यूरो कप 2012 : इटली से हार का बदला लेने उतरेगा जर्मनी
जर्मनी ने 1996 में यूरो खिताब जीतने के बाद कोई बड़ा टूर्नामेंट नहीं जीता है। जर्मनी और इटली के बीच यूरो चैम्पियनशिप या विश्व कप के फाइनल्स में यह आठवां मुकाबला है।
इतालवी कोच सेजार प्रांदेल्ली ने हालांकि कहा, ‘‘कोई भी टीम अपराजेय नहीं है। जर्मनी को बखूबी पता है कि उसे क्या करना है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वे शारीरिक रूप से काफी मजबूत है और उसके पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कामयाब रह चुके हैं। वे हमें कड़ी चुनौती देंगे। हम उनकी कमजोरियों का पता लगाकर उनका फायदा उठाने की कोशिश करेंगे।’’ इटली ने रविवार को कीव में क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड को पेनल्टी शूटआउट में हराया। इतालवी टीम गेंद पर 68 प्रतिशत नियंत्रण के बावजूद निर्धारित समय में कोई गोल नहीं कर सकी थी।
प्रांदेल्ली ने कहा कि जर्मनी को हराने के लिये इटली को आक्रामकता दिखानी होगी। जर्मनी ने पिछले विश्व कप में स्पेन से मिली हार के बाद से लगातार 15 मैच जीते हैं। उसने क्वार्टर फाइनल में यूनान को 4-2 से हराया जिसमें उसके फारवर्ड खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। प्रांदेल्ली को बखूबी पता है कि जर्मन जवाबी हमलों में भी माहिर हैं।
वहीं जर्मन खिलाड़ी मैनचेस्टर सिटी के मारियो बालोतेल्ली पर अंकुश लगाना चाहेंगे जिसने पिछले कुछ मैचों में जबर्दस्त फार्म की बानगी पेश की है। क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल के बीच सिर्फ तीन दिन का अंतराल होने से प्रांदेल्ली अपने मिडफील्डर डेनियेले डे रोस्सी और राइट बैक इग्नाजियो अबेते की फिटनेस को लेकर चिंतित हैं। राइट बैक क्रिस्टियन मैजियो पहले ही निलंबित हैं।
फरवरी 2011 में दोनों टीमों के बीच दोस्ताना मैच 1-1 से ड्रा रहा था। आखिरी बार दोनों टीमें विश्व कप 2006 के सेमीफाइनल में भिड़ी थी जिसे इटली ने अतिरिक्त समय में 2-0 से जीता था।
जर्मन कोच जोकिम लोउ ने पिछले कुछ साल में इटली के खिलाफ हाथ लगी नाकामी को तूल नहीं देते हुए कहा, ‘‘हम बीता समय वापिस नहीं ला सकते। उसे भूल जाना ही बेहतर है। हम रणनीति बनाते समय उस पर विचार नहीं करते।’’ इटली के प्लेमेकर आंद्रिया पिरलो का मानना है कि जर्मन टीम डरी हुई है जिसका इटली को फायदा मिलेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘जर्मन टीम हमसे डरी हुई है। अतीत में भी हम उन्हें काफी परेशान कर चुके हैं और वे नहीं चाहेंगे कि 2006 में जो हुआ, वह फिर हो।’’ लोउ ने टूर्नामेंट में अपने फैसले से सभी को चौकाया है । उन्होंने यूनान के खिलाफ छह में से तीन फारवर्ड खिलाड़ी बदलकर मारियो गोमेज, लुकास पोडोलस्की और थामस मूलर को बाहर कर दिया था।
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