भारत में फिर बड़े हमले की तैयारी में लगा था आतंकी हमजा
अबू हमजा ने सुरक्षा एजेंसियों को पूछताछ के दौरान बताया है कि 26/11 हमले के लिए पाकिस्तान के कराची शहर में मलेर−कैंट छावनी इलाके और कैदाबाद के बीच कंट्रोल रूम बनाया गया था। इस कंट्रोल रूम में छह लोग थे। ये लगातार कसाब और उसके साथियों को फोन से गाइड कर रहे थे। इनके नाम हैं अबू अल कामा, जरार शाह, अबू काफा, जकी-उर-रहमान लखवी, मुजम्मिल और अबू जिंदाल।
इंडियन मुजाहिदीन और लश्कर−ए−तैयबा के आतंकी अबू हमजा पिछले 15 महीनों से सऊदी अरब में रह रहा था। महाराष्ट्र के बीड में रहने वाला अबू हमजा सऊदी अरब में पाकिस्तान के पासपोर्ट पर रह रहा था। पिछले कई महीनों से भारत की खुफिया एजेंसी के तीन अधिकारी अबू पर नजर बनाए हुए थे। उसकी पहचान के लिए खुफिया एजेंसी ने बीड से उसके घरवालों के ब्लड सैंपल लिए जिसके जरिए डीएनए टेस्ट हुआ और अबू की पहचान कर ली गई।
गौरतलब है कि अबू हमजा का सुराग पुणे धमाकों के सिलसिले में पकड़े गए लश्कर के आतंकी लाल बाबा मोहम्मद शेख ने पूछताछ के दौरान दिया था। उसी ने ज़बीउद्दीन की आवाज पहचान कर बताया था कि यह 26/11 में शामिल अबू जिंदाल है।
इसके बाद जबीउद्दीन के परिवार की शिनाख्त शुरू हुई।
पाकिस्तान भी जिंदाल के प्रत्यर्पण के खिलाफ पूरा दबाव बना रहा था लेकिन अंत में भारतीय अफसरों के पेश किए हुए सबूत काम आए। कहा जा रहा है कि इस मामले में अमेरिका ने भी सऊदी अरब पर दबाव बनाया। वहीं पाक हाई कमिशन ने अबू हमजा के मुद्दे पर कहा है आतंकवाद दोनों देशों के लिए समस्या है। इसका मुकाबला दोनों देश मिलकर ही कर सकते हैं। पाकिस्तान ने एक बार फिर इस क्षेत्र में अपना सहयोग देने की बात दोहराई है।
अबू की गिरफ्तारी इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि इसके पकड़े जाने से यह भी साफ हो पाएगा कि पाकिस्तान के कंट्रोल रूम से कैसे आतंकियों को ऑपरेट किया जाता है। वैसे, कई मायनों में यह गिरफ्तारी कसाब के पकड़े जाने के बराबर ही है।
हमजा की तलाश कई मामलों में है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाला केस था भारतीय विज्ञान संस्थान पर हमले का जहां आतंकी हथगोले फेंकने के बाद भी भाग निकलने में कामयाब हो गए थे। अब यह कहानी भी खुलेगी कि अबू हमजा को भगाने में किसने मदद की थी?
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