उपाध्यक्ष बनने के बाद नए अंदाज में राहुल, पार्टी में बदलाव की बात कही
कांग्रेस में नंबर दो की हैसियत मिलने के बाद राहुल गांधी ने अपने पहले संबोधन में कहा कि कांग्रेस हर भारतीय की पार्टी है और मैं सबको एक नजर से देखूंगा। उन्होंने कहा कि हमें आम आदमी को समझना होगा और व्यवस्था में बदलाव लाने की सख्त जरूरत है, लेकिन बदलाव सोच-समझकर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था ऐसी है, जहां चुनिंदा लोगों के हाथों में सत्ता सिमटी रह जाती है। उन्होंने कहा कि अब तेजी से बदलाव की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें 40-50 नेताओं को तैयार करना है, जो देश चलाएं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महात्मा गांधी का संगठन है, लेकिन विपक्ष यह नहीं समझ रहा है।
कांग्रेस के इतिहास में राहुल गांधी तीसरे उपाध्यक्ष हैं, राहुल से पहले अर्जुन सिंह और जीतेंद्र प्रसाद पार्टी के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। युवाओं के बीच खासी पैठ रखने वाले राहुल गांधी के सामने बतौर उपाध्यक्ष कई चुनौतियां हैं। पार्टी का एक बड़ा तबका उन्हें अगले आम चुनावों के बाद प्रधानमंत्री के तौर पर देखना चाहता है।
42 साल के राहुल गांधी के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक उनके युवा प्रशंसकों को वोट में बदलने की है। पिछले साल हुए यूपी विधानसभा के चुनावों में राहुल गांधी ने पार्टी के लिए जमकर पसीना बहाया, लेकिन मतदाताओं ने उन्हें उम्मीद से कम वोट दिए। इसके अलावा हाल ही में गुजरात विधानसभा चुनावों के दौरान भी वोटरों पर उनका जादू उतना नहीं चला, जितने की उम्मीद की गई थी।
कई अहम राष्ट्रीय मुद्दों पर उनकी चुप्पी भी विपक्ष को उन पर हमला बोलने का मौका देती है। इन सब के अलावा संगठनों को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने की जिम्मेदारी भी उन पर होगी।
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