बीसीसीआई ने खेल मंत्रालय से पूछा, कहां गए हमारे 50 करोड़ रुपये
बीसीसीआई सचिव संजय जगदाले ने मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेटरी को लिखी चिट्ठी में कहा है कि बोर्ड इन पैसों को लेकर पूरी तरह अंधेरे में है।
आईपीएल और मैच फिक्सिंग विवाद में खेल मंत्रालय द्वारा दखल दिए जाने से नाराज़ चल रहे बोर्ड ने 13 जून, 2012 को यह खत लिखा है। दरअसल, मामला है वर्ष 2008 का, जब बीसीसीआई को खेल मंत्रालय से बॉक्सिंग, जूडो, तैराकी, कुश्ती जैसे खेलों को बढ़ावा देने के लिए 25 करोड़ रुपये के फंड के लिए सहयोग का प्रस्ताव आया, लेकिन जुलाई, 2008 में ही फंड को 50 करोड़ रुपये कर देने की गुज़ारिश की गई।
आखिरकार तय हुआ कि इस फंड में बीसीसीआई के 50 करोड़ रुपये के अलावा 30 करोड़ रुपये मंत्रालय भी देगा, जिसका नाम होगा बीसीसीआई-एनएसडीएफ एलीट स्पोर्ट्स टैलेंट (बेस्ट) फंड। इस फंड के लिए बीसीसीआई ने 15 करोड़ रुपये की पहली किश्त जुलाई, 2008 में ही दे दी थी, और बाकी उसके बाद अलग-अलग तारीखों में।
इसके अलावा बीसीसीआई-एनएसडीएफ इम्प्लिमेंटेशन कमेटी के गठन का भी निर्णय लिया गया, जिसमें बीसीसीआई के चार नामांकित सदस्य, एनएसडीएफ एक्जीक्यूटिव काउंसिल के चार सदस्य, खेल मंत्रालय के चार सदस्य, और प्रत्येक नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन से एक-एक सदस्य का रखना तय किया गया। बीसीसीआई ने कमेटी के लिए एन श्रीनिवासन, अरुण जेटली, एमपी पांडोव और अनुराग ठाकुर को नामांकित भी कर दिया था। लेकिन अब खत के जरिये दावा किया गया है कि अक्टूबर, 2009 के बाद से कमेटी की कोई बैठक नहीं हुई है, और बीसीसीआई ने मांग की है कि बेस्ट फंड के बारे में उसे पूरा ब्योरा दिया जाए, और यह भी बताया जाए की फंड के समुचित इस्तेमाल के लिए जो कमेटी बनाई गई थी, उसका क्या हुआ।
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