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‘पंचिंग बैग’ बनकर खुश हैं धोनी

 
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‘पंचिंग बैग’ बनकर खुश हैं धोनी
चेन्नई: टीम के लचर प्रदर्शन करने पर कप्तान को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है लेकिन भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को ‘पंचिंग बैग’ बनने यानि आलोचकों के निशाने पर रहने से कोई दिक्कत नहीं है यदि इससे अन्य खिलाड़ी दबाव में आने से बचते हैं।

भारतीय टीम पिछले साल से बुरे दौर से गुजर रही है और धोनी की नेतृत्वक्षमता पर सवाल उठाए जा रहे है। धोनी हालांकि हर तरह की आलोचना सहने के लिए तैयार हैं। भारत की पहले वन-डे में पाकिस्तान के हाथों हार के बाद धोनी ने कहा, ‘‘मेरी जितनी भी आलोचनाएं होती हैं मुझे स्वीकार है। मुझे अच्छा महसूस होता है कि मैं पंचिंग बैग हूं क्योंकि इससे टीम पर कम दबाव रहेगा। आपको टीम में कुछ इस तरह के खिलाड़ियों की जरूरत होती है जो पंचिंग बैग (आलोचना सहने वाले) बन सकें। सचिन पिछले कुछ समय से ऐसी भूमिका निभा रहे हैं। वह सारा तनाव हटा देते हैं। मैं नहीं समझता कि प्रत्येक को पंचिंग बैग बनने का मौका मिलता है इसलिए मुझे खुशी है कि मैं टीम का थोड़ा तनाव कम कर सकता हूं।’’

धोनी ने कहा कि आसमान पर बादल छाए हुए थे और टॉस गंवाने से लेकर आखिर तक भारत के लिए कुछ भी अच्छा नहीं रहा। उन्होंने कहा, ‘‘मैं समझता हूं कि टॉस से शुरुआत की जाए। उसके बाद उन्होंने अच्छी गेंदबाजी की। जब तेज गेंदबाजों को मदद मिल रही हो और गेंद स्विंग कर रही हो तो गेंद सही स्थान पर पिच करने से काम बनता है। यदि आप उनके गेंदबाजों पर नजर दौड़ाओ तो उन्होंने वास्तव में अच्छी गेंदबाजी की।’’

धोनी ने दबाव में 113 रन की जोरदार पारी खेली लेकिन उन्होंने कहा कि इस तरह का शतक बनाने का मौका मिलने के बजाय वह चाहते हैं कि उनके शीर्ष क्रम के बल्लेबाज अच्छा प्रदर्शन करें। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने बहुत अधिक शतक नहीं बनाए हैं जो मैं उनमें किसी एक का चयन करूं। मेरे लिए सभी शतक खास हैं। निचले क्रम में छठे या सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए यदि आप शतक बनाते हो, असल में आप ऐसा मौका नहीं चाहते क्योंकि मैं चाहता हूं कि हमारा शीर्ष क्रम अच्छा प्रदर्शन करे।’’

धोनी ने कहा, ‘‘लेकिन कुल मिलाकर मुझे खुशी है कि मैं शतक जड़ने में सफल रहा। बीच में इसकी संभावना नहीं लग रही थी। हमारे लिए क्रीज पर टिके रहना जरूरी था ताकि हम सम्मानजनक स्कोर खड़ाकर पाएं। यही हमारे दिमाग में था, यह नहीं कि मैं कितने रन बनाता हूं।’’

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