Hindi news home page
Collapse
Expand
होम | साहित्य

साहित्य

  • प्रकृति से प्‍यार करने वालों का ही है साहित्य की ओर झुकाव: प्रसून जोशी
    लेखक-गीतकार प्रसून जोशी को जयपुर साहित्य महोत्सव में एमिटी विश्वविद्यालय की ओर से मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया है. उनका कहना है कि जो प्रकृति को और अधिक उजागर कर रहे हैं वहीं साहित्य को बढ़ावा दे रहे हैं. प्रसून ने कहा, जो प्रकृति जैसे हिल स्टेशन और पहाड़ के करीब हैं वह शहर के व्यस्त जीवन को उजागर नहीं करते हैं. इसलिए उनका साहित्य के प्रति झुकाव है.
  • क्‍यों महत्‍वपूर्ण है किसी किताब का कवर, बता रही हैं लेखक झुम्पा लाहिड़ी
    पुलित्जर पुरस्कार विजेता लेखक झुम्पा लाहिड़ी ने अपनी नयी किताब में पुस्तकों के कवर का लेखकों और पाठकों के लिए क्या महत्व है, इस पर रोशनी डाली है. इसके अलावा उन्होंने लेखनी और चित्र, लेखक और डिजाइन तथा कला और वाणिज्य के जटिल संबंधों की भी व्याख्या की है.
  • 'जश्न-ए-तहजीब' में साहित्य के रंग में डूबे श्रोता
    सांस्कृतिक कार्यक्रम 'जश्न-ए-तहजीब' में मीडियाकर्मी तेजेंद्र शर्मा ने जहां कहानी कहने के अपने अलग अंदाज से श्रोताओं को झकझोर दिया, वहीं साहित्य के रंग में डूबे इस कार्यक्रम में अपने अंदाज के लिए मशहूर प्रसिद्ध गजलकार शकील अहमद उपस्थित श्रोताओं की वाहवाही लूटी.
  • समीक्षा: त्रासदी को उजागर करती 'रेडियो कोसी'
    युवा लेखक पुष्यमित्र का नया उपन्यास 'रेडियो कोसी' लगभग भूल चुके त्रासदी को उजागर करता है. लेखक ने बिहार की कोसी नदी तटबंध के अंदर रह रहे लाखों लोगों को विषय बनाया है, उन्हें हर कोई भूल चुका है. अपना देश, अपना राज्य, अपना समाज हर कोई-यह भयावह सत्य है. त्रासदी को थोड़ी बहुत आवाज मिली, जब 2008 की भयानक बाढ़ आई. उसके भी पीछे का कारण यह था कि तटबंध के बाहरी इलाके को भी कोसी ने अपने जबड़े में जकड़ लिया था.
  • कटक के कवि जयंत महापात्रा को मिला कन्हैया लाल सेठिया पुरस्कार
    साहित्य जगत का जाना-माना कन्हैया लाल सेठिया अवॉर्ड किसे मिलेगा, शनिवार को इस सवाल पर से सस्पेंस खत्म हो गया. जयपुर साहित्य समारोह में भौतिकशास्त्री व कवि जयंत महापात्रा को कविता के लिए कन्हैया लाल सेठिया अवॉर्ड का विजेता घोषित किया गया. 
  • उपन्यास खत्म नहीं हो रहे, बल्कि आने वाले समय में और अहमियत रखेंगे: बुकर पुरस्कार विजेता फ्लैनागन
    जाने-माने ऑस्ट्रेलियाई लेखक और 2014 के बुकर पुरस्कार विजेता रिचर्ड फ्लैनागन ने जोर देकर कहा कि एक उपन्यास की रचना दोबारा नहीं की जा सकती है. भविष्य में यह विधा अधिक से अधिक मायने रखने जा रही है क्योंकि यह अकेली ऐसी विधा है जो सवाल करती है.
  • मानव भावनाओं का सागर है राघवेन्‍द्र 'विकल' की 'प्‍यास ने कहा...'
    ये साहस और कभी न थकने का संदेश देती पक्तियां है राघवेंद्र विकल की कविता 'कभी विष पिया है' की. वरिष्‍ठ कवि राघवेन्‍द्र 'विकल' ने कई कविताएं लिखी हैं. उनकी कविताओं का संग्रह 'प्‍यास ने कहा...' में साहस, प्रेम जैसे कई मानव भावों के अतिरिक्‍त बाजारवाद, रिश्‍तों में आते मतभेद को केंद्र में रखकर भी कविताएं हैं.
  • कोहिनूर अब पहले जितना बड़ा नहीं रहा: अनीता आनंद
    ब्रिटेन में रहनेवाली भारतीय पत्रकार अनीता आनंद ने प्रसिद्ध इतिहासकार विलियम डेलरिंपल के साथ मिलकर ‘कोहिनूर : द स्टोरी ऑफ द वर्ल्ड्स मोस्ट इनफेमस डायमंड’ किताब लिखी है. इसी पर चर्चा करते हुए जयपुर साहित्य महोत्सव के 10वें आयोजन के एक सत्र में अनीता ने कहा, ‘‘इंग्लैंड में लोगों ने कोहिनूर को एक क्रिस्टल का टुकड़ा मानते हुए इसका मजाक उड़ाया क्योंकि यह चमक नहीं रहा था.’’
  • हार्पर कॉलिन्स ने भारत में 25 साल किए पूरे, जेएलएफ में मनेगा उत्‍सव
    प्रकाशन क्षेत्र की कंपनी हार्पर कॉलिन्स को इस साल भारत में परिचालन करते हुए 25 साल पूरे हो गए हैं. इस बात का उत्सव मनाने के लिए कंपनी ने कई प्रकार के प्रचार अभियान शुरू किए हैं.
  • इन महिलाओं को कुछ नहीं पता अपने पति के बारे में!
    कश्मीर घाटी में दशकों तक चले संघर्ष की ‘‘सबसे बड़ी शिकार’’ वहां की महिलाएं हैं, ये कहना है कश्मीरी कवियत्री सैफई का. सैफई ने कहा कि इस संघर्ष की शिकार कई महिलाओं को अपने पतियों के पते-ठिकाने के बारे में कुछ नहीं पता था. इन लोगों को ‘‘अधूरी बेवा’’के तौर पर जाना जाने लगा.
  • बेहद अच्‍छे कवि थे मुगल काल के ये दो दरबारी...
    मुगल काल के नृशंस सत्ता संघर्षों और साहित्यिक उपलब्धियों की पृष्ठभूमि में दो दरबारियों और कवियों की जीवन गाथा को समेटने वाली एक नयी पुस्तक आयी है.
  • <b>जन्‍मदिन विशेष:</b> लेखन से गूढ़ प्रेम था 'ऐनी आपा' को
    क़ुर्रतुल ऐन हैदर जिन्‍हें ऐनी आपा के नाम से जाना जाता है एक प्रसिद्ध उपन्यासकार और लेखिका थीं. ऐनी आपा ने बहुत ही छोटी उम्र में लेखन शुरू कर दिया था. उन्‍होंने महज छ: साल की उम्र में अपनी कलम से पहली कहानी को कागज पर उकेरा. 'बी चुहिया' ऐनी आपा की पहली प्रकाशित कहानी थी.
  • लेखक का कोई धर्म नहीं होता: नासिरा शर्मा
    1948 में उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में जन्मीं नासिरा शर्मा उपन्यास 'पारिजात' के लिए साहित्य अकादमी पुस्कार से सम्‍मानित किया गया. उनकी 10 कहानी संकलन, 6 उपन्यास और 3 निबंध संग्रह प्रकशित हैं. वह हिंदी के अलावा फारसी, अंग्रेजी, उर्दू और पोश्तो भाषाओं पर भी अच्छी पकड़ रखती हैं.
  • इन मुद्दों पर रोशनी डालती है गुलजार की नई किताब...
    कवि-गीतकार गुलजार हमेशा से ही अपने उम्‍दा लेखन के लिए जाने जाते रहे हैं, उनकी गीत लोगों के दिलों-दिमाग पर अपनी छाप छोड़े बिना नहीं रहते हैं. यही उनकी कविताओं की एक नई किताब के साथ सामने आया हैं. उनकी इस किताब में देश के विभिन्न मुद्दों पर प्रकाश डाला गया है.
  • 'मन की बात-फ्रॉम द हार्ट ऑफ दि माइंड' किताब लॉन्‍च
    भारत के ग्रामीण विकास, पंचायती राज्य एवं पेयजल व स्वच्छता मामले संबंधी मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने 'मन की बात-फ्ऱॉम दि हॉर्ट ऑफ दि माईंड' पुस्तक (मन की बात - मन की मीमांसा से) का एक विशेष समारोह के दौरान लोकार्पण किया. तोमर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र-निर्माण के एजेंडे अनुसार किए प्रयासों व स्वयं में एक विलक्षण पुस्तक प्रकाशित करने वाले लेखकों जैरी अल्मेडा एवं राजेंद्रन पानिकर के प्रयत्नों की सराहना की.
  • आज से शुरू हो रहा है 'साहित्य का महाकुम्भ' जयपुर साहित्य महोत्सव
    गुलाबी नगरी जयपुर में आज से शुरू होने जा रहा है साहित्‍य का महाकुम्‍भ यानी जयपुर साहित्‍य महोत्‍सव. राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सदगुरू, गुलजार और एन वाल्डमैन आज पांच दिवसीय जयपुर साहित्य महोत्सव का उद्घाटन करेंगे.
  • सोमालियाई शरणार्थियों की समस्याओं का जीवंत चित्रण है यह उपन्‍यास
    देश में रह रहे सोमालियाई शरणार्थियों से होने वाले भेदभाव और उनकी समस्याओं को एक उपन्यास के जरिये रेखांकित करने की कोशिश की गई है. दिल्ली में कला संरक्षक राधा महेंद्रू और शोधकर्ता बानी गिल ने रेखाचित्रों से सजे अपने उपन्यास ‘द हराइजन इज एन इमेजनरी लाइन’ में इन शरणार्थियों की समस्या को पुरजोर उठाया.
  • जन्मदिन विशेष : क्‍लास छोड उपन्‍यास लिखते थे 'हिंदी के शेक्सपीयर...'
    रांगेय राघव की ये पंक्तियां उनके मिजाज को बताने के लिए काफी हैं. आलौकिक प्रतिभा के धनी तमिल भाषी, लेकिन हिंदी साहित्य के धरोहर रांगेय राघव का आज जन्‍मदिन है.
  • बुक फेयर नोटबंदी से नहीं हुआ प्रभावित, अंतिम दिन भी उमड़ी भीड़
    पुस्तक मेले के अंतिम दिन रविवार यानी छुट्टी का दिन होने के कारण भारी भीड़ उमड़ी. मेले में सुबह से ही पुस्तक प्रेमियों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई. अभिभावक अपने बच्चों के साथ पूरे उत्साह एवं जोश से भरे नजर आए. प्रकाशक भी नोटबंदी के बावजूद अच्छी बिक्री से खुश नजर आए.
  • जेएनयू में 'राष्ट्रवाद' पर दिए गए व्याख्यानों पर छपी किताब, 25 जनवरी को होगा विमोचन
    प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में 'राष्ट्रवाद' की मौजूदा परिभाषा के जवाब में जो व्याख्यान हुए थे, अब उन्हें एक किताब की शक्ल दी गई है जिसका नाम 'व्हाट द नेशन रियली नीड्स टू नो' है. पिछले साल जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन (जेएनयूटीए) ने एक महीने तक 'राष्ट्रवाद व्याख्यान श्रृंखला' का आयोजन किया था.

Advertisement

Advertisement