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सेना कूच मामला : रक्षा सचिव की पेशी, संतुष्ट नहीं संसदीय समिति

 
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सेना कूच मामला : रक्षा सचिव की पेशी, संतुष्ट नहीं संसदीय समिति

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नई दिल्ली: बुधवार को भारतीय सेना की दो टुकड़ियों की जनवरी में हुई मूवमेंट की ख़बर छापकर सियासी हलकों में हलचल मचा देने के बाद उसी ख़बर को आगे बढ़ाते हुए इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने बृहस्पतिवार को दावा किया है कि मामले में कल ही रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा और तीनों सेनाओं के उपप्रमुख संसद की रक्षा मामलों की स्थायी समिति के सामने पेश हुए, लेकिन समिति के सदस्यों को अपने जवाबों से संतुष्ट करने में कतई नाकाम रहे, इसलिए समिति के दो सदस्य चाहते हैं कि सेनाप्रमुख जनरल वीके सिंह स्वयं समिति के सामने पेश हों।

बताया जाता है कि स्थायी समिति के दो सदस्य - अकाली दल के राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल और एआईएमआईएम के लोकसभा सांसद असाउद्दीन ओवैसी - इस मामले में जनरल सिंह की पेशी चाहते हैं। इनमें से नरेश गुजराल इस मांग को लेकर समिति के अध्यक्ष सतपाल महाराज को चिट्ठी भेजेंगे। बताया गया है कि सेनाध्यक्ष से सेना के इस मूवमेंट के अलावा पीएम को लिखी गई चिट्ठी के लीक होने के मामले में भी सवाल पूछे जा सकते हैं।

इस बीच, अंग्रेज़ी दैनिक इंडियन एक्सप्रेस के सम्पादक शेखर गुप्ता ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि सेना की दो टुकड़ियों के दिल्ली की ओर बढ़ने की ख़बर पर वे कायम हैं, और उन्हें अपनी ख़बर पर पूरा भरोसा है। यह विवाद बुधवार को उस वक्त शुरू हुआ था, जब इंडियन एक्सप्रेस ने ख़बर छापी कि 16 जनवरी की रात को सरकार की जानकारी के बिना फौज की दो अहम टुकड़ियां दिल्ली की तरफ बढ़ रही थीं, जिससे सरकार घबरा गई।

इंडियन एक्सप्रेस के पूरे पन्ने पर छपी इस ख़बर से जोरदार हंगामा हो गया था। हालांकि अब अख़बार भी मान रहा है कि सेना का कोई गलत इरादा नहीं था, लेकिन उसका दावा है कि इस हलचल में कुछ था, जो कायदों के खिलाफ था, क्योंकि सरकार ने भी खुफिया सूचना मिलते ही लुकआउट एलर्ट जारी कर दिया था।

लेकिन इस पूरी ख़बर से कुछ सवाल भी खड़े हुए हैं। जब फौज दिल्ली की ओर सेना की टुकड़ियों के बढ़ने को रूटीन कवायद बता रही है, तो उस पर सरकार के हाथ−पांव क्यों फूल गए थे। सबसे अहम सवाल अब यह है कि क्या सरकार को ऐसा लगा कि इसके पीछे कोई साज़िश है... और अगर ऐसा लगा, तो क्यों लगा।

एनडीटीवी इंडिया को सेना के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ऐसी कवायद आम है, जो हर दो−तीन महीने में एक बार होती है। इन छोटी टुकड़ियों से किसी ख़तरे की बात बेमानी है, लेकिन सवाल है कि इस आम रूटीन के सरकार ने खास मतलब क्यों निकाले। क्या इसलिए, क्योंकि हाल ही में सेनाप्रमुख और सरकार के बीच कई बार टकराव दिखाई दिए।

सेनाप्रमुख की जन्मतिथि से जुड़े विवाद के अलावा एक विवाद उन्हें रिश्वत की पेशकश किए जाने को लेकर सामने आया, एक अन्य विवाद सेना की कमज़ोर तैयारी को लेकर हुआ... और इस बीच एक अहम सवाल यह उठा कि आखिर सेनाप्रमुख की प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी किसने लीक की। यह शायद इन सभी विवादों का भी असर रहा कि सेना हिली और सरकार हिलती दिखी।

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