अगस्त में शुरू हो सकता है हवाईअड्डा मेट्रो का परिचालन
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक का सफर 18 मिनट में पूरा करने वाली, 23 किलोमीटर लम्बे मेट्रो के इस मार्ग पर करीब 15,000 यात्री प्रतिदिन यात्रा करते हैं।
शहरी विकास मंत्रालय के सचिव सुधीर कृष्ण ने कहा, "यात्रियों की सुरक्षा के लिए हमें सेवा स्थगित करनी होगी। अगस्त के आखिर तक हम इस लाइन पर फिर से परिचालन शुरू होने की उम्मीद कर सकते हैं। हमें पूरा विश्वास है कि एक महीने में परिचालन शुरू हो जाएगा।" उन्होंने कहा कि रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने ढांचागत संरचना में कुछ त्रुटियों के होने की जानकारी दी थी और आग्रह किया था कि मरम्मत के लिए परिचालन को रोका जाए।
पिछले दिनों हुए सलाना निरीक्षण में रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर की अगुआई वाले एक समूह ने पाया था कि इस ऊपरगामी मार्ग के 2,100 बियरिंग्स (खम्भों के ऊपर रखे गए कंकरीट के स्लैब, जिसपर गार्डर रखे जाते हैं) में से 230 बियरिंग्स में दरारें पड़ी हुई हैं।
कृष्ण ने कहा, "भारतीय रेल, दिल्ली मेट्रो और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्च र के अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समिति दरारों की प्रकृति को समझने की कोशिश कर रही है।" उन्होंने कहा, "गार्डर के नीचे मरम्मत करना पड़ेगा।" उन्होंने कहा कि 10 दिनों में समिति के सुझाव आएंगे और उसके बाद मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, "समझौता के मुताबिक जांच की जाएगी और यह तय किया जाएगा कि ठेकेदार की कितनी जिम्मेदारी बनती है।"
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुमित बनर्जी ने कहा कि परिचालन सिर्फ सुरक्षा कारणों से रोका गया है। उन्होंने कहा, "वित्तीय घाटे से इसका कोई सम्बंध नहीं है।" लेकिन उन्होंने माना कि संचालन घाटे में है। उन्होंने कहा, "मैं आपको साफ-साफ कहना चाहता हूं कि इस लाइन से मुनाफा नहीं मिल रहा है। लेकिन हम इस पर परिचालन करते रहेंगे और इसे बंद नहीं करेंगे।"
सेवा का रोजाना इस्तेमाल करने वाले यात्री परिचालन स्थगित करने के फैसले से खासे नाराज हैं।
इस सेवा का रोजाना उपयोग करने वाले गौतम दत्त ने कहा, "सेवा शुरू हुए सिर्फ 16 महीने हुए हैं और ढांचागत समस्या आनी शुरू हो गई। इससे अधिकारियों की लापरवाही का पता चलता है। वे हमारी सुरक्षा को लेकर चिंतित नहीं हैं। अब मेरे पास अपनी कार का उपयोग करने के सिवा और कोई विकल्प नहीं है।"
सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजना के तहत हवाईअड्डा लाइन का निर्माण कार्य दिल्ली मेट्रो रेल निगम ने किया है और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के नेतृत्व में एक समूह को 30 सालों तक इसपर परिचालन करना है और आमदनी को आपस में बांटना है।
कुछ अधिकारियों के मुताबिक जितनी अवधि तक सेव ठप्प रहेगी तब तक के लिए रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चोर मुआवजा मांग सकती है।
5,700 करोड़ रुपये की लागत से बने इस मार्ग पर यात्रा करने वाले 70 फीसदी यात्री हवाई अड्डा जाने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।
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