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मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हेडली को अमेरिका में 35 साल की कैद

 
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मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हेडली को अमेरिका में 35 साल की कैद

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शिकागो: अमेरिका की एक अदालत ने मुंबई आतंकवादी हमलों के लिए पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी डेविड हेडली को 35 साल की सजा सुनाई। लेकिन अमेरिकी सरकार के साथ एक समझौते के चलते वह मौत की सजा पाने से बच गया, जिस पर सजा सुनाने वाले जज ने भी गंभीर आपत्ति जाहिर की।

जज लेनेनवेबर ने कहा, जो सजा मैं सुना रहा हूं, मुझे उम्मीद है कि यह श्रीमान हेडली को ताउम्र सलाखों के पीछे रखेगी। जज ने कहा कि मौत की सजा सुनाना अधिक आसान होता। उन्होंने कहा, आप उसी के हकदार हैं। 52-वर्षीय हेडली ने अमेरिकी जांचकर्ताओं के साथ एक समझौता किया था, जिसके तहत वह मौत की सजा पाने से बच गया। लेकिन बहुत लोगों को इससे हैरानी हुई कि अमेरिकी अभियोजकों ने हेडली के लिए आजीवन कारावास की सजा क्यों नहीं मांगी।

अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज हैरी लेनेनवेबर ने हेडली को 35 साल जेल में बिताने का आदेश दिया, जिसमें बाद में पांच साल के सुपरवाइज्ड रिलीज (निगरानी में रिहाई) का प्रावधान होगा। इस सजा में पैरोल की कोई व्यवस्था नहीं है और दोषी को अपनी सजा की कम से कम 85 फीसदी सजा पूरी करनी होगी। जज ने खचाखच भरे अदालत कक्ष में सजा सुनाते हुए कहा, श्रीमान हेडली एक आतंकवादी हैं।

लेनेनवेबर ने यह भी कहा, उसने अपराध को अंजाम दिया, अपराध में सहयोग किया और इस सहयोग के लिए बाद में इनाम भी पाया। उन्होंने कहा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं क्या करता हूं। इससे आतंकवादी रुकेंगे नहीं। दुर्भाग्यवश, आतंकवादी इन सब की परवाह नहीं करते। मुझे श्रीमान हेडली की इस बात में कोई विश्वास नहीं होता, जब वह यह कहते हैं कि वह अब बदल गए हैं।

जज ने कहा, मैं यह मानता हूं कि हेडली से लोगों की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना कि वह भविष्य में और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल नहीं हो, मेरा फर्ज है। 35 साल की सजा सही सजा नहीं है। जज ने कहा, मैं 35 साल की सजा दिए जाने के सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार करता हूं और 35 साल की सजा सुनाता हूं। यह पूछे जाने पर कि क्या वह कोई बयान देना चाहता है, हेडली ने कहा, नहीं योर ऑनर।

अपना दोष स्वीकार करने और बाद में सह-आरोपी तथा स्कूल के समय के दोस्त तहव्वुर राणा की सुनवाई के दौरान सरकार के पक्ष में गवाही देते हुए हेडली ने स्वीकार किया था कि उसने पाकिस्तान में वर्ष 2002 से 2005 के बीच पांच अलग-अलग मौकों पर लश्कर-ए-तैयबा द्वारा संचालित आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों में हिस्सा लिया था। 2005 के अंतिम दिनों के दौरान हेडली को लश्कर के तीन सदस्यों की ओर से भारत में खुफियागिरी के लिए जाने का निर्देश मिला। उसने पांच बार खुफियागिरी की, जिसकी परिणति 2008 के मुंबई हमलों के रूप में हुई। इसमें छह अमेरिकियों समेत 166 लोग मारे गए और सैकड़ों अन्य घायल हुए थे।

एक सप्ताह पहले लेनेनवेबर ने राणा को 14 साल की सजा सुनाई थी, जिसमें तीन साल की सुपरवाइज्ड रिलीज का प्रावधान था। उसे लश्कर को साजो-सामान की मदद मुहैया कराने और कोपेनहेगन में डेनमार्क के एक समाचारपत्र के खिलाफ आतंकवादी हमले की योजना बनाने के लिए यह सजा सुनाई गई थी। हेडली और राणा दोनों को वर्ष 2009 में गिरफ्तार किया गया था।

हेडली मादक पदार्थों का डीलर था, जो बाद में अमेरिकी ड्रग इनफोर्समेंट एजेंसी का मुखबिर बन गया था। लेकिन बाद में वह बागी हो गया। अपनी अंतिम जिरह में अमेरिकी अटॉर्नी डेनियल जे कोलिन्स तथा साराह ई स्ट्रेकर ने हेडली के लिए 30 से 35 साल की सजा की मांग की थी।

हेडली के वकीलों - रॉबर्ट डेविड सीडेर तथा जॉन थामस ने यह कहते हुए उसे कम सजा सुनाए जाने की अपील की थी कि उसने लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी संगठनों और उसके कई नेताओं के खिलाफ अमेरिकी सरकार को काफी सूचना दी है। हेडली ने स्वीकार किया था कि उसने पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के लिए कई अभियानों को अंजाम दिया था। उसने मुंबई में प्रसिद्ध ताज महल होटल समेत भारत में कई ठिकानों की वीडियोग्राफी की थी, जिस पर लश्कर के 10 आतंकवादियों ने हमला किया था।
 सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक हेडली द्वारा बनाए गए विस्तृत वीडियो के आधार पर ही मुंबई हमलों की साजिश रची गयी और उसे अंजाम दिया गया।

एक पाकिस्तानी पिता और अमेरिकी मां की संतान हेडली ने 2006 में अपने नाम दाऊद गिलानी तक को बदल लिया था, ताकि वह बिना कोई शक पैदा किए भारत में आ-जा सके। अमेरिकी अटॉर्नी ने कहा कि इस बात में कोई शक नहीं है कि हेडली का आपराधिक कृत्य निंदनीय है, लेकिन उसका सहयोग करने का फैसला आतंकवाद से लड़ने के अमेरिकी प्रयासों में काफी महत्व रखता है। उन्होंने कहा, हम आजीवन कारावास से कम की सजा मांगते हैं, क्योंकि हेडली ने महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी मुहैया कराई है। उसका अपराध निंदनीय, खौफनाक और दर्दनाक है।

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