अन्ना हजारे ने भंग की टीम अन्ना, सदस्य हैरान
अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के लिए जनता को 'राजनीतिक विकल्प' देने की शुक्रवार की घोषणा के तीन दिन बाद टीम अन्ना को भंग कर दिया। उन्होंने हालांकि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की बात कही है। उनके इस फैसले से टीम के सदस्य भी हैरान हैं।
टीम अन्ना की सदस्य रह चुकीं किरण बेदी ने ट्विटर पर लिखा, "अन्ना का ब्लॉग पढ़ा। इन सबका अर्थ क्या है, नहीं जानती। अन्नाजी ने हमें जहां भी निर्देश दिया, हमारे लिए वह सहायक रहा।"
उधर, बेंगलुरू में टीम अन्ना के पूर्व सदस्य न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एन. संतोष हेगड़े ने एक समाचार चैनल से कहा कि वह टीम अन्ना को भंग करने के निर्णय से हैरान हैं। उन्होंने कहा, "मैं राजनीतिक कदम के खिलाफ था.. मुझे बुरा लग रहा है क्योंकि अन्ना हजारे ने प्रभावी लोकपाल के लिए जो आंदोलन शुरू किया था वह समय की आवश्यकता थी।" उन्होंने कहा, "आंदोलन बहुत आगे बढ़ा था। टीम अन्ना को चुनाव लड़ना चाहिए या नहीं, इसे लेकर जो भी विवाद हुए, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। इसी वजह से अन्ना हजारे ने टीम भंग कर दी।"
मनीष सिसौदिया ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा, "अन्नाजी ने अपने ब्लॉग में सबकुछ कह दिया है। इसमें कुछ भी अलग से कहने की जरूरत नहीं है। निर्णय के बारे में अधिक जानकारी केवल अन्ना दे सकते हैं।"
टीम अन्ना को भंग करने की घोषणा करने के बाद 75 वर्षीय अन्ना हजारे पुणे रवाना हो गए। उन्होंने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया। लेकिन वह काले धन के खिलाफ नौ अगस्त से शुरू हो रहे बाबा रामदेव के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए यहां लौटेंगे।
अन्ना हजारे ने सोमवार को अपने ब्लॉग पर हिन्दी में लिखा, "आज हम टीम अन्ना के रूप में अपना काम समाप्त करते हैं। टीम अन्ना का गठन जन लोकपाल के लिए किया गया था। हमने सरकार के साथ कोई सम्बंध नहीं रखने का फैसला किया। टीम अन्ना के नाम पर जो काम शुरू हुआ था वह समाप्त हो गया है और टीम अन्ना कमेटी भी भंग हो गई है।"
अन्ना हजारे ने कहा कि 'लोगों को जागरूक करने के लिए' वह देशभर का दौरा करेंगे। उन्होंने लिखा, "कई बार प्रदर्शन के बावजूद सरकार जन लोकपाल विधेयक पारित करने के लिए तैयार नहीं है। हमें अच्छे उम्मीदवारों की तलाश करनी होगी और लोगों को विकल्प देना होगा। मैं ऐसा समझता हूं, लेकिन यह कैसे होगा, यह एक सवाल है।" उन्होंने माना कि जनता को 'राजनीतिक विकल्प' देने की उनकी तीन अगस्त की घोषणा की कई लोगों ने आलोचना की। अपने अगले कदम को लेकर लोगों का रुख जानने की आवश्यकता जताते हुए उन्होंने लिखा, "हमें लोगों के विचार जानने होंगे, क्योंकि जंतर-मंतर भारत नहीं है।" उन्होंने इसके लिए 6.5 लाख ग्राम सभाओं या ग्राम परिषदों में जनमत संग्रह का प्रस्ताव रखा और कहा कि कार्यकर्ता गांवों में जाकर लोगों का मत जानेंगे।
अन्ना हजारे ने एक बार फिर कहा कि वह व्यवस्था में शामिल नहीं होंगे, लेकिन इसे बाहर से समर्थन देंगे।
वहीं, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने टीम अन्ना भंग करने की अन्ना हजारे की घोषणा पर समान प्रतिक्रिया व्यक्त की। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा, "अन्ना हजारे को स्वयं अपनी टीम में भरोसा नहीं है। यही वजह है कि उन्होंने यह निर्णय लिया। लेकिन यह उन पर है कि आगे क्या निर्णय लेते हैं।"
वहीं, भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह होना ही था। हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है।
विवादों के बीच इंडिया अगेंस्ट करप्शन की मीडिया समन्वयक अस्वथी मुरलीधर ने स्पष्ट किया, "अन्नाजी ने रविवार को टीम के सदस्यों के साथ संक्षिप्त बैठक की थी। सभी लोगों को टीम अन्ना भंग करने के निर्णय के बारे में जानकारी दी गई थी।"
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