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आयरिश सरकार गर्भपात के मुद्दे पर दे स्पष्टीकरण : एमनेस्टी

 
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आयरिश सरकार गर्भपात के मुद्दे पर दे स्पष्टीकरण : एमनेस्टी
लंदन: मानवाधिकार समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि भारतीय दंत चिकित्सक सविता हलप्पनवार की त्रासद मौत से आयरिश कानून में खामी का पता चलता है और आयरलैंड की सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गर्भपात के मुद्दे पर उसकी घरेलू नीति अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के मुताबिक हो।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आयरिश स्वास्थ्य मंत्री जेम्स रीली को इस मुद्दे पर पत्र लिख कर चिंता जताई है।

पत्र में कहा गया है कि एमनेस्टी इस बात को लेकर चिंतित है कि सविता के त्रासदपूर्ण मामले से आयरिश कानून और नीति में मानवाधिकारों के इस सर्वाधिक मूलभूत स्तर पर खामी का पता चलता है कि जान का खतरा होने पर महिला को गर्भपात कराने का अधिकार है।

आयरलैंड में एमनेस्टी इंटरनेशनल के कार्यकारी निदेशक कॉम ओगोरमेन ने कहा ‘अगर किसी महिला की जान को खतरा है तो उसके कानूनी तौर पर सुरक्षित गर्भपात के अधिकार के बारे में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून बिल्कुल स्पष्ट है।’ उन्होंने कहा ‘एक के बाद एक आती आयरिश सरकारें महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनकी पुष्टि करने के बारे में स्थिति को स्पष्ट करने के अपने दायित्व के निर्वाह में असफल रही हैं जिसकी वजह से आयरलैंड में महिलाओं की स्थिति अत्यंत संवेदनशील है। सरकार को बिना किसी विलंब के स्पष्टीकरण देना चाहिए।’

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस मुद्दे पर स्पष्टता के अभाव को लेकर चिंता जाहिर की है और कहा है कि आयरिश सुप्रीम कोर्ट ने एक संवैधानिक सिद्धांत के तौर पर इस अधिकार की पहले ही पुष्टि कर दी है। एमनेस्टी इंटरनेशनल सचिवालय में वरिष्ठ नीति सलाहकार मैरियाने मोल्लामान ने कहा ‘घरेलू कानून को मानवाधिकारों पर यूरोपीय अदालत (यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स) की स्पष्ट व्यवस्था सहित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सिद्धांतों के मुताबिक करने में नाकामी की वजह से आयरलैंड अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निकायों की आलोचना का निशाना बना हुआ है।’

आयरलैंड के डॉक्टरों ने 31 वर्षीय भारतीय दंत चिकित्सक सविता के 17 हफ्ते के गर्भ को गिराने से कथित तौर पर इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि आयरलैंड एक कैथोलिक देश है। हालांकि डॉक्टरों ने उसे बता दिया था कि उसका गर्भपात हो रहा है।

सविता के पति और पेशे से इंजीनियर प्रवीण हलप्पानवार ने आयरिश मीडिया से कहा कि उनकी पत्नी ने तीन दिनों के दौरान कई दफा कहा कि उनका गर्भपात करा दिया जाए लेकिन इससे इनकार कर दिया गया। इस घटना से कैथोलिक देश में नाजुक मामलों में गर्भपात के अधिकार को लेकर बहस छिड़ गई है।

पिछले साल अक्टूबर में आयरलैंड के मानवाधिकार की संयुक्त राष्ट्र समीक्षा रिपोर्ट में विश्व संस्था के सदस्य देशों के इस आह्वान को दोहराया गया था कि आयरलैंड के घरेलू कानून को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार बाध्यताओं के अनुरूप किया जाए और जीवन रक्षा के लिए गर्भपात की अनुमति दी जाए। वर्ष 2011 में ‘यूएन कमेटी अगेन्स्ट टॉर्चर’ ने आयरलैंड से वैधानिक कानून के माध्यम से कानूनन गर्भपात का दायरा स्पष्ट करने का आग्रह किया था।

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