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क्या सीएजी पीएम बनना चाहते हैं, दिग्विजय का सीएजी पर हमला

 
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क्या सीएजी पीएम बनना चाहते हैं, दिग्विजय का सीएजी पर हमला

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नई दिल्ली: कांग्रेस के कई नेता सीएजी की भूमिका की आलोचना करते रहे हैं। अब सीएजी ने हमला किया है तो  कांग्रेस की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया मिली है। दिग्वजिय सिंह ने पूछा है कि क्या सीएजी पीएम बनना चाहते हैं।

कैग पर निशाना साधते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि संवैधानिक प्राधिकारों को लक्ष्मण रेखा के दायरे में रहना चाहिए।

तिवारी ने कहा, ‘‘यह सर्वाधिक दुर्भाग्यपूर्ण है कि कैग ने अपनी संख्या (2-जी घोटाले में 1.76 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित घाटे) की शुद्धता को जायज ठहराने के बजाय सरकार की विदेशी जमीन और विदेशी मंच पर आलोचना की।’’

वह कैग विनोद राय द्वारा हारवर्ड के केनेडी स्कूल में कल दिए गए बयान पर पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे।

तिवारी ने कहा, ‘‘सवाल संख्या की शुद्धता के बारे में है। हमारा सवाल नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक से है कि कहां 1.76 लाख करोड़ रुपये का नुकसान है। वह सवाल अब भी बरकरार है।’’
उन्होंने कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब उन्होंने (कैग ने) ऐसा (सरकार की आलोचना) किया है। उन्होंने कहा, ‘‘यह पहला मौका नहीं है जब उन्होंने ऐसा किया है। मेरा मानना है कि संवैधानिक प्राधिकारों को लक्ष्मण रेखा का पालन करना चाहिए।’’

सीपीएम के सांसद सीताराम येचुरी ने सीएजी का समर्थन किया है। उन्होनें कहा कि सीएजी का काम सिर्फ अकाउंट्स का ऑडिट ही नहीं पॉलिसी का ऑडिट भी करना है।

वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को गंभीर बताते हुए कहा है कि सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए।

इससे पहले गुरुवार को पहले 2-जी और फिर कोयला आवंटन घोटाले के मामले में आई सीएजी रिपोर्ट को लेकर खुद पर हो रहे हमलों का सीएजी विनोद राय ने करारा जवाब दिया है।

सीएजी विनोद राय ने एक विदेशी यूनिवर्सिटी में बोलते हुए सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि जो लोग ये समझते हैं कि उनकी भूमिका सिर्फ एकाउंटेंट की है वे गलत हैं।

विनोद राय ने सवाल किया कि क्या संसद और जनता हमें सिर्फ सरकारी खर्चों का एकाउंटेंट ही समझती है? संविधान में जो हमारा रोल है वह हमसे सिर्फ़ एकाउंटेंट बने रहने से ज़्यादा अपेक्षा करता है।

राय ने कहा कि हम सरकारी कामकाज को बेहतर बनाने के लिए प्रबंधन की किसी भी दूसरी संस्था जितना ही काम करते है। सीएजी नौकरशाहों, नेता और पूंजीपतियों के बीच सांठ-गांठ का पर्दाफ़ाश करता रहेगा। उनका कहना था कि सरकार उद्योगों के लिए नीतियां बनाएं ना कि पूंजीपतियों के लिए।

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