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साहित्य

  • कोहिनूर अब पहले जितना बड़ा नहीं रहा: अनीता आनंद
    ब्रिटेन में रहनेवाली भारतीय पत्रकार अनीता आनंद ने प्रसिद्ध इतिहासकार विलियम डेलरिंपल के साथ मिलकर ‘कोहिनूर : द स्टोरी ऑफ द वर्ल्ड्स मोस्ट इनफेमस डायमंड’ किताब लिखी है. इसी पर चर्चा करते हुए जयपुर साहित्य महोत्सव के 10वें आयोजन के एक सत्र में अनीता ने कहा, ‘‘इंग्लैंड में लोगों ने कोहिनूर को एक क्रिस्टल का टुकड़ा मानते हुए इसका मजाक उड़ाया क्योंकि यह चमक नहीं रहा था.’’
  • हार्पर कॉलिन्स ने भारत में 25 साल किए पूरे, जेएलएफ में मनेगा उत्‍सव
    प्रकाशन क्षेत्र की कंपनी हार्पर कॉलिन्स को इस साल भारत में परिचालन करते हुए 25 साल पूरे हो गए हैं. इस बात का उत्सव मनाने के लिए कंपनी ने कई प्रकार के प्रचार अभियान शुरू किए हैं.
  • इन महिलाओं को कुछ नहीं पता अपने पति के बारे में!
    कश्मीर घाटी में दशकों तक चले संघर्ष की ‘‘सबसे बड़ी शिकार’’ वहां की महिलाएं हैं, ये कहना है कश्मीरी कवियत्री सैफई का. सैफई ने कहा कि इस संघर्ष की शिकार कई महिलाओं को अपने पतियों के पते-ठिकाने के बारे में कुछ नहीं पता था. इन लोगों को ‘‘अधूरी बेवा’’के तौर पर जाना जाने लगा.
  • बेहद अच्‍छे कवि थे मुगल काल के ये दो दरबारी...
    मुगल काल के नृशंस सत्ता संघर्षों और साहित्यिक उपलब्धियों की पृष्ठभूमि में दो दरबारियों और कवियों की जीवन गाथा को समेटने वाली एक नयी पुस्तक आयी है.
  • <b>जन्‍मदिन विशेष:</b> लेखन से गूढ़ प्रेम था 'ऐनी आपा' को
    क़ुर्रतुल ऐन हैदर जिन्‍हें ऐनी आपा के नाम से जाना जाता है एक प्रसिद्ध उपन्यासकार और लेखिका थीं. ऐनी आपा ने बहुत ही छोटी उम्र में लेखन शुरू कर दिया था. उन्‍होंने महज छ: साल की उम्र में अपनी कलम से पहली कहानी को कागज पर उकेरा. 'बी चुहिया' ऐनी आपा की पहली प्रकाशित कहानी थी.
  • लेखक का कोई धर्म नहीं होता: नासिरा शर्मा
    1948 में उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में जन्मीं नासिरा शर्मा उपन्यास 'पारिजात' के लिए साहित्य अकादमी पुस्कार से सम्‍मानित किया गया. उनकी 10 कहानी संकलन, 6 उपन्यास और 3 निबंध संग्रह प्रकशित हैं. वह हिंदी के अलावा फारसी, अंग्रेजी, उर्दू और पोश्तो भाषाओं पर भी अच्छी पकड़ रखती हैं.
  • इन मुद्दों पर रोशनी डालती है गुलजार की नई किताब...
    कवि-गीतकार गुलजार हमेशा से ही अपने उम्‍दा लेखन के लिए जाने जाते रहे हैं, उनकी गीत लोगों के दिलों-दिमाग पर अपनी छाप छोड़े बिना नहीं रहते हैं. यही उनकी कविताओं की एक नई किताब के साथ सामने आया हैं. उनकी इस किताब में देश के विभिन्न मुद्दों पर प्रकाश डाला गया है.
  • 'मन की बात-फ्रॉम द हार्ट ऑफ दि माइंड' किताब लॉन्‍च
    भारत के ग्रामीण विकास, पंचायती राज्य एवं पेयजल व स्वच्छता मामले संबंधी मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने 'मन की बात-फ्ऱॉम दि हॉर्ट ऑफ दि माईंड' पुस्तक (मन की बात - मन की मीमांसा से) का एक विशेष समारोह के दौरान लोकार्पण किया. तोमर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र-निर्माण के एजेंडे अनुसार किए प्रयासों व स्वयं में एक विलक्षण पुस्तक प्रकाशित करने वाले लेखकों जैरी अल्मेडा एवं राजेंद्रन पानिकर के प्रयत्नों की सराहना की.
  • आज से शुरू हो रहा है 'साहित्य का महाकुम्भ' जयपुर साहित्य महोत्सव
    गुलाबी नगरी जयपुर में आज से शुरू होने जा रहा है साहित्‍य का महाकुम्‍भ यानी जयपुर साहित्‍य महोत्‍सव. राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सदगुरू, गुलजार और एन वाल्डमैन आज पांच दिवसीय जयपुर साहित्य महोत्सव का उद्घाटन करेंगे.
  • सोमालियाई शरणार्थियों की समस्याओं का जीवंत चित्रण है यह उपन्‍यास
    देश में रह रहे सोमालियाई शरणार्थियों से होने वाले भेदभाव और उनकी समस्याओं को एक उपन्यास के जरिये रेखांकित करने की कोशिश की गई है. दिल्ली में कला संरक्षक राधा महेंद्रू और शोधकर्ता बानी गिल ने रेखाचित्रों से सजे अपने उपन्यास ‘द हराइजन इज एन इमेजनरी लाइन’ में इन शरणार्थियों की समस्या को पुरजोर उठाया.
  • जन्मदिन विशेष : क्‍लास छोड उपन्‍यास लिखते थे 'हिंदी के शेक्सपीयर...'
    रांगेय राघव की ये पंक्तियां उनके मिजाज को बताने के लिए काफी हैं. आलौकिक प्रतिभा के धनी तमिल भाषी, लेकिन हिंदी साहित्य के धरोहर रांगेय राघव का आज जन्‍मदिन है.
  • बुक फेयर नोटबंदी से नहीं हुआ प्रभावित, अंतिम दिन भी उमड़ी भीड़
    पुस्तक मेले के अंतिम दिन रविवार यानी छुट्टी का दिन होने के कारण भारी भीड़ उमड़ी. मेले में सुबह से ही पुस्तक प्रेमियों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई. अभिभावक अपने बच्चों के साथ पूरे उत्साह एवं जोश से भरे नजर आए. प्रकाशक भी नोटबंदी के बावजूद अच्छी बिक्री से खुश नजर आए.
  • जेएनयू में 'राष्ट्रवाद' पर दिए गए व्याख्यानों पर छपी किताब, 25 जनवरी को होगा विमोचन
    प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में 'राष्ट्रवाद' की मौजूदा परिभाषा के जवाब में जो व्याख्यान हुए थे, अब उन्हें एक किताब की शक्ल दी गई है जिसका नाम 'व्हाट द नेशन रियली नीड्स टू नो' है. पिछले साल जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन (जेएनयूटीए) ने एक महीने तक 'राष्ट्रवाद व्याख्यान श्रृंखला' का आयोजन किया था.
  • पेंग्विन प्रकाशन के 30 साल पूरे, जयपुर साहित्य उत्सव में होगा जश्न
    पेंग्विन ने अपने प्रकाशन कारोबार के 30 साल पूरा होने के उपलक्ष्य में जयपुर साहित्य उत्सव में अनेक कार्यक्रम करने की योजना बनायी है. पेंग्विन की शुरआत 1985 में हुयी थी और दो साल बाद 1987 में इसने छह किताबें प्रकाशित की थीं.
  • आंद्रे त्रस्चके ने औरंगजेब की जीवनी लिखी
    इतिहासकार आंद्रे त्रस्चके ने औरंगजेब की आत्मकथा लिखी है, जिसमें विवादास्पद मुगल शासक पर नये नजरिये से बात की गयी है. 'औरंगजेब: दि मैन एंड दि मिथ' किताब छापने वाले प्रकाशक पेंग्विन रेंडम हाउस ने कहा कि हालांकि बहुत से लोग औपनिवेशिक युग के विचारकों से सहमत हैं.
  • साक्षात्कार: जब समाज बोल्ड हो गया तो कहानी में बोल्डनेस क्यों नहीं: प्रियंका ओम
    'प्रियंका ओम' की किताब 'ओ अजीब लड़की' महिला मुद्दों पर लिखी गई है, जो दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे बुक फेयर में हॉल नंबर 12 के 122 नंबर स्टॉल पर उपलब्ध है. प्रियंका ओम ने NDTV से बात करते हुए बताया कि उनकी यह किताब करीब एक साल पहले आई थी.
  • वर्ल्‍ड बुक फेयर में हुआ 11 काव्य संग्रहों का लोकार्पण
    विश्व पुस्तक मेले के सातवें दिन राजकमल प्रकाशन समूह पर आलोचक नामवर सिंह द्वारा 11 लेखकों के काव्य संग्रहों का लोकार्पण किया. काव्य संग्रहों में गीत चतुर्वेदी की 'न्यूनतम मैं', दिनेश कुशवाह की 'इतिहास में अभागे', आर. चेतनक्रांति की 'वीरता पर विचलित' का लोकार्पण आलोचक नामवर सिंह द्वारा राजकमल प्रकाशन के पंडाल पर हुआ.
  • पुस्तक मेले में हिमाचल के साहित्यकारों की किताबों की धूम
    दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे पुस्तक मेले में जहां देश-विदेश के चर्चित लेखकों की कृतियों को खरीदने के लिए बड़ी संख्या में पुस्तक प्रेमी उमड़ रहे हैं, वहीं हिमाचल के साहित्यकार भी अपनी छाप छोड़ रहे हैं. विभिन्न प्रकाशनों के स्टॉलों पर हिमाचल के लेखकों की कृतियां धूम मचा रही हैं.
  • मार्क जुकरबर्ग पर लिखी हिंदी की पहली पुस्तक का बुक फेयर में लोकार्पण
    फेसबुक के संस्‍थापक मार्क जुकरबर्ग पर हिंदी में लिखी पहली किताब का लोकार्पण बुक फेयर में किया गया. दिल्‍ली के प्रगति मैदान में चल रहे पुस्‍तक मेलें में एपीएन पब्लिकेशंस के स्टॉल पर किताब को लॉन्‍च किया गया. इस स्टाल पर दो उपन्यास का भी लोकार्पण किया गया.
  • नोटबंदी: खराब नेटवर्क और छुट्टे की कमी से बुक फेयर का मजा हुआ किरकिरा
    नोटबंदी के दो माह बाद आयोजित हो रहे विश्व पुस्तक मेले में उम्मीद थी कि मेले को नकदी की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा और प्रकाशक नकदी रहित लेन-देन के जरिये अपनी किताबें बेच लेंगे, लेकिन रुक-रुककर चलने वाले नेटवर्क और 2,000 रुपये के छुट्टे नहीं मिल पाने से प्रकाशकों का किताब बिक्री का खेल बिगड़ रहा है.

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