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रिव्यू ऑफ द वीक

  • ‘इश्क क्लिक’ का किसी के निजी जीवन से कोई ताल्लुक नहीं : सतीश
    सुर-संगीत की नगरी वाराणसी से निकलकर बॉलीवुड में पिछले दो दशक से अपने सुरों की तान छेड़ने वाली वाली संगीतकार ‘सतीश-अजय’ की जोड़ी अब फिल्म निर्माण के क्षेत्र में उतरी है।
  • गोरी तेरे प्यार में : छू नहीं पाती कहानी
    इस शुक्रवार रिलीज़ हुई फ़िल्मों में से एक है 'गोरी तेरे प्यार में'। फ़िल्म में मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं इमरान ख़ान, करीना कपूर, श्रद्धा कपूर और अनुपम खेर ने।
  • पैसा वसूल फिल्म है 'फटा पोस्टर निकला हीरो'
    यह कहानी एक ऐसे इंसान की है जो फिल्मों में हीरो बनना चाहता है पर ग़लती से लोग उसे पुलिस ऑफिसर समझ बैठते हैं। इसी ’मिस्टेकन आइडेन्टिटी’ से शुरू होता है कॉमेडी का सिलसिला।
  • मंद-मंद बहती हवा का झोंका है 'लंच बॉक्स'
    रितेश बत्रा की फ़िल्म लंच बॉक्स में बहुत से डिब्बे हैं और हर डिब्बे में हैं मंत्र मुग्ध कर देने वाली चीजें जो हटकर सिनेमा देखने वालों के दिल में उतर जाएगी।
  • 'ज़ंजीर' : पुरानी से तुलना न करें, तो पैसा वसूल
    वर्ष 1973 की 'ज़ंजीर' उस गाढ़ी लकीर की तरह है, जिसे मिटाया नहीं जा सकता, लेकिन अगर आप नई 'ज़ंजीर' को आजकल के चलन में आई एक और मसाला फिल्म की तरह देखेंगे तो आप थियेटर से पैसा वसूल करके निकल आएंगे...
  • शुद्ध देसी रोमांस : मनोरंजन के साथ सीख भी
    'शुद्ध देसी रोमांस' की कहानी आज के युवा वर्ग पर आधारित है, जो इश्क में तो यकीन करता है, पर शादी में नहीं। फिल्म का प्लॉट अच्छा है और उसे कॉमेडी का तड़का लगाकर बुना गया है।
  • वास्तविकता और कल्पना के बीच उलझाती है 'सत्याग्रह'
    क्लाइमैक्स की तरफ जाते हुए कहानी थोड़ी सी डगमगाती है... और वहां दर्शक वास्तविकता और कल्पना के बीच में उलझ जाते हैं।
  • मद्रास कैफे : मौजूदा चलन से हटकर एक फिल्म
    'मद्रास कैफे' हिन्दी फिल्मों के मौजूदा चलन से अलग हटकर है, जो एक ताजा झोंके की अहसास कराती है। फिल्म की टीम ने एक तेज धार पर चलते हुए भी इसे किसी भी तरह गिरने या झुकने नहीं दिया है। फिल्म के सारे एक्टर असली लगते हैं।
  • कमजोर कहानी और अभिनय की मारी 'वंस अपॉन...'
    'वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई दोबारा' रिलीज़ हुई है इस गुरुवार को। यह कहानी है गैंगस्टर सोहेब यानी अक्षय कुमार की जो अपने दुश्मन रवैल से बदला लेने मुंबई पहुच जाता है पर यहां वह गिरफ़्तार हो जाता है जैसमीन यानी सोनाक्षी सिन्हा के इश्क में जो फिल्मों में हीरोइन बनने की ख्वाहिश रखती है।
  • 'मास एंटरटेनर' है 'चेन्नई एक्सप्रेस'...
    'चेन्नई एक्सप्रेस' का मकसद है, लोगों को एंटरटेन करना, जिसमें यह फिल्म कामयाब रही है, यानि यह 'मास एंटरटेनर' फिल्म है... फिल्म में काफी जगह अच्छी कॉमेडी और अच्छे सीन हैं...
  • हर नजरिये से कमज़ोर है 'इसक'
    लेकिन इसकी जो बातें पसंद आईं, वे हैं सचिन−जिगर का संगीत, और रवि किशन का अभिनय... इन दोनों पहलुओं के अलावा फिल्म मनोरंजन कतई नहीं कर पाई...
  • 'बजाते रहो' में ढूंढते रह जाओगे कॉमेडी
    फिल्म में उतनी ही कॉमेडी है, जितनी प्रोमो में दिखाई गई। कहानी, स्क्रिप्ट, स्क्रीनप्ले, गीत-संगीत सभी पक्ष कमजोर हैं।
  • जिंदगी को अलग नजरिये से देखती है 'शिप ऑफ थीसस'
    जो लोग फिल्म में कुछ ढूंढने की कोशिश करते हैं, या ऐसी फिल्म देखने की शौकीन हैं, जो दुनिया में उथल-पुथल मचा दे, यह फिल्म उनके लिए है।
  • 'डी डे' के कुछ सीन्स नहीं होते हजम
    'डी डे' कहानी है, एक मोस्ट वांटेड अपराधी को पाकिस्तान से हिन्दुस्तान लाए जाने की, जिसकी जिम्मेदारी ली है हिन्दुस्तानी इंटेलिजेंस एजेंसी रॉ ने।
  • प्रेरणाभरी कहानी है 'भाग मिल्खा भाग'
    फिल्म में अच्छाइयां बहुत हैं... पहले नंबर पर है फरहान की एक्टिंग, फिर बिनोद प्रधान की बेहतरीन सिनेमेटोग्राफी, फिर 'अलिफ अल्लाह...' और 'हवनकुंड...' जैसे जुबान पर चढ़ने वाले गाने...
  • 'लुटेरा' : उम्दा निर्देशन, बेहतरीन एक्टिंग
    'लुटेरा' आपके दिल को छू जाएगी। इसमें सोनाक्षी की झकझोर देनी वाली परफॉर्मेंस है और रणवीर सिंह ने भी अपना किरदार बखूबी संभाला है।
  • अच्छी साइको-थ्रिलर है 'द सेन्ट हू थॉट अदरवाइज़'
    फिल्म की कहानी अच्छी और अलग है... कैमरे का इस्तेमाल भी ढंग से किया गया है... कुछ मिलाकर डायरेक्टर अमोल शेटगे का काम अच्छा रहा...
  • एक्शन से भरपूर 'एनेमी' की कहानी है कमजोर
    'एनेमी' को देखकर ऐसा लगता है कि फिल्म सिंगल स्क्रीन के लिए बनाई गई है और शायद वही दर्शक इस फिल्म की तरफ रुख भी करें।
  • 'रांझना' : दिल को छूती है यह मासूम मोहब्बत
    प्यार में लड़की का दिल जीतने की कोशिश, उसका पीछा करना, लड़की के घर के बाहर चक्कर लगाना और हाथ की नसें काटना ये सब कुछ फिल्म 'रांझना' में दिखेगा।
  • सच्चाई से रू-ब-रू कराती है 'अंकुर अरोड़ा मर्डर केस’
    डॉ. अस्थाना इस बात से वाकिफ हैं कि अंकुर ऑपरेशन से पहले बिस्किट खा चुका है, पर अपनी व्यस्तता के कारण डॉक्टर ये भूल जाते हैं और ऑपरेशन कर डालते हैं।

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