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टाटा को अफसोस, अपने समूह में पूरी पारदर्शिता न ला सके

 
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टाटा को अफसोस, अपने समूह में पूरी पारदर्शिता न ला सके
नई दिल्ली: टाटा समूह के अध्यक्ष रतन टाटा ने कहा कि वह समूह को सही मायने में एक खुला, सीधा और पारदर्शी संगठन नहीं बना सके। वह इस साल के अंत में समूह की कमान छोड़ रहे हैं।

यह पूछने पर टाटा समूह के प्रमुख के तौर पर अपने कार्यकाल में वह ऐसा क्या करना चाहते थे जो नहीं कर सके तो उनका जवाब था, शायद आंतरिक तौर पर मैं सही मायने में इसे एक खुला, सीधा और पारदर्शी संगठन नहीं बना सका जिसके बारे में उम्मीद थी कि हम ऐसा कर सकते हैं। टाटा समूह के प्रमुख ने ब्लूमबर्ग यूटीवी से भेंटवार्ता में कहा कि उनका समूह जो विक्रेताओं के बाजार में पारंपरिक तौर पर एक विनिर्माण कंपनी है वह सही तौर पर ग्राहकों का मूल्य नहीं अपना सकी है।

जनसंपर्क कंपनी चलाने वाली नीरा राडिया का टेप मीडिया में आने के बाद टाटा समूह 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन के विवाद में घसीटा गया। टाटा टेलीसर्विसेज को मिले तीन लाइसेंस उन 122 में लाइसेंस में शामिल हैं जिन्हें उच्चतम न्यायालय ने इस साल रद्द किए हैं।

टाटा को हालांकि उम्मीद है कि वह बिना मूल्य और नैतिकता से समझौता किए बगैर सफलतापूर्वक आगे बढ़ने की विरासत सौंपने में कामयाब होंगे।

अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में नाकाम रहने के बारे में टाटा ने कहा, मुझे लगता है कि समूह के तौर हम आबादी के उस स्तर को नहीं छू सके जिसकी उम्मीद की थी, नैनो इसकी मिसाल है। उन्होंने कहा कि सस्ते उत्पादों के साथ भारत के सबसे गरीब तबके तक पहुंचना वास्तविक और मौजूदा चुनौती है और टाटा समूह बहुत अन्वेषी नहीं हो सका।

टाटा दिसंबर में 100 अरब डॉलर के इस समूह के प्रमुख के पद से विदा होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद वह ग्रामीण विकास, जल संरक्षण और बच्चों व गर्भवती महिलाओं के पोषण से जुड़ी समस्यों पर काम करेंगे।

उन्होंने कहा, मैं फाउंडेशन का अध्यक्ष बना रहूंगा। मैं ग्रामीण विकास, जल संरक्षण पर ध्यान दूंगा और बच्चों व गर्भवती माताओें के पोषण पर काम करना मेरा सबसे स्पष्ट लक्ष्य है क्योंकि इससे आने वाले दिनों में हमारी पूरी जनसंख्या के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में परिवर्तन होगा।

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