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दलितों में भ्रष्टाचार संबंधी आशीष नंदी के बयान से बवाल, मामला दर्ज

 
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दलितों में भ्रष्टाचार संबंधी आशीष नंदी के बयान से बवाल,  मामला दर्ज
जयपुर/नई दिल्ली/नागपुर: डीएससी जयपुर साहित्य महोत्सव में शनिवार को समाजशास्त्री आशीष नंदी के भ्रष्टाचार संबंधी एक बयान ने तूफान खड़ा कर दिया।

रामदास अठावले और मायावती जैसी नेता ने जहां नंदी के बयान की तीव्र आलोचना की वहीं देर शाम जयपुर के अशोक नगर थाने में अनुसूचित जाति/जनजाति (अजा/जजा) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की एक धारा के तहत एफआईआर दर्ज कराया गया।

बयान को तूल दिए जाने के बाद नंदी ने अपनी सफाई में कहा कि उनके बयान का आशय किसी वर्ग विशेष की भावना को आहत करना नहीं था। उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ लगा लिया गया।

उधर, महोत्सव में तीसरे दिन विवाद और इसके बाद हंगामा, ग्लैमर और खेल, महात्मा गांधी का योगदान, भारतीय अस्थिरता और उल्लास का मिला जुला वातावरण छाया रहा।

महोत्सव में 'विचारों का गणराज्य' विषय पर आयोजित सत्र में कहा, "यह अभद्र और असंस्कृत बयान होगा। लेकिन यह सच है कि सबसे भ्रष्ट व्यक्ति ओबीसी, एससी और अब बड़े पैमाने पर एसटी से आ रहे हैं। और जब तक ऐसा होता रहेगा, भारतीय गणराज्य जिंदा रहेगा।" उन्होंने कहा, "मैं एक उदाहरण देना चाहूंगा। सबसे कम भ्रष्ट राज्य पश्चिम बंगाल है। पिछले 100 वर्षों में ओबीसी, एससी, एसटी वर्ग के लोग सत्ता के नजदीक भी नहीं पहुंचे। यह पूरी तरह से स्वच्छ राज्य है।"

इसके बाद दलित समूहों के विरोधी स्वर उठने के बाद उन्होंने सफाई में कहा, "मेरा मानना है कि एक निरंकुश समाज ही भ्रष्टाचार रहित समाज हो सकता है। मैंने यह भी कहा है कि यदि रिचर्ड सोराबजी और मेरे जैसे लोग भ्रष्ट हो जाएं तो मैं संभवत: उनके बेटे को हार्वर्ड भेजूंगा और उसे फैलोशिप दूंगा और बदले में वे मेरी बेटी को ऑक्सफोर्ड भेजेंगे।" उन्होंने आगे कहा, "कोई भी इसे भ्रष्टाचार की तरह नहीं लेगा। असल में यह प्रतिभा को सहारा देने के जैसा लगेगा। लेकिन जब दलित, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग भ्रष्ट होते हैं तो यह वास्तव में अत्यंत भ्रष्ट दिखता है। हलांकि यह दूसरा भ्रष्टाचार बराबरी का है। यह उन्हें अपने अधिकार को तब तक ताकतवर बनाए रखने का मौका देता है जब तक यह समीकरण बना हुआ रहेगा। मुझे गणतंत्र से उम्मीद है।"

नंदी ने कहा कि मुझे खेद है कि मुझे गलत समझा गया। उन्होंने कहा, "यह स्पष्ट होना चाहिए कि न तो मेरी मंशा थी और न ही किसी समुदाय पर हमला करने का प्रयास ही।"

देर शाम को दलित नेता किरोरीलाल मीणा ने अशोक नगर थाने में नंदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया। महोत्सव के प्रस्तोता संजय के राय द्वारा नंदी के बयान पर सफाई दिए जाने के बावजूद यह कदम उठाया गया।

राय ने कहा, "उन्होंने अपनी स्थिति साफ कर दी है और यह साफ है कि यह एक गलतफहमी थी। विवाद आसानी से खड़े हो जाते हैं। कृपया जिम्मेदार बनिए।"

स्तंभकार और तहलका के प्रधान संपादक तरुण तेजपाल ने नंदी के बयान को तूल देने के लिए खेद जताया और कहा कि जब आप ऐसे साहित्य महोत्सवों में आते हैं तो आप विचारों से खेलने के लिए आते हैं।

इधर, नई दिल्ली में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) नेता मायावती ने शनिवार को संवाददाता से बातचीत में राजस्थान सरकार से भ्रष्टाचार को पिछड़े, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति से जोड़ने के समाज विज्ञानी आशीष नंदी के बयान को लेकर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की।

इस बीच, नागपुर में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के अध्यक्ष रामदास अठावले ने आशीष नंदी से पिछड़े और दलितों के भ्रष्ट होने संबंधी बयान बयान वापस लेने की मांग की।

नंदी के बयान को पागलपन करार देते हुए अठावले ने कहा कि उन्होंने दलितों के प्रति निरादर का भाव प्रदर्शित किया है।

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