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मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई को लेकर सरकार की मुश्किलें बढ़ने की आशंका

 
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मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई को लेकर सरकार की मुश्किलें बढ़ने की आशंका
नई दिल्ली: मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई पर यूपीए के सहयोगी दलों का विरोध जारी है। आज भी डीएमके ने कहा कि वह खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश के खिलाफ है। उसने इसको लेकर पहले ही एक प्रस्ताव भी पास किया है। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर पार्टी का पक्ष रखने के लिए डीएमके नेता टीआर बालू, प्रधानमंत्री से मुलाकात करने वाले भी हैं।

डीएमके का यह ताजा बयान अचानक इसलिए भी अहम हो गया है, क्योंकि सीपीएम ने सोमवार से शुरू हो रहे संसद के शीत सत्र के लिए एफडीआई पर चर्चा का नोटिस दिया है। इसका मतलब है कि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के लिए अपने पक्ष में समर्थन जुटाने में खासी मशक्कत करनी पड़ सकती है। संसद का शीतकालीन सत्र हंगामेदार होने के आसार हैं। लेफ्ट पार्टियों ने 22 नवंबर को लोकसभा का सत्र शुरू होते ही मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई के खिलाफ प्रस्ताव रखने का नोटिस दिया है।

तृणमूल कांग्रेस ने एफडीआई पर ही यूपीए-2 से समर्थन वापस लिया था, जिसके बाद से यूपीए सरकार सपा और बसपा के समर्थन के सहारे चल रही है, जबकि सपा और बसपा दोनों मल्टीब्रांड रिटेल सेक्टर में एफडीआई के खिलाफ हैं।

सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव डी राजा ने चार दलों की बैठक के बाद बताया, वाम दल मत विभाजन के प्रावधान वले नियमों के तहत प्रस्ताव पेश करेंगे और मल्टी-ब्रांड रिटेल में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति देने वाले सरकारी फैसले को खारिज करने की सदन से मांग करेंगे। लोकसभा कार्यवाही में नियम 184 और राज्यसभा में नियम 167 के तहत किसी भी मामले में बहस के बाद मत विभाजन का प्रावधान है।

वाम दलों के जारी वक्तव्य में कहा गया, बैठक में सीपीएम, सीपीआई, आरएसपी और फॉरवर्ड ब्लॉक के शीर्ष नेता शामिल हुए। बैठक में सभी नागरिकों की भोजन तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी खाद्य सुरक्षा विधेयक और सार्वभौमिक जनवितरण प्रणाली के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान छेड़ने का भी फैसला लिया गया।

राजा ने कहा कि ये पार्टियां पांच करोड़ दस्तखत इकट्ठा करने के लिए देश भर में अभियान शुरू करेंगी और दिसंबर, जनवरी महीने में लेफ्ट कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों के हस्ताक्षर लेंगे।

(इनपुट भाषा से भी)

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