों की, संदेश बड़ा यह फ़िल्म देखकर आप शायद अपने बचपन में लौट जाएं। फ़िल्म और उसके किरदारों की सादगी आपको हंसाएगी भी और यादों के सफ़र पर भी ले जाएगी...
बांधकर रखती है 'शूटआउट एट वडाला' यह फिल्म मन्या सुर्वे और उसका एनकाउंटर करने वाले पुलिस ऑफ़िसर इसाक बगवान की है, जिसे बेहतरीन ढंग से दिखाया गया है।फिल्म में तड़कते-भड़कते गाने और बेहतरीन डायलॉग्स हैं।
एक्सपेरिमेंटल फिल्म बनकर रह गई 'बॉम्बे टॉकीज़' 'बॉम्बे टॉकीज़' चार कहानियों से जड़ी एक फ़िल्म है, जिसे चार निर्देशकों ने डायरेक्ट किया है। चारों कहानियां एक्स्पेरिमेंटल हैं, जो आम आदमी की समझ से दूर हैं।
लव और इमोशन्स से भरपूर है 'आशिकी-2' 'आशिकी-2' में छोटी-छोटी खुशियां, रोमांटिक सीन्स, डायलॉग्स, इमोशन्स और प्यार के लिए बलिदान को पर्दे पर अच्छे से उतारा गया है।
डराने में कामयाब रही है 'एक थी डायन' इमरान हाशमी इस फिल्म में जादूगर की भूमिका में हैं, जो जादू दिखाने के दौरान अजीब-सी डरावनी आवाजें सुनते हैं और परेशान होकर मनोवैज्ञानिक के पास जाते हैं।
स्टंट सीन ने बचाया 'कमांडो' को... मेरे मुताबिक यह फिल्म पूरी तरह विद्युत और जयदीप की ही है... अगर आप कुछ अच्छे स्टंट सीन देखना चाहते हैं, तो 'कमांडो' देख सकते हैं...
कुछ अलग है 'नौटंकी साला' फिल्म में ठहराव है, लेकिन कहीं-कहीं वह आपको ऊबाऊ लग सकता है... कुछ पुराने गानों के री−मिक्स आपको सुनने में अच्छे लग सकते हैं...
जबर्दस्त मनोरंजक फिल्म है 'चश्मे बद्दूर'... बस, इस फिल्म में भी पुरानी 'चश्मे बद्दूर' की तरह थोड़ी सादगी होती, तो यह बेहतरीन फिल्म साबित हो सकती थी, लेकिन कुल मिलाकर नई 'चश्मे बद्दूर' जबरदस्त मनोरंजक फिल्म तो है ही...

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