आप यहां हैं : होम » देश से »

Go Social with Facebook Close

Our Social Reader lets you keep track of your favorite NDTV content (text, photos & videos) on your Facebook Timeline, and discover new content with friends. Read FAQs

NDTV

Facebook

Go Social with Facebook Close

Our Social Reader lets you keep track of your favorite NDTV content (text, photos & videos) on your Facebook Timeline, and discover new content with friends. Read FAQs

NDTV

Facebook

Enable Social Reading
No, Thanks

सरकार से समर्थन वापसी पर असमंजस में फंसी डीएमके

 
email
email
सरकार से समर्थन वापसी पर असमंजस में फंसी डीएमके
चेन्नई: ममता बनर्जी के केंद्र सरकार से समर्थन वापसी के बाद अब डीएमके भी इस मुद्दे पर गहन विचार कर रहा है। सूत्र बता रहे हैं कि इस मुद्दे पर डीएमके में आंतरिक मतभेद दिखाई दे रहे हैं।

लोकसभा में 18 सांसदों के साथ सरकार में शामिल डीएमके अब सबसे बड़ा दल है। कई बड़े नेता जहां यह कह रहे हैं कि डीएमके केंद्र में सरकार के साथ है वहीं, डीएमके ने केंद्र के तमाम फैसलों के खिलाफ राज्य में बुलाए बंद को सफल करने में भी लगी हुई है। गौरतलब है कि डीएमके ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह डीजल के दामों में वृद्धि, सस्ते एलपीजी सिलेंडर की संख्या सीमित करने और रिटेल में एफडीआई के मुद्दे पर केंद्र सरकार के साथ नहीं है।

सूत्र बता रहे हैं कि कुछ पार्टी नेता इन जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार का साथ छोड़ने की बात कर रहे हैं वहीं कुछ नेताओं की राय है कि इस मसले का हल सोनिया गांधी की अध्यक्षता में जारी बैठक में निकल जाएगा।

बता दें कि सरकार की ओर से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पहले ही साफ कर दिया है कि सरकार इन फैसलों पर रोलबैक करने को तैयार नहीं है। वहीं, तमाम सहयोगी दल इस आशा में सरकार के साथ हैं कि सोनिया गांधी पार्टी के नेताओं के साथ बैठक कर इस बारे में निर्णय कर लेंगी कि डीजल के दामों में की गई वृद्धि कम कर दी जाए और सस्ते डीजल के सिलेंडरों की संख्या को बढ़ाया जाए। इन दो मुद्दों पर फैसले के बाद डीएमके के लिए सरकार के साथ जाने का फैसला लेने में आसानी होगी।

वहीं, कुछ नेता मानते हैं कि यह सही समय जब कांग्रेस का साथ छोड़ा जा सकता है जब तमाम कांग्रेसी नेता कोयला घोटाला में शामिल दिखाई दे रहे हैं। आम आदमी के नाम पर जैसे ममता बनर्जी ने कांग्रेस सरकार का साथ छोड़ा है वैसे ही डीएमके को भी करना चाहिए।

पहले भी डीएमके सरकार से दो बार बाहर होने की धमकी दे चुकी है। पहली बार राज्य में विधानसभा चुनाव के पहले उपजे मतभेदों के दौरान ऐसी स्थिति बनी थी। दूसरी बार संयुक्त राष्ट्र में श्रीलंका के तमिलों के मानवाधिकार उल्लंघन के मुद्दे पर सरकार को श्रीलंका के खिलाफ मतदान करना पड़ा था।

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...


Advertisement